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GDP Data : रंग लाई किसानों की मेहनत, चालू वित्त वर्ष में अब इतनी रहेगी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ!

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देश की आर्थिक वृद्धि दर 2021-22 में रिजर्व बैंक के अनुमान से कम रह सकती है. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनावों में विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ इसे एक मुद्दा बना सकते हैं.

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RBI की उम्मीद से कम रह सकती है इकोनॉमिक ग्रोथ!
RBI की उम्मीद से कम रह सकती है इकोनॉमिक ग्रोथ!
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सुधरा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन
  • इकोनॉमिक ग्रोथ RBI, IMF अनुमान से कम
  • NSO ने जारी किए GDP के आंकड़े

चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर क्या रहेगी, इसके लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने शुक्रवार को जीडीपी आंकड़े (GDP Data) जारी कर दिए हैं. इसके हिसाब से 2021-22 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 9.2% रहने का अनुमान है. जबकि 2020-21 में इसमें 7.3% की गिरावट दर्ज की गई थी.

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रंग लाई किसानों की मेहनत
सरकार के जीडीपी आंकड़े दिखाते हैं कि देश की तरक्की में किसानों की मेहनत रंग लाई है. खेती-बाड़ी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन की बदौलत देश की आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों में सुधार देखा गया है. NSO का कहना है कि 2021-22 के दौरान देश के GVA (सकल मूल्य वर्द्धन) में 135.22 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि होगी. जबकि बीते वित्त वर्ष 2020-21 में ये आंकड़ा 124.53 लाख करोड़ था. इस तरह जीवीए में ये 8.6% की वृद्धि है.

RBI के अनुमान से कम
हालांकि सरकारी आंकड़ों में देश की आर्थिक प्रगति को लेकर जो 9.2% की वृद्धि का अनुमान जताया गया है, वह जीडीपी ग्रोथ को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की उम्मीद से कम है. हाल में रिजर्व बैंक ने 2021-22 में देश की आर्थिक वृद्धि दर (Economic Growth Rate) 9.5% रहने का अनुमान जताया था. लगभग इतना ही अनुमान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का भी था. 

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इससे पहले NSO ने 30 नवंबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी किए थे. तब देश की आर्थिक वृद्धि दर 8.4% दर्ज की गई थी.

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