भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था (Indian Economy) बना हुआ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाली सरकार ने इस 2047 तक इसे विकसित देशों की लिस्ट में शामिल करने का लक्ष्य बनाया है. फिलहाल भारत की जीडीपी 3.7 ट्रिलियन डॉलर है और ये 5 ट्रिलियन डॉलर (5 Trillion Economy) की ओर बढ़ रही है, तमाम वैश्विक एजेंसियों का अनुमान है कि साल 2027-28 तक भारत इस टारगेट तक पहुंचकर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है. इस बीच वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary) ने उम्मीद जताते हुए कहा है कि भारत पहले ही ये काम कर देगा.
अमृत काल में भारत करेगा कमाल
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के मुताबिक, भारत 2047 तक उन्नत अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने की यात्रा के दौरान अमृत काल की शुरुआत में ही 5,000 अरब डॉलर यानी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा. लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में उन्होंने ये बात कही है. गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के 2027-28 में तीसरी सबसे बड़ी जीडीपी के साथ 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान लगाया है.
'रुपया' की मजबूती का होगा अहम रोल
पंकज चौधरी ने कहा कि भारतीय करंसी रुपये (Rupee) में मजबूती की मदद से इस 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का लक्ष्य पार किया जाएगा, जो व्यापक आर्थिक स्थिरता के परिणामस्वरूप होगा. वर्ष 2022-23 के अंत में भारतीय सकल घरेलू उत्पाद 3700 अरब डॉलर था.
ऐसे आगे बढ़ती गई भारतीय अर्थव्यवस्था
1980-81 में Indian Economy का आकार 189 अरब डॉलर था, जो एक दशक बाद बढ़कर 326 अरब डॉलर हो गया. 2000-01 में सकल घरेलू उत्पाद का आकार बढ़कर 476 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया. इसके बाद 2010-11 में, भारत की जीडीपी बढ़कर 1.71 ट्रिलियन डॉलर हो गई और 2020-21 में बढ़कर 2.67 ट्रिलियन डॉलर हो गई. वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि विनिमय दर एक अनदेखा कारक नहीं है क्योंकि यह दुनिया में भारत के सकल घरेलू उत्पाद के आकार को रैंक करता है.
बाजार आधारित अर्थव्यवस्था है भारत
वित्त राज्य मंत्री ने आगे कहा कि भारत एक Market Economy है और सरकार बाजार-निर्धारित GDP और विनिमय दर के माध्यम से आर्थिक प्रगति की निगरानी करती है. उन्होंने आगे कहा कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों ही ऐसे तंत्र हैं जो भारत की जीडीपी, विनिमय दर और जीडीपी में विभिन्न क्षेत्रों के योगदान को निर्धारित करते हैं. 2022-23 में नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद में कृषि, उद्योग और सेवाओं का योगदान क्रमशः 18.4 प्रतिशत, 28.3 प्रतिशत और 53.3 प्रतिशत रहा.