LIC बहुत जल्द देश का सबसे बड़ा आईपीओ लाने जा रही है. हाल में कंपनी ने इसके लिए सेबी के पास दस्तावेज भी जमा किए हैं. लेकिन इन दस्तावेजों में एलआईसी ने अपनी पॉलिसियों और क्लेम सेटलमेंट को लेकर जो जानकारी दी है, उस पर अलग-अलग हलकों में अलग-अलग तरीके से बहस हो रही है. अब सरकार की ओर से इसे लेकर स्पष्टीकरण दिया गया है.
दरअसल मामला LIC के 2021 के क्लेम सेटलमेंट की संख्या से जुड़ा है. मीडिया के कुछ हलकों में एलआईसी के क्लेम की संख्या को कोविड से हुई मौतों से जोड़कर दिखाया गया है. इन खबरों के मुताबिक एलआईसी ने जितने क्लेम सेटलमेंट किए हैं और सरकारी आंकड़ों में कोविड से होने वाली जितनी मौतें हैं उनमें भारी अंतर है. इसी को लेकर कुछ खबरों में कोविड से हुई मौतों की संख्या कम बताए जाने की बात कही है. अब सरकार ने इस पर सफाई दी है..
कोविड मौतों का क्लेम से कोई लेना-देना नहीं
सरकार की ओर से कहा गया है कि एलआईसी की पॉलिसियों के क्लेम सिर्फ कोविड से हुई मौतों के लिए नहीं किए गए हैं. बल्कि ये उन सभी बीमाधारकों के हैं जिनकी अन्य वजहों से भी मृत्यु हुई है. आंकड़ों की गलत तरीके से की गई व्याख्या तथ्यों पर आधारित नहीं है, बल्कि ये खबर लिखने वालों के पक्षपातपूर्ण रवैये को दिखाती है. साथ ही ये भारत में कोविड मौतों के आंकड़ों को दर्ज करने और उनके रोजाना प्रकाशन करने के तरीके की कम समझ को भी दिखाता है.
कोविड मौतें दर्ज करने का पारदर्शी तरीका
सरकार का कहना है कि देश में कोविड से होने वाली मौतों को दर्ज करने का पारदर्शी तरीका है. इसके लिए ग्राम पंचायत, जिला से लेकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक व्यवस्था बनी हुई है. सरकार इस महामारी की शुरुआत से ही इन आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से रख रही है.
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