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भारत में क्यों महंगा मिलता है iPhone, रघुराम राजन ने बताया गणित, PLI स्कीम पर उठाया सवाल

राजन ने अपनी बात को साफ करने के लिए सेलफोन इंडस्ट्री का सहारा लिया. उन्होंने बताया कि साल 2018 में मोबाइल के इम्पोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 20 फीसदी बढ़ा दिया गया. इससे मोबाइल की घरेलू कीमतें बढ़ गईं. इसी कारण जो आईफोन अमेरिका में कम कीमत में मिल जाता है, भारत में उसका दाम काफी बढ़ जाता है.

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राजन ने उठाए पीएलआई स्कीम पर सवाल
राजन ने उठाए पीएलआई स्कीम पर सवाल

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Former RBI Governor Raghuram Rajan) अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं. एक ताजा नोट में उन्होंने भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेन्टिव स्कीम यानी पीएलआई योजना (PLI Scheme)  पर सवाल उठाया है. इसके लिए उन्होंने आईफोन (iPhone) का उदाहरण दिया है और समझाया है कि कैसे जो आईफोन अमेरिका में 92,500 रुपये मे मिल जाता है, उसी की कीमत भारत में बढ़कर 1.29 लाख रुपये हो जाती है.

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भारत में ये बुनियादी कमियां

उन्होंने नोट में लिखा है, 'भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. इसके अलावा महंगे कर्ज, सही से बिजली की उपलब्धता में दिक्कत, डिजाइन के मामले में सीमित क्षमता और भारतीय कामगारों में कौशल का अभाव जैसी समस्याएं हैं, जो भारत में विनिर्माण कम होने के मुख्य कारण हैं. चूंकि इन दिक्कतों को दूर करने में अधिक समय लगेगा, इसी कारण सरकार एक ऐसा विकल्प चाहती है जिसमें कम समय लगे. यही वजह है कि एक के बाद एक कई सेक्टरों के लिए सरकार पीएलआई स्कीम ला रही है.'

इस कारण बढ़ जाता है दाम

राजन ने अपनी बात को साफ करने के लिए सेलफोन इंडस्ट्री का सहारा लिया. उन्होंने बताया कि साल 2018 में मोबाइल के इम्पोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 20 फीसदी बढ़ा दिया गया. इससे मोबाइल की घरेलू कीमतें बढ़ गईं. उदाहरण के लिए जो आईफोन 13 प्रो मैक्स (iPhone 13 Pro Max Price In US) शिकागो में टैक्सेज मिलाकर 92,500 रुपये में मिल जाता है, समान फीचर्स वाले उसी मॉडल की कीमत (iPhone 13 Pro Max Price In India) भारत में 40 फीसदी बढ़कर 1.29 लाख रुपये हो जाती है.'

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टैक्सपेयर्स उठा रहे सब्सिडी का बोझ

भारत में पीएलआई स्कीम के तहत मैन्यूफैक्चरर्स को पहले साल सेल फोन बनाने पर सरकार की ओर से 6 फीसदी हिस्सा मिल जाता है, जो घटते-घटते पांचवें साल में 4 फीसदी पर आ जाता है, बशर्ते मैन्यूफैक्चरर्स इंक्रीमेंटल इन्वेस्टमेंट और सेल्स के टारगेट को पूरा करते हैं. राजन ने कहा कि इस स्कीम में भारत में मैन्यूफैक्चर होने वाले सेल फोन की मिनिमम वैल्यू की कोई लिमिट नहीं है. इसका मतलब हुआ कि मैन्यूफैक्चरर सारे पार्ट को इम्पोर्ट कर सकता है और यहां लाकर असेंबल कर सकता है. इसके बाद भी वह स्कीम के सारे फायदे उठा सकता है. इसका मतलब हुआ कि मैन्यूफैक्चरिंग को जिस तरह से बढ़ना चाहिए, वह नहीं हो रहा है लेकिन सब्सिडी का बोझ टैक्सपेयर्स उठा रहे हैं. इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि सब्सिडी की अवधि समाप्त होने के बाद बाहरी मैन्यूफैक्चरर्स यहां टिके रहें.

भारत में हो रही सिर्फ असेंबलिंग

राजन ने पीएलआई स्कीम से पैदा हो रहे रोजगार की संख्या पर भी सवाल उठाया. राजन ने आयात और निर्यात के आंकड़ों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में भले ही निर्यात तेजी से बढ़ा हो, लेकिन ऐसा तो तब भी हो रहा था जब पीएलआई स्कीम लागू नहीं हुई थी. वहीं आयात को देखें तो वह अभी बढ़ रहा है, जबकि स्कीम से पहले उसमें ठहराव आने लगा था. इससे भी साफ पता चलता है कि मैन्यूफैक्चरर्स को पीएलआई स्कीम के कारण पार्ट को इम्पोर्ट कर यहां सिर्फ असेंबल करने के लिए बढ़ावा मिल रहा है.

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