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Indian Wheat Export: नाम नहीं बताएंगे, भारत से फिर कई देश मांग रहे हैं गेहूं, तुर्की ने बताया था 'सड़ा'

भारत सरकार ने इस साल 13 मई से गेहूं के निर्यात पर पाबंदियां लगा दी है. सरकार ने घरेलू बाजार में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों पर लगाम लगाकर रखने के लिए यह कदम उठाया है. सरकार ने पाबंदियों का ऐलान करते हुए था कि इसके बाद भी पड़ोसी देशों समेत उन देशों को गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाएगी, जिन्हें इसकी बेहद जरूरत है.

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कई देश कर रहे डिमांड (Photo: Reuters)
कई देश कर रहे डिमांड (Photo: Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कई देश कर रहे हैं भारत से गेहूं की मांग
  • रूस-यूक्रेन युद्ध से फूड क्राइसिस की स्थिति

पैगंबर मोहम्मद (Prophet Mohammad Row) पर भाजपा (BJP) के कुछ नेताओं की आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद भारत को मुस्लिम देशों खासकर खाड़ी देशों (Gulf Countries) में विरोध का सामना करना पड़ा है. कुछ खाड़ी देशों से तो ऐसी भी खबरें आईं कि वहां भारतीय सामानों का बहिष्कार (Boycott Indian Goods) किया जा रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के बीच तुर्की (Turkey) के द्वारा भारतीय गेहूं को 'सड़ा' बताए जाने के बाद परिस्थितियां कुछ और प्रतिकूल हो गईं. हालांकि इसके बाद भी ताजा ग्लोबल फूड क्राइसिस (Global Food Crisis) से निपटने के लिए कई देश भारत से गेहूं की मांग कर रहे हैं. यह मांग ऐसे समय आ रही है, जब भारत ने भी कई अन्य देशों की तरह घरेलू मांग को पूरा करने के लिए गेहूं व चीनी समेत खाने-पीने की चीजों के निर्यात पर पाबंदियां (Export Curbs on Wheat and Sugar) लगा दी है.

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समय आने पर होगा आटे को लेकर फैसला

फूड सेक्रेटरी सुधांशू पांडेय (Food Secretary Sudhanshu Pandey) ने बुधवार को बताया कि भारत ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर (FY23) में अब तक करीब 30 लाख टन गेहूं का निर्यात (India Wheat Export) किया है. इसके अलावा भारत सरकार गेहूं को लेकर आए कुछ अन्य देशों के अनुरोध पर भी विचार कर रही है. गेहूं के आटे के निर्यात पर पाबंदियों (Wheat Flour Export Ban) को लेकर पांडेय ने कहा कि सरकार स्थिति पर नजरें बनाए हुए है और सही समय आने पर कदम उठाया जाएगा.

संकट के बीच कई देश मांग रहे भारत से गेहूं

आपको बता दें कि भारत सरकार ने इस साल 13 मई से गेहूं के निर्यात पर पाबंदियां लगा दी है. सरकार ने घरेलू बाजार में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों पर लगाम लगाकर रखने के लिए यह कदम उठाया है. सरकार ने पाबंदियों का ऐलान करते हुए था कि इसके बाद भी पड़ोसी देशों समेत उन देशों को गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाएगी, जिन्हें इसकी बेहद जरूरत है. फूड मिनिस्ट्री (Food Ministry) के ज्वाइंट सेक्रेटरी पार्था एस दास (Partha S Das) ने इस बारे में मीडियो को बताया, 'हमें कई देशों से गेहूं के लिए अनुरोध प्राप्त हुए हैं और अभी उनके ऊपर गौर किया जा रहा है.' हालांकि दास ने उन देशों का नाम नहीं बताया, जिन्होंने भारत से गेहूं की मांग की है.

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बांग्लादेश को भेजा गया इतने लाख टन गेहूं

दास ने कहा कि कुछ देशों के लिए गेहूं के निर्यात की मंजूरी दी जा चुकी है. उदाहरण के लिए पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) को 1.5 लाख टन गेहूं का निर्यात किया गया है. उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में 14 जून तक भारत ने 29.70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है. इस अवधि में 2.59 लाख टन गेहूं के आटे का भी निर्यात किया गया है. उन्होंने इस दौरान 'एक देश, एक राशन कार्ड (One Nation, One Ration Card)' व्यवस्था के बारे में भी बातें की. उन्होंने कहा कि अब तक सिर्फ एक राज्य असम (Assam) ने ही इसे लागू नहीं किया था. अब असम भी इसे लागू कर चुका है और इसके साथ ही गरीबों को सब्सिडी पर अनाज (Subsidised Food Grains) देने की व्यवस्था पूरे देश में लागू हो गई है.

ये खाड़ी देश कर चुके हैं भारत से गेहूं की मांग

इसे पहले ऐसी खबरें आ रही थीं कि भारत को गेहूं के सबसे बड़े खरीदार इंडोनेशिया (Indonesia) और बांग्लादेश (Bangladesh) समेत 5 देशों से गेहूं के लिए रिक्वेस्ट मिले हैं. खबरों में बताया गया था, 'गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने के बाद भारत को इंडोनेशिया, बांग्लादेश, ओमान (Oman), संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यमन (Yemen) से गेहूं के लिए अनुरोध मिले हैं. सरकार गेहूं की उनकी जरूरतों और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता का मूल्यांकन कर रही है. हाल ही में भारत ने इंडोनेशिया और बांग्लादेश समेत कुछ देशों को 5 लाख टन गेहूं का निर्यात करने की मंजूरी दी थी. इसके साथ ही केंद्र सरकार 12 लाख टन गेहूं का निर्यात करने की मंजूरी देने की तैयारी में है.'

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रूस-यूक्रेन युद्ध से दुनिया भर में किल्लत

दरअसल रूस और यूक्रेन के बीच महीनों से छिड़ी जंग (Russia-Ukraine War) ने दुनिया भर में खाने का संकट (Food Crisis) पैदा कर दिया है. चूंकि दोनों देश गेहूं के सबसे बड़े निर्यातकों (Wheat Exporters) में शामिल हैं, लड़ाई के चलते उनका निर्यात बाधित हुआ है और कई देशों के सामने गेहूं की कमी (Wheat Shortage) की स्थिति उत्पन्न हो गई है. इस बीच गेहूं के दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश (2nd Biggest Wheat Producer) भारत ने घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए गेहूं के निर्यात पर 13 मई को पाबंदियां लगा दी. इसने पहले से उपस्थित संकट को और गंभीर बना दिया. हालांकि भारत ने निर्यात पर रोक लगाते हुए कहा था कि वह पड़ोसी देशों और जरूरतमंद देशों को गेहूं का निर्यात करते रहेगा.

यूरोपीय देशों से सस्ता है भारत का गेहूं

जानकारों का कहना है कि भारतीय गेहूं की डिमांड के पीछे एक बड़ा कारण इसकी कम कीमतें हैं. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, कीमतें बढ़ने के बाद भी भारतीय गेहूं अंतरराष्ट्रीय भाव की तुलना में 40 फीसदी सस्ते में उपलब्ध है. भारत भले ही गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक (India Wheat Production) है, लेकिन इसके निर्यात के मामले में भारत काफी पीछे है. भारत सामान्य तौर पर अफगानिस्तान (Afganistan), बांग्लादेश (Bangladesh), श्रीलंका (Srilanka) और नेपाल (Nepal) जैसे पड़ोसी देशों के अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE), यमन (Yemen), ओमान (Oman), कतर (Qatar) जैसे खाड़ी देशों (Gulf Countries) को गेहूं बेचता है. इनके अलावा इंडोनेशिया (Indonesia) और मलेशिया (Malaysia) भी भारतीय गेहूं के प्रमुख खरीदार हैं.

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भारत से गेहूं खरीदते आए हैं ये देश

आंकड़ों पर गौर करें तो बीते साल भारत ने बांग्लादेश को 40.8 लाख टन गेहूं का निर्यात किया. नोमुरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल गेहूं निर्यात का 55.9 फीसदी अकेले बांग्लादेश खरीदता है. इसके बाद श्रीलंका की 7.9 फीसदी, संयुक्त अरब अमीरात की 6.9 फीसदी, इंडोनेशिया की 5.9 फीसदी, यमन की 5.3 फीसदी और फिलीपींस की 5.1 फीसदी हिस्सेदारी है. इसी तरह भारत के गेहूं निर्यात में नेपाल की 3.8 फीसदी, दक्षिण कोरिया की 2.4 फीसदी, कतर की 1.7 फीसदी हिस्सेदारी है. रूस (Russia) अभी गेहूं का सबसे बड़ा निर्यातक है, जबकि भारत का इस मामले में आठवां स्थान है. रूस के अलावा यूरोपीय संघ (EU), ऑस्ट्रेलिया (Australia), कनाडा (Canada), अमेरिका (US), अर्जेंटीना (Argentina) और यूक्रेन (Ukraine) भारत से ज्यादा गेहूं का निर्यात करते हैं.

 

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