भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर पाबंदियां (India Wheat Export Ban) लगाने के बाद अब आटा (India Wheat Flour Export Ban) और मैदा के एक्सपोर्ट (India Maida Export Ban) पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया है. सरकार ने गेहूं के आटे व अन्य उत्पादों के निर्यात पर रोक लगाने के फ्रेमवर्क को गुरुवार को मंजूरी दे दी. इससे पहले सरकार ने मई महीने में गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का ऐलान किया था.
अगले सप्ताह से लागू होगी रोक
गेहूं के आटे के निर्यात पर लगी रोक अगले सप्ताह 12 जुलाई से प्रभावी होगी. इसके बाद आटे के निर्यात के लिए निर्यातकों को इंटर-मिनिस्ट्रियल कमिटी (Inter-Ministrial Committee On Wheat) से मंजूरी लेने की जरूरत पड़ेगी. डाइरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक नोटिफिकेशन में इसकी जानकारी दी. नोटिफिकेशन में कहा गया, 'गेहूं के आटे के लिए निर्यात की नीति फ्री ही बनी रहेगी, लेकिन इसका निर्यात करने के लिए गेहूं के निर्यात को लेकर बनी इंटर-मिनिस्ट्रियल कमिटी से मंजूरी लेने की जरूरत होगी.'
गेहूं के इन उत्पादों के निर्यात पर भी रोक
डीजीएफटी के ताजा नोटिफिकेशन में बताया गया है कि अब इंटर-मिनिस्ट्रियल कमिटी से आटे के अलावा मैदा, समोलिना (रवा/सिरगी), होलमील आटा (Wholemeal Atta) और रिजल्टेंट आटा (Resultant Atta) के निर्यात के लिए भी मंजूरी लेने की जरूरत होगी. कमिटी की मंजूरी मिलने के बाद ही अब इन उत्पादों का भारत से निर्यात किया जा सकेगा. नोटिफिकेशन के अनुसार, गेहूं के आटे की क्वालिटी (Wheat Flour Quality) के लिए जरूरी प्रावधानों को लेकर अलग से एक नोटिफिकेशन जारी होगा.
इस कारण सरकार को उठाना पड़ा कदम
सरकार के इस कदम को भारतीय बाजार में आटे की कीमतें नियंत्रित रखने के प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल मई महीने में गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने के बाद आटे के निर्यात में तेजी देखी जा रही थी. इससे घरेलू बाजार में आटे की उपलब्धता पर असर पड़ रहा था और कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा था. कुछ कंपनियों ने तो आटे के दाम बढ़ा भी दिए थे. इस कारण गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का सरकार का ऐलान कारगर साबित नहीं हो पा रहा था. अब नई पाबंदियों से इस मामले में सुधार की उम्मीद बढ़ी है.
जरूरतमंद देशों को अभी भी मिल रहा है गेहूं
रूस-यूक्रेन के बीच इस साल फरवरी से जारी जंग (Russia-Ukraine War) के बाद दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों की कमी का संकट (Food Crisis) उत्पन्न हो गया है. इस बदले हालात में भारत कई देशों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरा है. कुछ खाद्य पदार्थों के निर्यात पर पाबंदियां (Export Curbs) लगाने के बाद भी भारत जरूरतमंद देशों को इनकी आपूर्ति कर रहा है. फूड सेक्रेटरी सुधांशू पांडेय (Food Secretary Sudhanshu Pandey) ने पिछले महीने जर्मनी में एक कार्यक्रम में बताया था कि 13 मई को लगाई गई पाबंदी के बाद से अब तक भारत ने करीब एक दर्जन देशों को 18 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है. इनमें से बांग्लादेश (Bangladesh) और अफगानिस्तान (Afghanistan) जैसे पड़ोसी देश सबसे बड़े लाभार्थी बनकर उभरे हैं. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को मानवीय मदद के तौर पर 50 हजार टन गेहूं देने की प्रतिबद्धता जाहिर की गई थी. इसमें से करीब 33 हजार टन गेहूं अफगानिस्तान को निर्यात हो चुका है.
इन देशों को 4 गुना बढ़ा गेहूं का निर्यात
पांडेय ने कहा था कि प्रतिबंध के बाद इस साल 22 जून तक भारत ने 18 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है. अफगानिस्तान (Afghanistan), बांग्लादेश (Bangladesh), भूटान (Bhutan), इजरायल (Israel), इंडोनेशिया (Indonesia), मलेशिया (Malaysia), नेपाल (Nepal), ओमान (Oman), फिलिपींस (Philippines), कतर (Qatar), दक्षिण कोरिया (South Korea), श्रीलंका (Sri Lanka), सूडान (Sudan), स्विट्जरलैंड (Switzerland), थाईलैंड (Thailand), संयुक्त अरब अमीरात (UAE), वियतनाम (Vietnam) और यमन (Yemen) जैसे देशों को पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY22) की तुलना में इस साल अब तक 04 गुना गेहूं का निर्यात किया गया है.