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Money Laundering: बैंक से धोखाधड़ी इस कंपनी को पड़ी भारी, ED ने कुर्क की 234 करोड़ रुपये की संपत्ति

Money Laundering: चेन्नई के टी. नगर स्थित इंडियन बैंक की शाखा में लोन के लिए आवेदन करने के दौरान मेसर्स सर्वना स्टोर (गोल्ड पैलेस) के पार्टनर्स ने जाली दस्तावेज पेश कर धोखाधड़ी की थी. सीबीआई की एफआईआर के आधार पर ED ने मई 2022 में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी.

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ईडी ने कुर्क की 234 करोड़ रुपये की संपत्ति
ईडी ने कुर्क की 234 करोड़ रुपये की संपत्ति
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आरोपियों ने इंडियन बैंक को लगाया था चूना
  • मई 2022 में ईडी ने शुरू की थी मामले की जांच

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इंडियन बैंक को धोखा देने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग मामले (Money Laundering case) में चेन्नई की मेसर्स सर्वना स्टोर्स (गोल्ड पैलेस) 234.75 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति कुर्क की है. ईडी ने 26 मई 2022 को धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था.

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ED ने 25 मई 2022 को चेन्नई में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) और ईओडब्ल्यू (EOW) की गई एफआईआर के आधार पर यह मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि दिवंगत पल्लाकुदुरै, पी. सुजाता और वाई.पी. शिरावन जो कि मेसर्स सर्वना स्टोर्स (Sarvana Stores) के पार्टनर्स थे, उन्होंने चेन्नई के टी. नगर स्थित इंडियन बैंक की शाखा को धोखा देने के आपराधिक इरादे से अज्ञात अन्य लोगों के साथ मिलकर साजिश रची थी.

प्रदर्तन निलेशालय की जांच में पता चला कि मेसर्स सर्वना स्टोर (Gold Palace) चेन्नई ने लोन पास कराने के लिए फर्जी तरीके से फर्म की बैलेंस शीट तैयार की, जिसमें अच्छी वित्तीय स्थिति दर्शाई गई. जांच में सामने आया कि रिपोर्ट की गई बिक्री और आवेदन में दर्ज फर्म की क्रेडिट के बीच एक बड़ा बेमेल देखने को मिला. ईडी की ओर से बताया गया कि उक्त फर्म ने लोन प्राप्त करते समय इंडियन बैंक को धोखा देने के लिए आगामी वित्तीय वर्षों के लिए अपेक्षित टर्नओवर की एक बनावटी और गलत तस्वीर पेश की.

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जांच से पता चला कि आरोपी व्यक्तियों ने आवेदन में बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश किए थे. इसके अलावा बैंक की जानकारी के बिना संपत्ति को स्थानांतरित कर दिया, ऋण चुकाने के लिए ओसीसी सीमा का इस्तेमाल किया, धन का दुरुपयोग किया और उस धन को डायवर्ट किया, जिसके लिए इसे स्वीकृत नहीं किया गया था. एजेंसी ने कहा कि इसके साथ ही अन्य कई तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं.

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से कहा गया कि इस मामले में आरोपी व्यक्तियों ने सोची समझी साजिश के तहत इंडियन बैंक को धोखा दिया और बैंक को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया. इस सबके जरिए आरोपियों ने खुद को लाभ पहुंचाया था. ईडी ने कहा कि आरोपी कंपनी ने आपराधिक गतिविधियों से लगभग 240 करोड़ रुपये की अपराध की आय अर्जित की है. हालांकि, अभी इस मामले में जांच जारी है. 

 

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