जॉर्ज सोरोस (George Soros) एक बार फिर चर्चा में हैं, वैसे विवादों में रहना जॉर्ज सोरोस के लिए कोई नई बात नहीं है. खासकर भारत को लेकर जॉर्ज सोरोस का बयान किसी राजनेता के जैसा प्रतीत होता है. जॉर्ज सोरोस को लेकर बीजेपी (BJP) हमलवार है और कांग्रेस (Congress) पर सोरोस से संबंध रखने का आरोप लगाया है. पार्टी ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की जिससे राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी उस संगठन से जुड़ी हैं, जो सोरोस से फंड लेती हैं. यही नहीं, पार्टी का आरोप है कि मोदी सरकार को कमजोर करने के लिए कांग्रेस ने सोरोस के साथ हाथ मिलाया है.
जॉर्ज सोरोस को लेकर राजनीति तेज
जॉर्ज सोरोस अमेरिका के बड़े कारोबारियों में से एक हैं. अमेरिका में उनका 30 से अधिक मीडिया आउटलेट्स में डायरेक्ट निवेश है, इसमें न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट, एपी, सीएनएन और एबीसी शामिल हैं. शेयर बाजार (Share Market) में भी जॉर्ज सोरोस का बड़ा नाम है. वे सटोरिए, निवेशक और कारोबारी हैं. लेकिन खुद को दार्शनिक और सामाजिक कार्यकर्ता बताने पर उनका ज्यादा जोर रहता है. उन पर दुनिया के कई देशों की राजनीति और समाज को प्रभावित करने के लिए एजेंडा चलाने का आरोप लगता रहा है. इतना ही नहीं, कई देशों में भारी-भरकम फंडिंग देकर चुनाव प्रभावित करने का भी आरोप है. यूरोप और अरब के कई देशों में सोरोस की संस्थाओं पर मोटा जुर्माना में लगाया गया है और बैन भी लगा है. 94 साल के सोरोस पर ये आरोप आम है कि वे दुनिया के कई देशों की राजनीति और समाज को प्रभावित करने के लिए अपना एजेंडा चलाते हैं.
दरअसल, जॉर्ज सोरोस पर आरोप है कि दुनिया कई देशों में कारोबार और समाजसेवा की आड़ में पैसों के बल पर वहां की राजनीति में दखल देते हैं. अगर भारत में दखल की बात करें तो पिछले साल हिंडनबर्ग के खुलासे के बाद जॉर्ज सोरोस के सपोर्ट वाली नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने अडानी ग्रुप को लेकर कई खुलासे किए थे. वैसे अधिकतर आरोप वही थे, जो हिंडनबर्ग ने लगाए थे. रिपोर्ट में कहा गया था कि गलत तरीके से शेयरों की कीमतें बढ़ाई गईं. जिसका अडानी ग्रुप ने खंडन किया था. गौतम अडानी के अलावा OCCRP ने आरोप लगाया था कि वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने देश के पर्यावरण कानूनों को कमजोर करने के लिए गुपचुप तरीके से लॉबिंग की थी.
OCCRP के पीछे जॉर्ज सोरोस का हाथ?
अब ये जानना जरूरी है, ये OCCRP क्या है? इसका क्या काम है और इसका कर्ता-धर्ता कौन है? यह कंपनी पत्रकारों के एक ग्रुप द्वारा संचालित की जाती है. इसका मुख्यालय अमेरिका में है और इस कंपनी की शुरुआत साल 2006 में हुई थी. ये कंपनी दुनियाभर में आर्थिक अपराध खुलासों के लिए भी जानी जाती है. वैसे तो इसकी वेबसाइट पर जिक्र किया गया है, ये पब्लिक फंडेड फर्म है. लेकिन पब्लिक के साथ-साथ अरबपति जॉर्ज सोरेस ( George Soros) की कंपनी भी OCCRP को आर्थिक मदद करती है. यानी यह जॉर्ज सोरेस फंडेड फर्म है.
जॉर्ज सोरोस के बारे अधिकतर लोग जानते हैं, जो नहीं जानते हैं वो अब जान लें. हंगरी-अमेरिकी मूल के मशहूर अरबपति जॉर्ज सोरोस अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं. खासतौर पर उनकी नजर भारतीय उपमहाद्वीप में हो रहे राजनीतिक बदलावों पर रहती है. सोरोस कई मंचों से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लगातार सत्ता में बने रहने से तानाशाही की ओर बढ़ने वाला नेता कहते रहे हैं.
जॉर्ज सोरोस ने कब-कब भारत को निशाने पर लिया है.
- भारत में नागरिकता संशोधन कानून और कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने को लेकर जॉर्ज सोरोस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा था. सोरोस का आरोप था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है.
- इसी साल जनवरी में जब हिंडनबर्ग से अडानी ग्रुप पर सवाल उठाया तो हाथ सेंकने के लिए जॉर्ज सोरोस भी सामने आ गए थे. जॉर्ज सोरोस ने अडानी मुद्दे के बहाने फिर पीएम मोदी पर निशाना साधा. सोरोस ने दावा किया था कि अडानी के मुद्दे पर भारत में एक लोकतांत्रिक परिवर्तन होगा.
- वैसे जॉर्ज सोरोस बेतुके बयान देने में भी पीछे नहीं रहते हैं. बीते दिनों उन्होंने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन नरेंद्र मोदी लोकतांत्रिक नहीं हैं. मोदी के तेजी से बड़ा नेता बनने के पीछे अहम वजह मुस्लिमों के साथ की गई हिंसा है.
- इससे पहले 2020 में जॉर्ज ने कहा था कि मोदी के नेतृत्व में भारत तानाशाही व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. ये बयान उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दिया था. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का भी खुलकर विरोध किया था.
हालांकि जब-जब जॉर्ज सोरोस ने पीएम मोदी और भारत के अंदरुनी मामलों पर बयान दिया है. उसी वक्त सरकार ने पलटवार किया है. सरकार का कहना है कि विदेशी धरती से भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे को हिलाने की ये साजिश है, जो कभी कामयाब नहीं हो पाएगी.
अब जॉर्ज सोरोस की कुंडली खंगालते हैं....
जॉर्ज सोरोस का जन्म 12 अगस्त, 1930 को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में हुआ था. वे खुद को दार्शनिक और सामाजिक कार्यकर्ता भी बताते हैं. हालांकि, उन पर दुनिया के कई देशों की राजनीति और समाज को प्रभावित करने का एजेंडा चलाने का आरोप लगता रहता है. 11 नवंबर 2003 को वॉशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में सोरोस ने कहा था, जॉर्ज डब्ल्यू बुश को राष्ट्रपति पद से हटाना उनके जीवन का सबसे बड़ा मकसद है. और ये उनके लिए 'जीवन और मौत का सवाल' है. सोरोस ने कहा था कि अगर कोई उन्हें सत्ता से बेदखल करने की गारंटी लेता है, तो वो उस पर अपनी पूरी संपत्ति लुटा देंगे.
जॉर्ज सोरोस की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब हंगरी में यहूदियों को मारा जा रहा था, तब उनके परिवार ने झूठी आईडी बनवाकर जान बचाई थी. विश्व युद्ध खत्म होने के बाद जब हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो 1947 में वो बुडापेस्ट छोड़कर लंदन आ गए. यहां उन्होंने रेलवे कुली से लेकर एक क्लब में वेटर का काम भी किया. इसी दौरान उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की.
1956 में वो लंदन से अमेरिका आ गए. यहां आकर उन्होंने फाइनेंस और इन्वेस्टमेंट की दुनिया में कदम रखा और अपनी किस्मत बदली. 1973 में उन्होंने 'सोरोस फंड मैनेजमेंट' लॉन्च किया. उनका दावा है कि अमेरिकी इतिहास में उनका फंड सबसे बड़ा और कामयाब इन्वेस्टर है. सोरोस खुद को जरूरतमंदों की मदद करने वाला बताते हैं. उनकी वेबसाइट पर दावा किया है कि सोरोस अब तक अपनी पर्सनल वेल्थ से 32 अरब डॉलर जरूरतमंदों की मदद के लिए दे चुके हैं. वो ओपन सोसायटी फाउंडेशन चलाते हैं.
कैसी है पर्सनल लाइफ?
जॉर्ज सोरोस ने तीन शादियां की हैं. 1960 में उन्होंने एनालिसे विश्चेक से शादी की थी. एनालिसे जर्मनी की प्रवासी थीं, जो विश्व युद्ध के दौरान अनाथ हो गई थीं. सोरोस और एनालिसे के तीन बच्चे हैं. हालांकि, ये शादी ज्यादा दिन नहीं चली और उन्होंने तलाक ले लिया. करीब 720 करोड़ डॉलर की दौलत के मालिक सोरोस के कारनामों की फेहरिस्त काफी लंबी है. 1992 में बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद करने के लिए जॉर्ज सोरोस को कसूरवार माना जाता है. वैसे 92 साल के जॉर्ज ने अपना उत्तराधिकारी 37 साल के बेटे अलेक्जेंडर को चुना है, जॉर्ज के कुल 5 बच्चे हैं.
इसके अलावा यूके में सोरोस को बैंक ऑफ इंग्लैंड को 'बर्बाद' करने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है. कथित रूप से सोरोस ने पहले पाउंड उधार लिए और फिर उन्हें बेच दिया. इससे यूके की करेंसी कमजोर हो गई. इस पूरे लेन-देन से सोरोस को कथित तौर पर एक अरब डॉलर का मुनाफा हुआ था. इस करेंसी मैनिपुलेशन की वजह से कई एशियाई देशों में सत्ता बदल गई. साउथ कोरिया में पहली बार किसी विपक्षी उम्मीदवार ने राष्ट्रपति चुनाव जीता था.
जॉर्ज सोरोस पर 1997 में थाईलैंड की मुद्रा (बाहट) पर सट्टा लगाकर उसे कमजोर करने के भी आरोप लगे थे. लेकिन सोरोस ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया. इसके बाद इनका नाम उस समय शुरू हुए वित्तीय संकट से जोड़ा गया जो पूरे एशिया में फैल गया था.