scorecardresearch
 

Google ने धड़ाधड़ निकाले कर्मचारी... जानिए क्या है Project Nimbus? जिसका कर रहे थे विरोध

What Is Google Project Nimbus : दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) ने अमेजन के साथ मिलकर साल 2021 में इजरायल सरकार के लिए प्रोजेक्ट निंबस की शुरुआत की थी और इसकी लागत 1.2 अरब डॉलर के आस-पास है.

Advertisement
X
प्रोजेक्ट निंबस के विरोध के चलते अब तक 50 कर्मचारियों पर गिरी गाज
प्रोजेक्ट निंबस के विरोध के चलते अब तक 50 कर्मचारियों पर गिरी गाज

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) में इन दिनों धड़ाधड़ कर्मचारी निकाले जा रहे हैं और बीते दो सप्ताह में ही अब 50 एंप्लाई को बाहर का रास्ता दिखाया गया है. ये किसी छंटनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि कंपनी से निकाले गए इन कर्मचारियों को इजरायल (Israel) का विरोध करना महंगा पड़ा है. ये गूगल एंप्लाई प्रोजेक्ट निंबस (Projects Nimbus) के खिलाफ थे, जो इजरायल को AI और क्लाउड सर्विसेज मुहैया कराता है. आइए जानते हैं इस मामले को विस्तार से... 

Advertisement

दो हफ्ते में इतने कर्मचारियों की छुट्टी
Google से बाहर निकाले गए ये कर्मचारी Project Nimbus के खिलाफ हैं और कंपनी में विरोध इसलिए कर रहे थे, क्योंकि उनका दावा है कि इस प्रोजेक्ट निंबस के तहत इजरायल को फायदा पहुंचाया जा रहा है. दरअसल, इजरायल और हमास के बीच जबरदस्‍त युद्ध (Israel-Hamas War) के बाद पिछले 200 दिनों से तनाव जारी है. हमास के हमले के जबाव में इजरायली अटैक का सबसे ज्यादा असर गाजा पट्टी में देखने को मिला है, यही वो जगह है जहां Israel की Air Strike हुई थी.

गूगल में निकाले गए कर्मचारियों का कहना था कि अमेरिकी टेक कंपनियां लंबे समय से जारी इस जंग में इजरायल का समर्थन कर रही हैं. हालांकि, कंपनी का कहना है कि, ऐसा नहीं है और जिन लोगों को निकाला गया है उनमें से हर एक व्यक्तिगत रूप से कंपनी के नियमों के खिलाफ वाली एक्टिविटीज में शामिल थे. 

Advertisement

आखिर क्या है ये Nimbus प्रोजेक्ट? 
यहां ये जान लेना बेहद जरूरी है कि जिस प्रोजेक्ट को लेकर गूगल में बबाल मचा हुआ है, वो Project Nimbus आखिर है क्या? तो बता दें कि साल 2021 में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया था और ये 1.2 अरब डॉलर का एक सिक्योरिटी कॉन्ट्रैक्ट है. अरबों डॉलर की लागत का ये प्रोजेक्ट निंबस इजरायली सरकार और आर्मी की एक क्लाउड कंप्यूटिंग प्रोजेक्ट है और इसके लिए गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक के साथ अमेजन (Amazon) भी शामिल है. कंपनी इस प्रोजेक्ट के तहत इजराइल की सेना और सरकार के लिए क्‍लाउड और एआई सर्विस (AI Service) मुहैया कराती है.

गौरतलब है कि इजरायल और हमास की जंग (Israel-Hamas War) अब तक हजारों लोगों की जान गई है और बर्खास्त किए गए गूगल कर्मचारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट निंबस के जरिए इजरायल को दी जा रही सेवाएं गाजा के संघर्ष में इस्तेमाल हुई हैं और उन्होंने इसे पहला AI-ऑपरेट नरसंहार बताया था.

ऐसे काम कर रहा गूगल का प्रोजेक्ट
बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, Google का प्रोजेक्ट निंबस इजरायल में स्वास्थ्य देखभाल, परिवहन और शिक्षा समेत विभिन्न सेक्टर्स में मौजूद चुनौतियों का समाधान ढूंढ़ने के लिए गूगल क्लाउड सर्विसेज का इस्तेमाल करता है. इसके जरिए इजरायली सरकार को Google की तकनीक का उपयोग करके बड़े पैमाने पर डेटा विश्लेषण, AI ट्रेनिंग, डेटाबेस होस्टिंग की सर्विस मिलेगी. इजरायल सरकार के साथ करार के हिस्से के रूप में गूगल क्लाउड माइग्रेशन, एकीकरण और अनुकूलन के लिए काम करता है. यही नहीं Google Cloud देश के तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े सरकारी कर्मचारियों और वरिष्ठ नेताओं को डिजिटल कौशल बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण भी दे रहा है. 

Advertisement

'कार्यालयों में राजनीति की जगह नहीं...' 
दरअसल Project Nimbus का विरोध करने वाले कर्मचारियों का समूह डिमांड कर रहा है कि इजरायल को कोई टेक सर्विस नहीं दी जानी चाहिए. इस विरोध प्रदर्शन को लेकर भारतीय मूल के CEO सुंदर पिचाई (Sundar Pichai) के नेतृत्व वाली कंपनी गूगल ने दो टूक कह दिया है कि कार्यालयों में ऐसे प्रदर्शनों की परमिशन कतई नहीं दी जा सकती है और कार्यालय में राजनीति का कोई स्थान नहीं है.

इससे पहले भी बीते साल नवंबर में ब्लूमबर्ग को दिए गए एक इंटरव्यू में सुंदर पिचाई से जब इजराइल-हमास युद्ध (Israel-Hamas War) और निंबस प्रोजेक्‍ट (Nimbus Project) के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. कंपनी का उद्देश्‍य सिर्फ सरकार की सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद करना है.

Live TV

Advertisement
Advertisement