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कारोबार जगत के चमकते सितारे थे साइरस मिस्त्री, 10 प्वाइंट में जानें उनका सफर!

टाटा संस (Tata Sons) के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) का रविवार को भीषण सड़क हादसे में निधन हो गया. वे 54 वर्ष के थे. गुजरात के अहमदाबाद से मुंबई लौटते समय पालघर में उनकी लग्जरी कार डिवाइडर से टकरा गई. इस हादसे में उनके साथ कार में सवार एक और व्यक्ति की जान चली गई.

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कारोबार जगत के चमकते सितारे थे साइरस मिस्त्री
कारोबार जगत के चमकते सितारे थे साइरस मिस्त्री

भारतीय कारोबार जगत का एक चमकता हुआ सितारा रविवार को दुनिया छोड़कर चला गया. हम बात कर रहे हैं टाटा संस (Tata Sons) के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) की. जिनकी एक कार हादसे में मौत हो गई. साइरस ने बेहद कम समय में सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ था और उन्हें कई बातों के लिए याद किया जाएगा. 

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कम उम्र में बड़े मुकाम किए हासिल
बिजनेस टायकून शापूरजी पालोनजी मिस्त्री (Shapoorji Pallonji Mistry) के छोटे बेटे साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) ने लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद दुनियाभर में फैले फैमिली बिजनेस में एंट्री की और अपनी काबिलियत की दम पर कारोबार को नई बुलंदियों तक पहुंचाया. साइरस देश के जाने-माने कारोबारी समूह टाटा ग्रुप (Tata Group) में टॉप पर पहुंचने वाले सबसे युवा और बिना टाटा सरनेम वाले व्यक्ति थे.

साइरस मिस्त्री को दिसंबर 2012 में टाटा संस का चेयरमैन (Tata Sons Chairman) नियुक्त किया गया था. हालांकि, वे चार साल ही इस पद पर रह सके और 2016 में उनसे यह जिम्मेदारी छीन ली गई. 

टाटा के साथ विवाद सुर्खियां बना
टाटा के साथ विवाद सुर्खियां बना

टाटा से लड़ी लंबी कानूनी जंग
टाटा ग्रुप (Tata Group) के साथ शुरू हुए विवाद के बाद लाइमलाइट से दूर रहने वाले साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) सुर्खियां बनने लगे और उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. हालांकि, कोर्ट का फैसला टाटा के पक्ष में गया. टाटा से अलग होने के बाद साइरस ने फिर अपने फैमिली बिजनेस को संभालना शुरू कर दिया था.

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कानूनी जंग के साथ उनका पूरा फोकस अपने बिजनेस को बढ़ाने पर रहा. लेकिन साल 2022 उनके लिए बेहद बुरा साबित हुआ. पहले जून महीने में उनके पिता शापूरजी पालोनजी का निधन हो गया और 4 सितंबर 2022 को साइरस ने दुनिया को अलविदा कह दिया. आइए 10 प्वाइंट में समझते हैं उनके सफर के बारे में...

शापूरजी पालोनजी का जून 2022 में निधन
शापूरजी पालोनजी का जून 2022 में निधन

 
1- शापूरजी पालोनजी मिस्त्री के छोटे बेटे साइरस पालोनजी मिस्त्री का जन्म 4 जुलाई 1968 को आयरलैंड में हुआ था. उनकी मां आयरिश थीं, इसलिए साइरस भी आयरलैंड के नागरिक थे.

2- साइरस ने मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की थी. फिर इंपीरियल कॉलेज लंदन से 1990 में सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री प्राप्त की और बाद में लंदन बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट में एमएससी किया था. 

3- साल 1991 में उन्होंने अपने फैमिली बिजनेस में एंट्री ली और उन्हें शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी में डायरेक्टर बनाया गया. इसके बाद 1994 में उन्हों प्रमोशन देते हुए मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया गया. 

4- साल 2006 में साइरस टाटा ग्रुप के साथ आए और उन्हें Tata Power और Tata Elxsi का डायरेक्टर नियुक्त किया गया. इसके बाद टाटा समूह में उनका दबदबा लगातार बढ़ता गया.

5- साल 2011 में वे टाटा समूह मे डिप्टी चेयरमैन बना दिए गए. उनके आगे बढ़ने का सिलसिला यहीं नहीं थमा और 2012 में रतन टाटा की जगह साइरस टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने. टाटा ग्रुप में शापूरजी परिवार 18.4 फीसदी का हिस्सेदार है.

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6- साल 2016 के अक्टूबर महीने में टाटा संस के बोर्ड ने उन्हें इस पद के लिए हटाने का फैसला लिया. इसके बाद टाटा के साथ उनका विवाद शुरू हो गया, जो सुर्खियों में रहा.

7- टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद साइरस मिस्त्री ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच के सामने याचिका दायर की. 2017 में एनसीएलटी ने उन्हें चेयरमैन पद से हटाए जाने के फैसले को सही ठहराया.

8- इसके बाद दिसंबर 2019 में साइरस मिस्त्री फैसले के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपॉलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) गए. एनसीएलएटी ने उन्हें चेयरमैन पद से हटाए जाने के टाटा ग्रुप के बोर्ड के फैसले को अवैध करार दिया.

9- जनवरी 2020 में टाटा संस NCLAT के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा. मार्च 2021 को चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने आखिरकार मामले का निपटारा करते हुए फैसला टाटा के पक्ष में सुनाया.  

10- चार सितंबर 2022 को अहमदाबाद से मुंबई लौटते समय महाराष्ट्र के पालघर में उनकी मर्सिडीज कार डिवाइडर से टकरा गई. इस हादसे में साइरस मिस्त्री की 54 वर्ष की उम्र में मौत हो गई. 

कारों और घुड़सवारी के शौकीन थे मिस्त्री
साइरस मिस्त्री की शादी 1992 में रोहिका छागला से हुई थी और उनके दो बेटे हैं. जिनका नाम फिरोज और जहान है. उनके बारे में कहा जाता है वे शानदार कारों और घुड़सवारी के शौकीन थे. उनके फैमिली बिजनेस की बात करें तो पालोनजी ग्रुप में करीब 25,000 कर्मचारी काम करते हैं और इनका कारोबार भारत समेत मध्य पूर्व व अफ्रीका तक फैला हुआ है. कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अग्रणी उनके ग्रुप ने देश में कई नामचीन इमारतें, होटल और स्टेडियम का निर्माण किया है. 

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