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हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अडानी ग्रुप (Adani Group) की कंपनियों के शेयर ऐसे गिरे हैं, जैसे पतझड़ में पेड़ों से पत्ते. 24 जनवरी 2023 के बाद से अडानी ग्रुप के शेयर हर दिन टूटे और ऐसा टूटे कि दुनिया के अमीरों की सूची से गौतम अडानी टॉप-20 से बाहर हो गए. शेयरों में आई गिरावट की वजह से अडानी ग्रुप के मार्केट कैपिटलाइजेशन (M-cap) में अब तक कुल 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट आई है. ये रकम कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारतीय रेल का बजट 2.40 लाख करोड़ का है, जबकि अडानी ग्रुप का घाटा 10 लाख करोड़ रुपये का है. लगभग पांच गुना अधिक.
मार्केट कैप में तेज गिरावट
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सामने आने के बाद गौतम अडानी का साम्राज्य किस तेजी से डूबा है, इसे आप यूं समझ लीजिए. वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारत का बजट कुल 45.03 लाख करोड़ हैं. इतनी बड़ी रकम का करीब एक चौथाई यानी 10 लाख करोड़ का घाटा अब तक अडानी ग्रुप को सिर्फ दस दिन में हो चुका है. अडानी ग्रुप का घाटा भारत के रक्षा बजट 4 लाख 32 हजार करोड़ रुपये से भी दोगुना है.
80 करोड़ लोगों को मिलता मुफ्त राशन
अडानी ग्रुप को 10 दिनों में जितना नुकसान हुआ है, उतनी रकम से भारत के 80 करोड़ लोगों को करीब पांच साल तक मुफ्त में राशन मिल जाता. केंद्र सरकार ने 2023 के लिए पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत लगभग दो लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया है और अडानी ग्रुप का घाटा 10 लाख करोड़ रुपये का है. अगर कृषि, हेल्थ, स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सबसिडी, पेंशन, ग्रामीण विकास के कुल बजट को जोड़ भी देते हैं, तो भी ये अडानी ग्रुप को हुए नुकसान के बराबर नहीं पहुंचता है. ये सब सिर्फ एक रिपोर्ट के सामने आने के बाद हुआ है.
नहीं थमा बिकवाली का सिलसिला
अमेरिकी फॉरेंसिक फाइनेंशियल कंपनी Hindenburg ने अडानी ग्रुप को लेकर अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इसमें कुल 88 प्रश्न उठाए गए हैं और ग्रुप पर कर्ज को लेकर भी बड़े दावे किए गए हैं. 'अदानी ग्रुपः हाउ द वर्ल्ड्स थर्ड रिचेस्ट मैन इज़ पुलिंग द लार्जेस्ट कॉन इन कॉर्पोरेट हिस्ट्री' नामनाम की यह रिपोर्ट बीते 24 जनवरी 2023 को पब्लिश हुई थी. हालांकि, अडानी ग्रुप की तरफ से हिंडनबर्ग के सवालों के जवाब दिए गए, लेकिन इसके बाद भी उनके शेयरों में बिकवाली का सिलसिला नहीं थमा.
रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट
ग्लोबल एजेंसी मूडीज (Moody's) ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद वह अडानी ग्रुप के फाइनेंसियल फ्लेक्सिबलटी का मूल्यांकन कर रहा है. मूडीज की इकाई ICRA ने कहा कि वह अडानी समूह पर हाल के घटनाक्रमों के प्रभाव पर नजर बनाए हुए और इसका वैल्यूएशन कर रही है. मूडीज के अनुसार, मौजूदा 'प्रतिकूल घटनाक्रम' की वजह से अगले 1-2 साल में कैपेक्स को फंड करने के लिए या मैच्योरिंग डेट को रीफाइनेंस करने के लिए अडानी ग्रुप की पूंजी जुटाने की क्षमता कम हो सकती है.
दूसरी तरफ रेटिंग ऐजेंसी फिच का कहना है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप का क्रेडिट प्रोफाइल तत्काल रूप से प्रभावित नहीं हुआ है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच का कहना है कि हम अडानी ग्रुप की कंपनियों के कैश फ्लो पर नजर बनाए हुए हैं. निकट अवधि में कोई रि-फाइनेंसिंग से जुड़ा रिस्क या लिक्विडिटी का जोखिम नजर नहीं आ रहा है. फिच ने कहा कि वो रेटेड इकाइयों की लंबी अवधि में फाइनेंसिंग की लागत में किसी बड़े बदलाव पर भी नजर बनाए हुए है.