गेहूं के एक्सपोर्ट पर बैन (Wheat Export Ban) लगाने के बाद अब भारत सरकार इसके प्रोडक्ट के निर्यात (Wheat Products Export) को लेकर बड़ा कदम उठा सकती है. गेहूं उत्पादों जैसे आटा, मैदा और सूजी के शिपमेंट में हुई अचानक अधिक बढ़ोतरी की वजह से सरकार इसपर प्रतिबंध लगा सकती है. गेहूं के एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंध के बाद भारत से इसके प्रोडक्ट की शिपमेंट भारी मात्रा में हो रही है. सरकार ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने और महंगाई पर काबू पाने के लिए मई में गेहूं के निर्यात पर बैन लगा दिया था.
'बिजनेस लाइन' की खबर के अनुसार, इस उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि गेहूं और उसके प्रोडक्ट आपस में जुड़े हुए हैं. गेहूं की खपत इससे बनने वाले प्रोडक्ट से ही होती है. इसलिए कुछ हद तक सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि गेहूं को इसके प्रोडक्ट के रूप में देश से बाहर न भेजा जा सके. कारोबारियों ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से गेहूं के प्रोडक्ट पर प्रतिबंध को लेकर अफवाहें चल रही हैं.
आटे का एक्सपोर्ट बढ़ा
एक निर्यातक ने बताया कि भारत द्वारा 13 मई को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद आटे का एक्सपोर्ट (Flour Export) तेजी से बढ़ा है. वाणिज्य मंत्रालय (Ministry of Commerce) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अप्रैल 2022 में 314 करोड़ रुपये का 95,094 टन गेहूं के आटे का निर्यात किया है. 2021-22 वित्तीय वर्ष में भारत ने कुल 5.66 लाख टन आटे का निर्यात किया था, जिसकी कीमत लगभग 1,842 करोड़ रुपये थी. यानि हर महीने में 50,000 टन के आसपास गेहूं के आटे का निर्यात हुआ था. वहीं, 2020-21 में 2.78 लाख टन गेहूं का आटा बाहर भेजा गया, जबकि 2019-20 में मात्रा 1.99 लाख टन थी.
गेहूं की कीमतों में गिरावट
व्यापारियों के मुताबिक, प्रतिबंध के बाद गेहूं की कीमतों में गिरावट आई है और इसने आटे के निर्यात को संभव बना दिया है. 70 प्रतिशत सीमा शुल्क के बावजूद आटे का भरपूर निर्यात हो रहा है. व्यापारियों के अनुसार, भारतीय गेहूं का आटा 350 डॉलर से 400 डॉलर (27,323-31,226 रुपये) प्रति टन के बीच है, लेकिन एक अन्य व्यापारी ने कहा कि निर्यातक को गेहूं के आटे की आपूर्ति 26,000-27,000 रुपये प्रति टन की जाती है.
रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह आपूर्ति प्रभावित
भारत ने मार्च-अप्रैल के दौरान देश भर में गर्मी से प्रभावित होने के बाद गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसकी वजह से भारतीय खाद्य निगम (FCI) बफर स्टॉक के लिए पर्याप्त स्टॉक नहीं जुटा पा रहा था. कृषि मंत्रालय के अनुसार, गेहूं का उत्पादन 106 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो रिकॉर्ड 111.32 मिलियन टन के शुरुआती अनुमानों से कम है. एफसीआई ने पिछले साल खरीदे गए 43.33 मिलियन टन के मुकाबले इस बार कम खरीद की है. रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia- Ukraine War) की वजह से दुनियाभर में गेहूं की मांग और आपूर्ति का अंतर बिगड़ गया है.