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अडानी-हिंडनबर्ग केस में जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए एक्सपर्ट कमेटी के गठन का आदेश दिया है. इस कमेटी में 6 सदस्य होंगे, जिसकी अध्यक्षता रिटायर जस्टिस अभय मनोहर सप्रे (AM Sapre) करेंगे. भारतीय निवेशकों की सुरक्षा के मद्देनजर बनाई गई कमेटी में ओपी भट (OP Bhat), न्यायमूर्ति जेपी देवधर (Justice JP Devadhar) और नंदन नीलेकणि (Nandan Nilakeni), केवी कामथ (KV Kamath), सोमशेखर सुंदरेसन भी शामिल रहेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने शॉर्ट सेलर फर्म की अडानी ग्रुप को लेकर पब्लिश की गई रिपोर्ट से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन्वेस्टर्स की सुरक्षा के लिए रेग्युलेटर के गठन को लेकर आदेश जारी किया है. सुनवाई के बाद आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि बाजार नियामक SEBI इस मामले में जांच जारी रखेगा और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. इसके लिए सेबी को दो महीने का समय दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आदेश देते हुए कहा है कि बाजार नियामक SEBI इस मामले में जांच जारी रखेगा और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. इसके लिए सेबी को दो महीने का समय दिया गया है. कोर्ट द्वारा गठित की गई कमेटी दरअसल, Adani- Hindenburg केस के कारणों और बाजार पर इसके असर की जांच करेगा. इसके साथ ही निवेशकों की सुरक्षा को लेकर अहम सुझाव भी देगी. इसके अलावा ये कमेटी मामले में किसी भी प्रकार की नियामकीय विफलता के बारे में भी पता करेगी.
जांच कमेटी में ये बड़े नाम शामिल
Abhay Manohar Sapre: अभय मनोहर सप्रे ने साल 1978 में बार काउंसिल में एडवोकेट के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया था. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने के बाद 1999 में उन्हें एमपी हाईकोर्ट में एडिशनल जज के पद पर नियुक्त किया गया था. वे राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मणिपुर हाईकोर्ट में भी जज रहे हैं. 2014 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था और 2019 में वे रिटायर हो गए थे. सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस सप्रे 9 जजों की उस बेंच का हिस्सा थे जिसने निजता के अधिकार के मामले में फैसला सुनाया था.
Nandan Nilakeni: देश को आधार कार्ड, यूपीआई, फास्टैग, जीएसटी जैसी टेक्नोलॉजी देने में अहम भूमिका निभाने वाले इंफोसिस के को-फाउंडर (Infosys Co-Founder) नंदन नीलेकणि को इस छह सदस्यीय जांच टीम में शामिल किया गया है. उन्होंने भारत सरकार की प्रौद्योगिकी समिति TAGUP का नेतृत्व किया. उनके योगदान के लिए उन्हें 2006 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था.
K V Kamath: देश के मशहूर बैंकर के. वी. कामथ को तो आप जानते ही होंगे। IIM अहमदाबाद से पोस्टग्रेजुएट कामथ ने 1971 में डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (DFI) ICICI में अपना करियर शुरू किया था. फिर वे ICICI बैंक के MD-CEO भी बने थे. वे नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) के अध्यक्ष भी रहे हैं.
OP Bhat: ओम प्रकाश भट्ट एक भारतीय बैंकर हैं और जून 2006 से 31 मार्च 2011 तक भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष (SBI Chairman) रहे थे. फिलहाल, वे Oil and Natural Gas Corporation Ltd, Tata Steel Ltd और Hindustan Unilever Ltd के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर शामिल हैं.
Justice JP Devadhar: बॉम्बे यूनिवर्सिटी से लॉ में बैचलर और मास्टर डिग्री हासिल करने वाले रिटायर जस्टिस जे पी देवधर ने 1977 में बॉम्बे हाई कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की थी. वह 1982 से यूनियन ऑफ इंडिया के वकील हैं और 1985 से आयकर विभाग के वकील भी रहे हैं. 12 अक्टूबर, 2001 को उन्हें हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. बॉम्बे उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति देवधर जुलाई 2013 से जुलाई 2018 तक प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) के अध्यक्ष थे.
Somasekharan Sundaresan: एडवोकेट सोमशेखर सुंदरेसन ने वाणिज्यिक कानून में विशेषज्ञता हासिल की है. गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से 1996 बैच के स्नातक, सुंदरेसन ने पहले जेएसए में प्रतिभूति कानून और इक्विटी अभ्यास का नेतृत्व किया, जो भारत की सबसे बड़ी कानून फर्मों में से एक है. सुंदरेसन कमेटी के अन्य सदस्यों के साथ अडानी ग्रुप के शेयरों में तेजी से ऊठापटक से जुड़े विवादों की तह तक पहुंचेंगे. इसके अलावा शेयर मार्केट का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मजबूत करने के उपाय सुझाएंगे.
अडानी के शेयरों की जांच करेगी सेबी
सुप्रीम कोर्ट ने SEBI को अडानी की कंपनियों के शेयरों में गड़बड़ी की जांच का जिम्मा सौंपा है. अब बाजार नियामक SEBI इस पूरे मामले में हिंडनबर्ग के लगाए गए उन आरोपों की जांच करेगा, जिसमें कहा गया है कि ग्रुप ने स्टॉक कीमतों में गड़बड़ी करके अकाउंटिंग फ्रॉड किया गया है. हालांकि अडानी ग्रुप की ओर से इस तरह के आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया गया है.