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Lalit Modi की विरासत 90 साल पुरानी, घर से बस 400 रुपये लेकर निकले थे दादा गुजरमल

गुजरमल मोदी का बचपन का नाम राम प्रसाद था. उनका लालन-पालन उनकी दाई मां गुजरी देवी ने किया. उनका दाई मां के साथ प्रेम इतना अटूट था कि बाद में उनका नाम भी गुजरमल पड़ गया.

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ललित मोदी और गुजरमल मोदी (File Photo)
ललित मोदी और गुजरमल मोदी (File Photo)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दाई मां के नाम पर पड़ा दादा का नाम
  • बनाए साबुन, टॉर्च और लालटेन भी

क्रिकेट की दुनिया को इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) जैसा नगीना देने वाले कारोबारी ललित मोदी इन दिनों फिर चर्चा में हैं. पूर्व मिस यूनिवर्स और फिल्म एक्ट्रेस सुष्मिता सेन के साथ रिलेशनशिप का ऐलान करने के बाद से वह Talk of the Town बने हुए हैं. वैसे ललित मोदी देश से भगोड़ा करार दिए जा चुके हैं और लंदन में रह रहे हैं, लेकिन भारत में उनका कारोबार काफी बड़ा है और उनकी ये विरासत लगभग 90 साल पुरानी है. आइए जानते हैं इस बारे में...

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घर से बस 400 रुपये लेकर निकले थे दादा गुजरमल

ललित मोदी के दादा राय बहादुर सेठ गुजरमल मोदी हरियाणा से संबंध रखते थे. उन्होंने मात्र 17 साल की उम्र में ही कारोबार की दुनिया में कदम रख दिया था. 1919 में वह अपने पिता के साथ घर का बिजनेस करने लगे थे, लेकिन उनकी किस्मत उन्हें दूर ले जाने वाली थी. वह जेब में सिर्फ 400 रुपये लेकर घर से निकल गए और वनस्पति (वनस्पति घी/तेल) का काम करने लगे.

गुजरमल मोदी की जिंदगी ने पलटी तब मारी, जब उन्होंने दिल्ली से लगभग 50 किलोमीटर दूर बेगमाबाद इलाके में 100 बीघा जमीन खरीदी. साल था 1933, इंग्लैंड से लाई मशीनों के साथ उन्होंने इस इलाके में एक चीनी मिल शुरू की. बेगमाबाद का ये इलाका आज के दौर में गाजियाबाद के ‘मोदीनगर’ के नाम से जाना जाता है.

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दाई मां से था अटूट प्रेम, बदल गया नाम भी

गुजरमल मोदी का बचपन का नाम राम प्रसाद था, उनका लालन-पालन उनकी दाई मां गुजरी देवी ने किया. उनका दाई मां के साथ प्रेम इतना अटूट था कि बाद में उनका नाम भी गुजरमल पड़ गया. उनके पिता मुल्तानी मल की कई शादियां हुईं और उनकी चौथी पत्नी ने गुजरमल के भाई केदार नाथ सिंह को जन्म दिया. गुजरमल के 19 साल छोटे भाई ने भी बाद में उनके साथ कारोबार में हाथ बंटाया.

साबुन से लेकर लालटेन तक बनाए

चीनी मिल के सफल होने के बाद गुजरमल 1939 में अपने पहले बिजनेस पर लौट आए और वनस्पति का काम करने लगे. बाद में गुजरमल के हाथ एक बड़ी सफलता 1941 में लगी, जब उन्होंने वनस्पति की मदद से साबुन बनाने का काम शुरू किया. 1942 में उनके कारोबारी योगदान और मोदीनगर जैसा शानदार टाउनशिप स्थापित करने के लिए उन्हें ब्रिटिश हुकूमत ने ‘राय बहादुर’ की उपाधि से नवाजा.

गुजरमल मोदी के साथ शुरू हुए इस कारोबारी सफर में तेल, कपड़ा, पेंट और वार्निश, ग्लिसरीन, लालटेन, बिस्किट, टॉर्च, रबर, स्टील, रेशम जैसे बिजनेस जुड़ते गए. 1963 तक गुजरमल मोदी की ये विरासत Modi Group में बदल गई. उन्हें भारत सरकार ने 1968 में पद्म भूषण से भी नवाजा.

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जब बंट गया मोदी परिवार का कारोबार

मोदी ग्रुप, भारत के उन पहले कारोबारी परिवारों में से एक है जहां पारिवारिक बंटवारे की आंच समूह की कंपनियों को भी झेलनी पड़ी. 80 के दशक के मध्य में मोदी ग्रुप का कारोबार गुजरमल मोदी और उनके भाई केदार नाथ मोदी के परिवारों में बंट गया. उसके बाद गुजरमल मोदी की विरासत को उनके बेटे के. के. मोदी ने संभाला. ललित मोदी, के. के. मोदी के ही सबसे बड़े बेटे हैं.

अब ये हैं मोदी ग्रुप के कारोबार

के.के. मोदी ने मोदी ग्रुप के कारोबार को कई नए आयाम दिए. अब ये समूह Marlboro, Four Square और Red & White जैसी सिगरेट बनाता है. Pan Vilas ब्रांड का पान मसाला होने के साथ-साथ समूह रिटेल सेक्टर में भी काम करती है. देशभर में ये समूह 24x7 नाम के ऑल पर्पज स्टोर चलाता है. साथ ही कन्फेक्शनरी सेक्टर का काम भी करता है.

 

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