जीवन उतार-चढ़ाव और लगातार अनिश्चितताओं का नाम है. दर्शन शास्त्र में इस अनिश्चितता पर ढेर सारे सिद्धांत प्रतिपादित किए गए हैं. इसके बेहिसाब उदाहरण हर कोई अपने आस-पास में खोज सकता है. कुछ ऐसी ही कहानी है मोहम्मद खालिद पाएंदा (Mohammad Khalid Payenda) की, जो कुछ महीने पहले तक अपने देश में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन आज परिवार का पेट भरने के लिए अमेरिका में टैक्सी चलाने पर मजबूर हो गए हैं.
परिवार के जीवन-यापन के लिए बने टैक्सी ड्राइवर
दी वाशिंगटन पोस्ट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री (Former Afghan Finance Minister) मोहम्मद खालिद पाएंदा इन दिनों अमेरिका में उबर कैब चला रहे हैं. अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) के कब्जे से पहले वह वित्त मंत्री थे. तख्तापलट की आशंका में वह अपना देश छोड़कर अमेरिका चले गए थे, जहां वह जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी (George Town University) में एडजंक्ट प्रोफेसर भी हैं, लेकिन अपने परिवार के जीवन-यापन के लिए वह पार्टटाइम उबर कैब भी चलाते हैं.
वाशिंगटन डीसी में चलाते हैं उबर कैब
रिपोर्ट के अनुसार,वाशिंगटन डीसी (Washington DC) में उबर ड्राइव करने वाले पाएंदा कहते हैं कि उन्हें अपने परिवार को सपोर्ट करने का मौका मिला है, जिसे वह अपना सौभाग्य मानते हैं. वह कहते हैं, 'अभी मेरे लिए कहीं कोई जगह नहीं है. मैं न यहां (अमेरिका) का हूं, न वहां (अफगानिस्तान) का. यह बहुत खालीपन वाली स्थिति है.' उबर से होने वाली कमाई को लेकर अफगानिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री कहते हैं, 'अगर मैं अगले 2 दिन में 50 ट्रिप पूरा कर लेता हूं तो मुझे 95 डॉलर का बोनस मिलेगा.'
अफगानिस्तान का वित्त मंत्री बनने पर अफसोस
खबर में बताया गया है कि पाएंदा की मां 2020 में कोविड का शिकार बन गई थीं. इसके कुछ ही समय बाद उन्हें अफगानिस्तान का वित्त मंत्री बनाया गया. हालांकि अभी उन्हें इस बात का अफसोस है कि वह क्यों मंत्री बने ही थे. वह कहते हैं, 'मैंने बहुत सारा पागलपन देखा है और हम फेल हुए हैं. मैं भी उस फेल्योर का हिस्सा था. जब आप लोगों की बदहाली देखते हैं तो बहुत मुश्किल होता है और आप जिम्मेदारी महसूस करने लगते हैं.'
अमेरिका को भी जिम्मेदार मानते हैं पाएंदा
पाएंदा अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति के लिए अमेरिका को भी जिम्मेदार मानते हैं. वह कहते हैं कि शायद अफगानिस्तान के लोगों में सुधार की इच्छाशक्ति नहीं है, लेकिन अमेरिका लोकतंत्र और मानवाधिकार के अपने वादे से पीछे हटा है. हो सकता है कि इसके पीछे कोई अच्छी सोच रही हो, लेकिन जो हुआ है, संभवत: अमेरिका भी ऐसा परिणाम नहीं चाहता होगा.
तालिबान के कब्जे से 1 सप्ताह पहले छोड़ा पद
तालिबान ने हाल ही में वापस अफगानिस्तान को अपने कब्जे में कर लिया है. अफगानिस्तान से सारे सैनिक हटाने के अमेरिका के फैसले से तालिबान का मनोबल बढ़ा. अफगानी सेना और तत्कालीन सरकार तालिबान का सामना करने में असफल रही. राजधानी काबूल पर तालिबान के कब्जे से महज 1 सप्ताह पहले पाएंदा ने वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था और अमेरिका चले गए थे. तालिबान के कब्जे से पहले ही तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ घनी अहमदजई (Ashraf Ghani Ahmadzai) के साथ पाएंदा के संबंध खराब हो गए थे. पाएंदा को इसके बाद डर था कि कहीं घनी उन्हें अरेस्ट न करा दें.