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सड़क से लेकर पानी तक.. महंगे डीजल का विरोध, 600 नावों ने किया किनारा

Fishing Industry: पेट्रोल और डीजल के दाम में उछाल का असर लगभग हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. इसका इम्पैक्ट गुजरात की फिशिंग इंडस्ट्री पर भी देखने को मिल रहा है. यहां मछुआरों ने नावों को समुद्र में ले जाने की जगह नावों को किनारों पर लगा दिया है.

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डीजल के दाम बढ़ने से फिशिंग इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ा है
डीजल के दाम बढ़ने से फिशिंग इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ा है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना और महंगाई ने तोड़ी इंडस्ट्री की कमर
  • मछुआरों ने सरकार से की मदद की अपील

डीजल के दाम (Diesel Price) में उछाल का असर फिशिंग इंडस्ट्री पर बहुत अधिक पड़ा है. डीजल की कीमत में तेजी का असर गुजरात के कच्छ जिले के जखौ बंदर के मछुआरों पर सीधे तौर पर पड़ा है. पूरी फिशिंग इंडस्ट्री इस वजह से दबाव में है. इसकी वजह ये है कि मछुआरे मछली पकड़ने के लिए जितना खर्च डीजल पर कर रहे हैं, उसके मुकाबले उन्हें फिश का दाम नहीं मिल पा रहा है. इस वजह से ये घाटे का सौदा साबित हो रहा है.

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मछुआरों ने किनारों पर खड़े कर दिए हैं बोट्स

गुजरात के कच्छ जिले का जखौ बंदर इलाका फिशिंग के लिए काफी पॉपुलर है. पाकिस्तान की सीमा से सटे इस इलाके में काफी कीमती और अच्छी क्वालिटी की फिश पाई जाती है. लेकिन डीजल के बढ़े हुए दाम ने यहां कि फिशिंग इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कारोबार में घाटा होने की वजह से मछुआरों ने सीजन खत्म होने से पहले ही अपनी नावों को तटों के किनारे लगा दिया है. आज के समय में महज 300 नाव ही फिशिंग के लिए समु्द्र में जाते हैं, बाकी नावें किनारे पर लगी हुई हैं. दूसरी ओर, मछुआरों का कर्ज लगातार बढ़ते जा रहा है. 

कोरोना और महंगाई ने तोड़ी इंडस्ट्री की कमर

जखौ फिशरमैन एसोसिएशन के प्रमुख अब्दुलशा पीरजादा ने कहा, "सीजन के दौरान मछली पकड़ने का कारोबार पूरे जोरों पर होता है. यही वजह है कि यहां से देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी बड़े पैमाने पर मछलियों का निर्यात किया जाता है.  फिशिंग इंडस्ट्री विदेशी मुद्रा की कमाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. कोरोना के बाद पिछले दो-तीन साल से महंगाई ने राज्य की फिशिंग इंडस्ट्री के हाल को बेहाल कर दिया है. इससे राज्य में समुद्री किसानों की आजीविका की चिंता बढ़ रही है. जानकारों के मुताबिक अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो जल्द ही राज्य भर में फिशिंग इंडस्ट्री से जुड़े बहुत सारे लोग बेरोजगार हो जाएंगे."

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सरकार से मदद की अपील

स्थानीय मछुआरे घेलाराम बारैया ने कहा, "हम केंद्र सरकार से अपील करते हैं कि वह हमारी मुसीबत को समझे और हमारी मदद करे. अगर ऐसा ही रहा तो हमें अपना पारंपरिक व्यवसाय छोड़कर कोई और रोजगार ढूंढना पड़ेगा, डीजल के दाम कम हो तो हमें बहुत बड़ी राहत मिल सकती है."

श्रमिकों को हुआ नुकसान

जखौ फिशरमैन एसोसिएशन के प्रमुख अब्दुलसा पीरजादा बताते हैं कि सामान्य स्थिति में राज्यभर में करीब 900 छोटी-बड़ी नावें फिशिंग के लिए समुद्र में जाती हैं. लेकिन डीजल का रेट बढ़ने से हो रहे घाटे की वजह से अभी केवल 300 छोटी-बड़ी नावें ही फिशिंग के लिए जा रही हैं. इस वजह से मछली पकड़ने वालों ने 50 फीसदी श्रमिकों को काम से हटा दिया है. 

कच्छ जिले में डीजल की कीमत

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने सोमवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दाम (Petrol-Diesel Price) में इजाफा किया. इस तरह पिछले 14 दिन में कंपनियों ने 12वीं बार पेट्रोल, डीजल के रेट बढ़ा दिए. कच्छ जिले में सोमवार को डीजल का भाव बढ़कर 98.63 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया. शहर में पेट्रोल का रेट (Petrol Price) 104.33 रुपये पर पहुंच गया है.

 

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