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Adani Vs Hindenburg: गौतम अडानी का पीछा नहीं छोड़ रहा है हिंडनबर्ग, अब फिर इस मामले में टांग अड़ाई!

Adani Vs Hindenburg : अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग के संचालक नैट एंडरसन (Nate Anderson) ने ट्विटर (अब X) पर एक नया पोस्ट किया है. इसमें एंडरसन ने अडानी मामाले की तुलना दुनियाभर में चर्चा का विषय रहे जर्मनी के वायरकार्ड घोटाले (Wirecard Scam) से की है.

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नैट एंडरसन ने अडानी ग्रुप को लेकर किया नया पोस्ट
नैट एंडरसन ने अडानी ग्रुप को लेकर किया नया पोस्ट

बीते साल 2022 में जहां भारतीय अरबपति गौतम अडानी (Gautam Adani) ने दुनिया के तमाम टॉप अमीरों को दौलत की रेस में पीछे छोड़ दिया था और Top-3 Billionaires में जोरदार एंट्री मारी थी. वहीं इस साल 2023 में उन्होंने सबसे बड़ा घाटा झेला और सबसे ज्यादा दौलत गंवाने वाले अरबपति बन गए. इसके पीछे वजह थी अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग की Adani Group को लेकर जारी एक रिसर्च रिपोर्ट, जिसमें शेयरों की कीमत में हेरफेर से लेकर ग्रुप पर भारी-भरकम कर्ज से जुड़े 88 गंभीर सवाल उठाए गए थे. इसके बाद अडानी के शेयरों में ऐसी सुनामी आई कि उनकी आधी दौलत डूब गई. अब फिर से वापसी कर रहे अडानी ग्रुप पर एक बार फिर Hindenburg ने नया बम फोड़ा है. 

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हिंडनबर्ग ने किया नया पोस्ट
Hindenburg के संचालक नैट एंडरसन (Nate Anderson) ने ट्विटर (अब X) पर पोस्ट किया है, जो अडानी ग्रुप को लेकर है. दरअसल, एंडरसन ने अडानी मामाले की तुलना दुनियाभर में चर्चा का विषय रहे जर्मनी के वायरकार्ड घोटाले (Wirecard Scam) से की है. हालांकि, इस बार शेयरों में हेर-फेर या कर्ज को लेकर आरोप नहीं लगाया गया है, बल्कि Adani Group की ओर से फाइनेंशियल टाइम्स (FT) के पत्रकार के खिलाफ मोर्चा खोलने पर नैट एंडरसन ने ये पोस्ट किया है. 

नैट एंडरसन ने लिखा है कि अडानी (Adani) एक आर्टिकल को लेकर फाइनेंशियल टाइम्स के पत्रकार डैन मैक्रम (Dan McCrum) पर निशाना साध रहे हैं. इससे पहले कुछ ऐसी ही कोशिश करने वाली एक कंपनी वायरकार्ड (Wirecard) थी, इस जर्मन कंपनी को बाद में जर्मन इतिहास में सबसे बड़ी धोखाधड़ी का आरोपी पाया गया था. अडानी ग्रुप को अपनी रिसर्च रिपोर्ट से बड़ा नुकसान पहुंचाने वाले नैट एंडरसन अडानी ग्रुप की तुलना इसी वायरकार्ड से की है. 

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आखिर क्या है ये वायरकार्ड स्कैम?
Wirecard एक पेमेंट सिस्टम है, ऑनलाइन या मोबाइल पर क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन भुगतान स्वीकार करने की अनुमति देता है. इस कंपनी की स्थापना मार्कस ब्रौन ने साल 1999 में की थी और इसका बिजनेस शुरू हुआ था पोर्न और गैंबलिंग साइटों का सर्विसेज देने के साथ, साल 2002 के बाद ब्रौन के नेतृत्व में कंपनी ने जबर्दस्त तेजी के साथ विस्तार किया और अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ाते हुए बैंकिंग क्षेत्र से भी जुड़ गई. 2018 आते-आते वायरकार्ड की मार्केट वैल्यू (Wirecard MCap) 17 अरब यूरो तक पहुंच गया था. 

इसके बाद FT के पत्रकार डैन मैक्रम ने अक्टूबर 2019 में वायरकार्ड को लेकर अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा करते हुए कहा था कि कंपनी के बिजनेस में बिक्री और मुनाफे को लेकर बड़ी धोखाधड़ी हुई है. इसमें बैलेंस शीट से 1.9 अरब यूरो की बड़ी रकम के हेर-फेर को लेकर रिसर्च शेयर की गई थी. मामला उस समय सुर्खियों में रहा और जून 2020 में Wirecard ने स्वीकार किया था कि उसकी बैलेंस शीट से 1.9 अरब यूरो गायब थे.

अडानी ग्रुप ने खारिज किए एफटी के आरोप
गौरतलब है कि अडानी ग्रुप को लेकर भी लंदन स्थित एफटी ने कथित तौर पर संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) के साथ मिलकर बीते 31 अगस्त, 2023 को एक आर्टिकल पब्लिश किया था, जिसमें कहा गया कि कथित तौर पर गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी से जुड़े दो लोग बरमूडा के ग्लोबल अपॉर्चुनिटीज फंड का इस्तेमाल करने के आरोप गंभीर लगाए थे.  

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इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए Adani Group ने बयान जारी किया. ग्रुप ने एफटी और इसके सहयोगियों की हालिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए मीडिया संस्थान पर कंपनी की प्रतिष्ठा और छवि को खराब करने के लिए कैम्पेन चलाने का आरोप लगाया है. बयान में कहा गया कि पुराने और निराधार आरोपों को फिर से दोहराने का एक नया प्रयास किया जा रहा है. अडानी समूह ने रिपोर्ट में किए गए सभी दावों का खंडन किया है.

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