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खत्म हुई वोटिंग प्रोसेस, खटाई में पड़ सकती है Future-Reliance Deal?

फ्यूचर ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच रिटेल कारोबार के अधिग्रहण को लेकर हुई 24,713 करोड़ रुपये की डील खटाई में भी पड़ सकती है. हाल में फ्यूचर ग्रुप ने इस संबंध में शेयर होल्डर्स और क्रेडिटर्स के वोट हासिल करने के लिए एक बड़ी बैठक पूरी की है.

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खटाई में पड़ सकती है Future-Reliance Deal
खटाई में पड़ सकती है Future-Reliance Deal
स्टोरी हाइलाइट्स
  • स्थानीय बैंक डील के नहीं पक्ष में
  • 24,713 करोड़ रुपये की है डील

फ्यूचर-रिलायंस डील (Future-Reliance Deal) को लेकर इस हफ्ते एक बड़ा काम पूरा हो गया है. फ्यूचर ग्रुप  (Future Group) ने इस डील के लिए अपने शेयर होल्डर्स और क्रेडिटर्स की मंजूरी लेने की वोटिंग प्रक्रिया गुरुवार को खत्म कर ली है और अब अगले 48 घंटो के अंदर इसका रिजल्ट भी आ जाएगा.

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खटाई में पड़ सकती है डील
लेकिन ईटी की एक खबर के हिसाब से 24,713 करोड़ रुपये की ये डील खटाई में भी पड़ सकती है. दरअसल इस डील को लेकर क्रेडिटर्स और बैंकों ने अपने वोट गुरुवार को डाले. इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है फ्यूचर ग्रुप को लोन देने वाले ज्यादातर स्थानीय बैंक इस डील के पक्ष में नहीं है, हालांकि कंपनी के बांड खरीदने वाले विदेशी निवेशक और कुछ गैर-बैंकिंग ऋणदाता इस योजना के पक्ष में है.

ऐसे में अगर फ्यूचर ग्रुप शेयर होल्डर्स और क्रेडिटर्स का बहुमत हासिल नहीं कर पाता है, तो अपना रिटेल कारोबार रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) को बेचने की ये डील खटाई में पड़ सकती है.

चाहिए होंगे इतने वोट
फ्यूचर ग्रुप अगर इस डील को पूरा करना चाहता है तो उसे बैठक में मौजूद सभी क्रेडिटर्स में से 51% के वोट पक्ष में चाहिए होंगे. साथ ही इन 51% क्रेडिटर्स द्वारा कंपनी को दिए गए कर्ज का मूल्य कुल कर्ज के 75% के बराबर होना चाहिए. कंपनी के कुल कर्ज में 80% हिस्सेदारी स्थानीय बैंकों की है.

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स्थानीय बैंक नहीं पक्ष में
एक बैंक अधिकारी ने जानकारी दी कि कंपनी को कर्ज देने वाले स्थानीय बैंकों की एक बैठक बीते शनिवार को हुई. इसमें बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी शामिल हुए. इस बैठक में अधिकतर बैंक Reliance-Future Deal के पक्ष में नजर नहीं आए.

फ्यूचर ग्रुप ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ ये डील अगस्त 2020 में की थी. 24,713 करोड़ रुपये की इस डील पर एमेजॉन की ओर से कानूनी पेंच फंसा दिया गया और तब से ये कई तरह के विवादों के चलते पूरी नहीं हो सकी है. लेकिन हाल में रिलायंस ने कंपनी के अलग-अलग स्टोर्स का टेकओवर करना शुरू कर दिया और अब फ्यूचर ग्रुप ने डील को पूरा करने के लिए शेयरहोल्डर्स और क्रेडिटर्स की एक बैठक बुलाई थी.

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