
बात 80 के दशक की ही है. लगभग 24-25 साल के एक लड़के की दिलचस्पी स्टॉक में मार्केट में बढ़ने लगी थी. दशक जब आधा बीतने को आया, तो उसने अपने पिता से स्टॉक मार्केट में उतरने के लिए पैसे मांगे. पिता ने सीधा मना कर दिया. साथ ही ये भी हिदायत दी कि वो अपने किसी दोस्त से पैसे लेने की कोशिश भी ना करें. पिता के शब्द साफ थे...अगर तुम्हें शेयर बाजार में उतरना है, तो इसके लिए पैसे खुद कमाओ. पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) उस लड़के ने पैसा जमा किया और साल 1985 में 5000 रुपये निवेश कर स्टॉक मार्केट की दुनिया में कूद गया. इसके बाद सिर्फ इतिहास बने और वो लड़का भारत का सबसे बड़ा इन्वेस्टर बना... नाम था राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala).
विजनरी व्यक्ति थे झुनझुनवाला
मजाकिया और तेज दिमाग वाले राकेश झुनझुनवाला का 14 अगस्त, 2022 को निधन हो गया था. पिछले साल जब उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा था तब उनकी नेटवर्थ करीब 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास थी. राकेश झुनझुनवाला ने महज 5 हजार रुपये से हजारों करोड़ की संपत्ति खड़ी कर दी थी. उनके पुराने और करीबी मित्र बताते हैं कि राकेश झुनझुनवाला शुरुआती दिनों से ही एक विजनरी व्यक्ति थे. उन्होंने कई लोगों से टाइटन और क्रिसिल में पोजिशन लेने के लिए कहा था. वो इन कंपनियों की लॉन्ग टर्म की क्षमता को देख सकते थे और वो उस पर कायम भी रहे.
टाइटन से कमाया जोरदार मुनाफा
साल 1985 में स्टॉक मार्केट में एंट्री करने वाले राकेश झुनझुनवाला ने 1990 के दशक के अंत में टाइटन इंडस्ट्रीज में पोजिशन लेने की शुरुआत की. ये साल 2002 में टाइटन के शेयर खरीदने की पॉपुलर कहानी से काफी पहले की बात है. दरअसल, कहा जाता है कि साल 2002-03 में राकेश झुनझुनवाला ने टाटा समूह की कंपनी टाइटन (Titan) में पैसे लगाए थे. उस वक्त उन्होंने तीन रुपये के हिसाब से टाइटन के छह करोड़ शेयर खरीदे लिए थे. एक समय झुनझुनवाला के पास टाइटन के करीब 4.5 करोड़ शेयर हो गए थे, जिनकी वैल्यू 7000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई थी.
चमकने लगा पोर्टफोलियो
खैर, वापस 1980 के दशक की तरफ लौटते हैं. साल 1986 से 1989 के बीच झुनझुनवाला ने टाटा पावर लिमिटेड सहित ब्लू-चिप कंपनियों में बड़े निवेश किए. कंपनियों के शेयरों ने छलांग लगाई और राकेश झुनझुनवाल का पोर्टफोलियो चमकने लगा. राकेश झुनझुनवाल ने अपना पहला मुनाफा टाटा टी (Tata Tea) के शेयरों के बेचकर कमाया था. उन्होंने कंपनी के 5,000 शेयर 43 रुपये में खरीदे थे और उन्हें 143 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से बेच दिया था. 90 के दशक की शुरुआत तक राकेश झुनझुनवाला दलाल स्ट्रीट में अपनी पहचान स्थापित कर चुके थे और उनका पोर्टफोलियो मुंबई की दरिया में उगते सूरज की तरह चमक रहा था.
गलतियां करना और उनसे सीखना
राकेश झुनझुनवाला का मानना था कि मार्केट में उनका सबसे शानदार नॉलेज गलतियां करना और उनसे सीखना है. वो हमेशा सबसे टॉप होने के बारे में सोचा. उनके मुताबिक, अगर हम हमेशा सर्वोच्च होने के सिद्धांत को सही नहीं समझेंगे तो लंबे समय तक कभी पैसा नहीं कमा पाएंगे. स्टॉक मार्केट को लेकर उनकी टिप्पड़ी हमेशा रोचक रही. एक बार उन्होंने कहा था 'बाजार महिलाओं की तरह है- हमेशा प्रभावशाली, रहस्यमय, अप्रत्याशित और अस्थिर.'
स्टॉक मार्केट हमेशा सही होते हैं
राकेश झुनझुनवाला का मानना था कि स्टॉक मार्केट्स हमेशा सही होते हैं. वो कहते थे कि मेरे पास एकमात्र नियम है कि कोई नियम ही नहीं है. वो निवेशकों से हमेशा कहते थे कि प्राइस का सम्मान करें. क्योंकि हर कीमत पर एक खरीदने वाला और एक बेचने वाला होता है. कौन सही है, यह तो भविष्य ही तय करता है. इसलिए कीमत का सम्मान करना सीखें, क्योंकि आप गलत हो सकते हैं.
वो हमेशा से भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक रहे. उन्होंने एक बार कहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था में इतनी ताकत है कि वो 10 फीसदी का जीडीपी दर हासिल कर सकती है. वो हमेशा भारतीय शेयरों में निवेश करने के पक्षधर थे. शेयर मार्केट कितना भी गिर जाए, वो हमेशा कहते थे कि अगर नुकसान बाजार में हुआ है, तो मुनाफा भी यहीं होगा.
जबरदस्त धैर्य का परिचय
साल 2021 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने धैर्य को एक उदाहरण के जरिए समझाया था. उन्होंने कहा- '2001 में 2900 के इंडेक्स पर हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) 327 रुपये पर था. हिंदुस्तान यूनिलीवर 11 वर्षों तक इस कीमत के आस-पास बना रहा था. इंडेक्स 2900 से 22,000 पर पहुंच गया. HUL ने केवल 2012 में उस कीमत को पार किया. 11 साल तक लाभांश के अलावा कोई रिटर्न नहीं था. ऐसा इसलिए क्योंकि पिछली अवधि में HUL पहले ही भाग चुका था.
राकेश झुनझुनवाला निवेशकों से कहते थे कि वे किसी शेयर को एक दिन की गिरावट या एक खराब तिमाही के आधार पर न आंकें, बल्कि केवल लंबी अवधि में उसके प्रदर्शन के आधार पर ही उसका मूल्यांकन करने में विश्वास रखें.
ऐसे मौके को भुनाया
द बिग बुल ऑफ दलाल स्ट्रीट: हाउ राकेश झुनझुनवाला मेड हिज फॉर्च्यून नाम से छपी किताब में एक जबरदस्त किस्सा है. ये राकेश झुनझुनवाला के विजन को दर्शाने के लिए काफी है. दरअसल, एक फार्मा कंपनी राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रही थी. मामला कंपनी के वित्तीय स्थिति से संबंधित नहीं था.
लेकिन इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टॉक क्रैश हो गया. तब राकेश झुनझुनवाला ने संबंधित लोगों से मामले की बुनियादी बातों को पूछा. पता चला नंबर्स मजबूत हैं. कंपनी पर बिल्कुल कोई वित्तीय जोखिम नहीं था. राकेश झुनझुनवाला मौका भांप गए.
उन्हें पता लग गया कि स्टॉक अनुमान से अधिक टूट चुका है. एक पल में उन्होंने अपने डीलर को बुलाया और और स्टॉक में पोजिशन लेने के लिए कह दिया. तीन-चार दिन बाद कंपनी के राजनीतिक संकट के संबंध में स्पष्टीकरण जारी हुआ और शेयरों में उछाल आ गया. तब राकेश झुनझुनवाला ने जमकर पैसा कमाया और लंबे समय तक स्टॉक में बने रहे. राकेश झुनझुनवाला का हमेशा यही मानना था कि निवेशकों को लॉन्ग टर्म पर फोकस करना चाहिए.
सेंसेक्स की चाल और झुनझुनवाला की कमाई
सेंसेक्स के साथ उनके पोर्टफोलियो के प्रदर्शन की तुलना करें, तो साल 1986 में बेंचमार्क सेंसेक्स 561 अंक पर था. राकेश झुनझुनवाला की मृत्यु के समय यह 59,842 पर कारोबार कर रहा था. इस दौरान सेंसेक्स ने 106 गुना की बढ़ोतरी हासिल की. यदि हम सेंसेक्स के रिटर्न दर की गणना करें, तो यह 13.8% कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) होगी. यह कहीं भी राकेश के CAGR से मेल नहीं खाता है, जो 5000 रुपये से 35,000 करोड़ तक पहुंचा.
अकेले शेयरों में निवेश से मिले रिटर्न ने राकेश झुनझुनवाला की किस्मत नहीं बनाई. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में अधिक जोखिम भरे लीवरेज वाले दांव (उधार) लगाए और इससे उनका व्यक्तिगत रिटर्न सेंसेक्स से काफी अधिक हो गया. हालांकि, यह सब आसान नहीं था. साल 1993 से 1999 का एक ऐसा भी दौर था, जब उन्होंने ट्रेडिंग से ज्यादा पैसा नहीं कमाया. ऐसे समय में उन्होंने अपना धैर्य बनाए रखा.
'प्राइस का सम्मान करें'
आज राकेश झुनझुनवाला इस दुनिया में नहीं हैं. लेकिन दलाल स्ट्रीट में जब-जब उनके पोर्टफोलियो में शामिल स्टॉक लाल या हरे निशान में नजर आते हैं...उनकी कही कई बातें शायद निवेशकों के दिमाग में घूमने लगती होंगी... उनमें से एक ये कि प्राइस का सम्मान करें.. क्योंकि हर कीमत पर कोई खरीदने वाला, तो कोई बेचने वाला होता है.
झुनझुनवाला क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन की तरह थे. ब्रैडमैन ने जितना खेला.. वो आने वाली पीढ़ी के लिए बेंचमार्क बना. राकेश झुनझुनवाला ने भी दलाल स्ट्रीट में जो भी फैसले लिए. जहां भी दांव लगाया सब बेंचमार्क ही बने. राकेश झुनझुनवाला एक ऐसे शख्स थे, जिन्होंमे सेंसेक्स को 500 अंक से 60,000 के आंकड़े को पार करते हुए करीब से देखा था. सेंसेक्स को टूटते-गिरते और इतिहास रचते भी देखा था.