भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में उतार-चढ़ाव जारी है और सेंसेक्स-निफ्टी (Sensex-Nifty) संभल नहीं पा रहे हैं. इसमें अन्य कारणों के साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी अहम रोल है, जो लगातार बाजार से पैसे निकाल रहे हैं. इस साल 2025 में जो निकासी की गई है, वो अब एक बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही है. FII ने इस साल की शुरुआत से 14 फरवरी तक महज 33 दिन में ही करीब 1 लाख करोड़ रुपये की भारी भरकम बिकवाली की है. आइए जानते हैं कि कब खत्म हो सकती है इन विदेशी संस्थागत निवेशकों की बेरुखी और इसके लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
फरवरी में अब तक 21000Cr से ज्यादा निकाले
रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 से अब तक विदेशी निवेशकों ने लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं. यही नहीं इस दौरान शेयर बाजार का भी बुरा हाल रहा है और जहां BSE सेंसेक्स करीब 10% तक गिर गया है, तो मिडकैप (19%) और बीएसई स्मॉलकैप (21%) तक फिसला है. अगर बात सिर्फ चालू फरवरी महीने की ही करें, तो विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से 21,272 करोड़ निकाले गए हैं और जनवरी में निकाले गए 78,027 करोड़ रुपये को मिलाकर ये करीब 1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाता है.
भारत ही नहीं इन देशों से भी जमकर निकासी
विदेशी निवेशकों की बेरुखी सिर्फ भारतीय बाजारों के प्रति ही दिखाई नहीं दे रही है, बल्कि FIIs अन्य उभरते हुए बाजारों से भी पैसे निकाल रहे हैं. कोटक सिक्योरिटीज की मानें, तो इस लिस्ट में भारत के साथ ही ब्राजील, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, ताइवान और वियतनाम जैसे बाजार भी शामिल हैं. हालांकि, इनमें सबसे ज्यादा निकासी भारतीय बाजारों से देखने को मिली है.
FIIs के निकालने का बड़ा कारण
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजारों से पैसे निकालने के पीछे कई वजह हैं. इनकी आगे की रणनीति भी डॉलर सूचकांक के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगी. दरअसल, US Dollar के लगातार मजबूत होने से निवेशक उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर वहां निवेश कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर भारतीय रुपये में लगातार गिरावट देखने को मिली है. इसके अलावा भारतीय कंपनियों के कमजोर नतीजों ने भी निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाला है, जिसने बिकवाली की रफ्तार को बढ़ावा देने का काम किया है.
FII की बिकवाली को लेकर वॉटरफील्ड एडवाइजर्स के सीनियर डायरेक्टर-लिस्टेड इन्वेस्टमेंट्स, विपुल भोवर बताते हैं कि वैश्विक नीतियों, खासकर अमेरिकी नीतियों में हालिया बदलाव एफआईआई के बीच अनिश्चितता पैदा करने वाला रहा है. यह बदलाव भारत जैसे गतिशील बाजारों में उनकी निवेश रणनीतियों को बदल रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी एसेट्स का आकर्षण बढ़ा है और इसकी वजह बॉन्ड यील्ड में वृद्धि है, जो निवेश को अधिक सुरक्षित बना रहा है. ये सबसे बड़ा कारण है कि निवेशक अमेरिकी इक्विटी में मिलने वाले सुरक्षित रिटर्न की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
कब संभलेंगे हालात?
एक्सपर्ट अभी कुछ समय तय विदेशी निवेशकों का प्रवाह अस्थिर रहने का आशंका जता रहे हैं. हालांकि, जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि एफआईआई की रणनीति में बदलाव तब होगा, जब डॉलर इंडेक्स नीचे जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसा होगा, लेकिन हम यह अनुमान नहीं लगा सकते कि कब तक होगा.