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इजरायल और हमास के बीच जंग (Israel-Hamas War) जारी है और ये तेज होती जा रही है. अब इसमें और देश भी अपना रोल निभाते हुए नजर आ रहे हैं, इन हालातों के बीच वैश्विक निकाय वर्ल्ड बैंक (World Bank) की चिंता बढ़ गई है. विश्व बैंक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि लंबी खिंचती इस जंग का बुरा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ सकता है और कमोडिटी सेक्टर पर तो बेहद तगड़ी और दोहरी मार पड़ सकती है और इसका प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई भी देने लगा है. अगर ऐसा होता है, तो फिर भारत समेत दुनियाभर में इसका महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा.
इजरायल-हमास जंग में हजारों जानें गईं
पहले रूस और यूक्रेन में युद्ध (Russia Ukraine War) से भू-राजनीतिक हालात खासे बिगड़े थे और सप्लाई चेन बाधित होने से दुनिया में महंगाई के रूप में इसका प्रभाव देखने को मिला था. इस युद्ध की आग ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि इजरायल और हमास के बीच खूनी जंग शुरू हो गई, जिसमें अभी तक 9000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और दोनों ओर से बमबारी-गोलीबारी के चलते शहर के शहर धुआं-धुआं हो गए हैं. हमास के ठिकाने गाजा पट्टी (Gaza Patti) की सूरत तो इजरायली अटैक में पूरी तरह बदल गई है और ये मलबे के ढेर में तब्दील नजर आ रहा है.
विश्व बैंक ने कहा- लगेगा दोहरा झटका
World's Bank ने अपनी ताजा कमोडिटी मार्केट आउटलुक रिपोर्ट में एक बड़ी चेतावनी जारी की है. विश्व बैंक के पूर्वानुमान के मुताबिक, मध्य पूर्व में युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Price) पर पड़ेगा. रिपोर्ट की मानें तो आने वाले दिनों में क्रूड की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकती है. ऐसा होता है कि फिर एनर्जी और फूड प्रोडक्ट्स की कीमतों में असामान्य उछाल देखने को मिल सकता है. इससे पहले रूस और यूक्रेन युद्ध की वजह से दुनिया इस मुसीबत का सामना कर चुकी है और इसके शांत होने से पहले ही इजरायल-हमास युद्ध ने हालात बिगाड़े हैं.
जंग का Crude Oil पर ऐसे पड़ेगा असर
विश्व बैंक की रिपोर्ट में जारी किए गए अनुमानित आंकड़ों पर नजर डालें तो, हालाँकि, यदि संघर्ष बढ़ता है तो इसे बेहद छोटे व्यवधान के तौर पर लिए जाने पर ग्लोबल क्रूड ऑयल सप्लाई 5,00,000 से 2 मिलियन बैरल प्रति दिन कम हो जाएगी और ऐसा होने पर कीमतों में 3 से 13 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, यानी ये चालू तिमाही में 93 डॉलर से 102 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती हैं. वहीं अगर युद्ध से मध्यम व्यवधान (Medium Disruption) का अनुमान सप्लाई में प्रति दिन 3 से 5 मिलियन बैरल की कटौती हो सकती है, जिससे कीमतें 21 से 35 फीसदी तक बढ़कर 109 से 121 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच सकती हैं.
अब तक तेल की कीमत में 6% का उछाल
तेल की कीमतों पर चिंता जाहिर करते हुए विश्व बैंक ने कहा कि अगर Israel-Hamas War और बड़ा रूप लेता है, तो इसका बड़ा और असर पड़ने पर वैश्विक तेल आपूर्ति प्रति दिन 6 मिलियन से 8 मिलियन बैरल तक कम हो जाएगी, जिसके परिणामस्वरूप शुरुआत में कीमतें 56 से 75 फीसदी तक बढ़कर 140 डॉलर और 157 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच जाएंगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि, वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर अभी तक संघर्ष का प्रभाव सीमित रहा है, लेकिन इसके बावजूद संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक Crude Oil Price लगभग 6 फीसदी बढ़ गया है. बीते दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका भाव 93 डॉलर के पार निकल गया था.
अर्थशास्त्रियों को सता रही ये चिंता
विश्व बैंक के विकास अर्थशास्त्र के चीफ इकोनॉमिस्ट इंदरमिट गिल (Indermit Gill) के मुताबिक, मध्य पूर्व में ये नया संघर्ष 1970 के दशक के बाद से कमोडिटी बाजारों के लिए झटका साबित हो सकता है, जो कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दूसरा सबसे बड़ा होगा. रूस-यूक्रेन वार को ग्लोबल इकोनॉमी पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ा, जो आज तक कायम है. ऐसे में नीति निर्माताओं को सतर्क रहने की जरूरत है.
World Bank के उप मुख्य अर्थशास्त्री अहान कोसे (Ayhan Kose) ने कहा, 'तेल की ऊंची कीमतें, यदि बरकरार रहती हैं, तो निश्चित रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में तगड़ा उछाल आएगा. अगर तेल की कीमत में गंभीर झटका लगता है, तो इससे खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति बढ़ जाएगी जो पहले से ही कई विकासशील देशों में बढ़ी हुई है, इसका सीधा असर जनता पर होगा. गौरतलब है कि भारत कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक देश है, ऐसे में इजरायल-हमास युद्ध पर केंद्र सरकार भी बारीक नजर है.