scorecardresearch
 

इस साल GDP के 91% तक होगा सरकारों का कर्ज, 40 साल में पहली बार ऐसा होगा

कर्ज और जीडीपी अनुपात में इस जबरदस्त बढ़त का मतलब यह है कि देश अपनी जरूरतों के लिए खर्च बढ़ा नहीं पाएगा और आर्थिक गतिविधियों को भी ज्यादा सहारा नहीं दे पाएगा. कोरोन संकट की वजह से वैसे ही सरकार की खर्च करने की क्षमता प्रभावित हुई है. 

Advertisement
X
कर्ज का बढ़ता बोझ
कर्ज का बढ़ता बोझ
स्टोरी हाइलाइट्स
  • देश में बढ़ता जा रहा केंद्र और राज्य सरकारों का कर्ज
  • इस साल सरकारों का कर्ज GDP के 91% तक होगा
  • लंबे समय तक ऐसा रहने से इकोनॉमी सुस्त होती है

इ​स वित्त वर्ष यानी 2020-21 में भात में सरकारों यानी केंद्र और राज्य सरकारों का कुल कर्ज सकल घरेलू उत्पाद GDP के 91 फीसदी तक पहुंच जाएगा. यह 1980 के बाद पहली बार होगा. 

Advertisement

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार भारत की सरकारों केंद्र और राज्य का कर्ज वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी का 70 फीसदी था और वित्त वर्ष 2019-20 में यह बढ़कर 75 फीसदी तक पहुंच गया. यह इस वित्त वर्ष यानी 2020-21 में बढ़कर 91 फीसदी और अगले वित्त वर्ष यानी 2021-22 में बढ़कर 91.3 फीसदी हो जाएगा. 

इसे भी पढ़ें:  क्या है टैक्सपेयर चार्टर, जिसे PM मोदी ने विकास यात्रा में बड़ा कदम बताया है

क्या है इससे खतरा 

रिपोर्ट के अनुसार कर्ज और जीडीपी अनुपात में इस जबरदस्त बढ़त का मतलब यह है कि देश अपनी जरूरतों के लिए खर्च बढ़ा नहीं पाएगा और आर्थिक गतिविधियों को भी ज्यादा सहारा नहीं दे पाएगा. कोरोन संकट की वजह से वैसे ही सरकार की खर्च करने की क्षमता प्रभावित हुई है. 

Advertisement

कर्ज-जीडीपी अनुपात यह दिखाता है कि कोई देश अपने कर्जे का किस तरह भुगतान कर सकता है. जिनता ज्यादा यह अनुपात होगा उतनी ही उस देश की कर्ज चुकाने की क्षमता कम होगी और जोखिम उतना ही ज्यादा होगा. निवेशक अक्सर इस अनुपात के आधार पर यह अंदाजा लगाते हैं कि किसी सरकार में कर्ज चुकाने की कितनी क्षमता है. 

इसे भी पढ़ें: क्या वाकई शराब पर निर्भर है राज्यों की इकोनॉमी? जानें कितनी होती है कमाई?

वर्ल्ड बैंक की चेतावनी 

वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, किसी देश का कर्ज-जीडीपी अनुपात यदि 77 फीसदी से ज्यादा काफी लंबे समय तक रहता है तो वहां की अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है. 

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, 'कर्ज-जीडीपी अनुपात 60 फीसदी जैसे निचले स्तर तक लाने के लिए अभी एक दशक या उससे ज्यादा समय लग सकता है. हालांकि कुछ साल पहले सरकार ने यह लक्ष्य बनाया था कि इसे वित्त वर्ष 2025 तक हासिल कर लिया जाएगा.'  

( www.businesstoday.in के इनपुट पर आधारित) 

 

Advertisement
Advertisement