13 अप्रैल को एक एनकाउंटर में STF ने अतीक अहमद के बेटे असद अहमद को मार गिराया था. उसी दिन यूपी प्रशासन ने एक आंकड़ा जारी किया गया था, जो दिखाता है अतीक अहमद ने डरा-धमकाकर कितनी संपत्ति जमा कर ली थी. क्योंकि 10वीं फेल अतीक अहमद (Atiq Ahmed) के पास इतनी संपत्ति कैसे और कहां से आई?
पिछले 2 साल में अतीक अहमद की अवैध संपत्तियों पर योगी सरकार का बुलडोजर चल रहा है, अभी भी खंगालने का सिलसिला जारी है. कई शहरों में अतीक अहमद की काली कमाई का पता चला है. सरकारी आंकड़ों को मानें तो 13 अप्रैल तक अतीक अहमद से करीब 1169 करोड़ की अवैध संपत्तियां मुक्त कराई जा चुकी है. जबकि कई शहरों में अब भी दबिश जारी है. ऐसे में आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं. वहीं इस बीच अब धीरे-धीरे अतीके सताए लोग भी सामने आ रहे हैं.
प्रशासन का बड़ा खुलासा
दरअसल, 13 अप्रैल को यूपी सरकार की ओर से जारी डेटा के मुताबिक प्रशासन ने अतीक अहमद की 417 करोड़ की संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया है, जबकि करीब 752 करोड़ रुपये के अवैध कब्जे को ध्वस्त कर दिया गया है. कुल मिलाकर अब तक 1169 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा हो चुका है.
बता दें, ईडी ने अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम के एनकाउंटर से पहले अतीक और उसके करीबियों के ठिकानों पर छापे मारे थे. ईडी को तब 15 ठिकानों से 100 से ज्यादा अवैध और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे. इस दौरान ये भी खुलासा हुआ था कि उसने लखनऊ और प्रयागराज के पॉश इलाकों में कई संपत्तियां खरीदी है. ये संपत्तियां या तो अतीक के नाम पर है, या उसके परिवारवालों के नाम पर है.
इसी दौरान ED को अतीक के नाम दर्ज लखनऊ में 47 लाख रुपये की कीमत के 5900 Sqmt में बने मकान के सबूत मिले. अतीक अहमद ने साल 2013 में लखनऊ के गोमतीनगर का प्लॉट 29 लाख रुपये में लिखवा लिया था, जबकि सर्किल रेट से कीमत 47 लाख रुपये थी.
अतीक अहमद के वसूली के तरीके
यही नहीं, चुनाव में इस्तेमाल में होने वाली गुलाबी और सफेद पर्ची से अतीक अहमद तीन से पांच लाख रुपये तक की वसूली करवाता था. अतीक जब चुनाव लड़ता था, उस समय गुलाबी पर्ची व्यापारियों के बीच बांटी जाती थी. ये गुलाबी पर्ची असल में इलेक्शन टैक्स होता था. छोटे व्यापारी तीन लाख और बड़े व्यापारी टैक्स के नाम पर पांच लाख रुपये देते थे. वसूली का यह पैसा अतीक के बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता था.
यही नहीं, पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि अतीक को जो जमीन पसंद आ जाती थी, उसपर वो कब्जा कर लेता था. इसके लिए वो जमीन मालिक पर हर तरह का दबाव बनाता था, बता दें, अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की 15 अप्रैल को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हमलावरों ने ये हमला उस समय किया था, जब पुलिस दोनों को मेडिकल चेकअप के लिए लेकर जा रही थी.
यानी पिछले हफ्ते भर माफिया अतीक अहमद का कुनबा बिखर चुका है. अतीक अहमद और उसका बेटा असद अब इस दुनिया में नहीं है. अतीक अहमद की पत्नी फरार है. जिसकी तलाश में छापेमारी जारी है.
अतीक अहमद का परिवार
अतीक अहमद और उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन के पांच बेटे हैं. बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में बंद है. दूसरा बेटा अली प्रयागराज की नैनी जेल में बंद है. तीसरा बेटा असद 13 अप्रैल को मुठभेड़ में एसटीएफ के हाथों मारा गया. अतीक के बाकी दो बेटे अभी नाबालिग हैं, जो बालसुधार गृह में हैं. कहा जाता है कि एक समय प्रयागराज में अतीक अहमद की तूती बोलती थी, और आज घर में सन्नाटा पसरा है.
अघोषित संपत्ति के खुलासे से हर कोई हैरान है, क्योंकि साल 2019 में जब अतीक अहमद ने वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था. उसने अपने चुनावी हलफनामे में केवल अपनी संपत्ति 25 करोड़ रुपये बताई थी. हलफनामे से खुलासा हुआ था कि अतीक अहमद के एक दर्जन से अधिक बैंक खाते थे.
शाइस्ता परवीन की तलाशी
पुलिस का कहना है कि अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन की गिरफ्तारी से कई और राज खुल सकते हैं. क्योंकि अतीक और अशरफ के जेल जाने के बाद शाइस्ता ने जमीन से जुड़े अवैध कारोबार को अपने हाथों में ले लिया. उमेश पाल की हत्या के पीछे भी शाइस्ता की बड़ी भूमिका बताई जा रही है. उमेश पाल की हत्या में नाम आते ही वह फरार है. यही नहीं, मारे जाने से पहले अतीक ने पुलिस को 14 ऐसे लोगों के नाम बताए थे, जो उसे फंडिंग किया करते थे. ये रकम शाइस्ता परवीन तक पहुंचाई जाती थी. सूत्रों के मुताबिक अतीक अहमद ने पुलिस की पूछताछ में ऐसी 200 से अधिक फर्जी कंपनियों के बारे में बताया है, जिससे उसकी काली कमाई का कनेक्शन है.