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लाइसेंस राज खत्म! 1991 का वो ऐतिहासिक बजट जिससे मनमोहन सिंह ने बदल दी देश की तस्वीर

देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) का निधन गुरुवार को 92 वर्ष की आयु में हो गया. उन्होंने पीएम के रूप में देश में आर्थिक सुधार के लिए कई बड़े काम किए और 1991 के Financial Crisis में उनकी नीतियों और सुधार ने अहम रोल निभाया था.

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गुरुवार 26 दिसंबर को 92 साल की उम्र में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन
गुरुवार 26 दिसंबर को 92 साल की उम्र में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार देर रात निधन (Manmohan Singh Passes Away) हो गया. उन्होंने 92 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. उम्र सबंधी स्वास्थ्य समस्यायों के चलते उन्हें देर शाम तबीयत बिगड़ने के बाद एम्स (AIIMS) के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया था. डॉ. मनमोहन सिंह न केवल भारत के प्रधानमंत्री रहे, बल्कि वित्त मंत्री के रूप में भी काम किया. उनके नाम पर कई उपलब्धियां हैं. जब देश 90 के दशक में बड़े आर्थिक संकट में था, तब वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने ऐसे बड़े फैसले लिए, जिन्होंने Indian Economy की तस्वीर बिल्कुल बदल दी थी, आर्थिक उदारीकरण में उनका विशेष योगदान रहा. आइए जानते हैं उनके ऐसे ही बड़े ऐलान, जिनके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा. 

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लाइसेंस राज खत्म करने समेत कई बड़े काम
दिवंगत डॉ मनमोहन सिंह ने 1991 में वित्त मंत्री रहते हुए ऐसी नीतियां बनाईं, जो देश की इकोनॉमी के लिए मील का पत्थर साबित हुईं. इन नीतियों ने लाइसेंस राज को खत्म कर दिया, अर्थव्यवस्था को विदेशी निवेश के लिए खोल दिया और ग्लोबलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और उदारीकरण के एक ऐसे युग की शुरुआत की, जिसने देश की दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया. जुलाई 1991 में वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने भारत के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना किया था और अपनी सूझ-बूझ से इससे देश को निकाला था.

मनमोहन सिंह

जब क्रैश हो गई थी इंडियन इकोनॉमी
ये ऐसा समय था जबकि विदेशी मुद्रा भंडार लगभग समाप्त हो गया था, देश में महंगाई दर कंट्रोल से बाहर हो गई थी. हालात यहां तक खराब हो गए थे कि देश दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया था. उस समय केंद्र में नरसिम्हा राव की सरकार थी और आर्थिक संकट के बीच भारतीय करेंसी रुपया क्रैश हो चुका था और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ये 18% तक लुढ़क गया था. खाड़ी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत आसमान पर पहुंच गई थी. ये ऐसा समय था जबकि भारत के पास महज 6 अरब डॉलर का फॉरेक्स रिजर्व बचा था, जो ज्यादा से ज्यादा दो हफ्ते के लिए ही काफी था. राजकोषीय घाटा करीब 8 फीसदी और चालू खाता घाटा 2.5 फीसदी पर पहुंच गया था. 

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24 जुलाई का वो ऐतिहासिक बजट
ऐसे हालातों में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने देश के 22वें फाइनेंस मिनिस्टर के रूप में अपने पहले बजट भाषण (24 जुलाई 1991) में आर्थिक उदारीकरण के लिए बड़े ऐलान किए. इस Budget 1991 को इंडियन इकोनॉमी की तस्वीर बदलने वाला बजट भी कहा जाता है. इसमें प्रमुख तौर पर कॉर्पोरेट टैक्स की दरों को 5 पॉइंट बढ़ाकर 45% कर दिया गया था. इसके अलावा अन्य फैसलों में आयात शुल्क को 300% से घटाकर 50% करना, सीमा शुक्ल को 220% से घटाकर 150% करना, आयात के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल था, इसके साथ ही उदारीकरण, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन की बात की गई थी. निजी कंपनियों को आयात की स्वतंत्रता दी गई. विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाई गई. 

बजट में कॉरपोरेट टैक्स बढ़ाने और TDS की शुरुआत का ऐलान भी किया गया. इसके साथ ही म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में प्राइवेट सेक्टक की भागीदारी को परमिशन देने का काम किया गया. यही नहीं लगभग खत्म हो चुके विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंक ऑफ इंग्लैंड समेत अन्य संस्थानों के पास भारतीय सोना गिरवी रखने का फैसला किया गया और लगभग 60 करोड़ डॉलर की रकम जुटाई गई. 

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मनमोहन सिंह

भारत में विदेशी निवेश का रास्ता साफ 
कुल मिलाकर कहा जाए तो मनमोहन सिंह के वित्त मंत्री रहते हुए लाई गई इन नीतियों और सुधारों का साफ असर इंडियन इकोनॉमी पर देखने को मिला और भारत में विदेशी निवेश के दरवाजे खुल गए. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में डिर्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने भी दिवंगत मनमोहन सिंह द्वारा 1991 में पेश किए गए इस ऐतिहासिक बजट का जिक्र करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है. उन्होंने एक एक्स पोस्ट पर लिखा है कि, 'डॉ. मनमोहन सिंह के 1991 के बजट ने भारत की अर्थव्यवस्था को मुक्त कर दिया, जिससे करोड़ों भारतीयों की आर्थिक संभावनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. उनके दूरदर्शी सुधारों ने मेरे जैसे अनगिनत युवा अर्थशास्त्रियों को प्रेरित किया.'

इसके बाद जब डॉक्टर मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक लगातार दो कार्यकालों में देश के प्रधानमंत्री रहे, तो इस दौरान भी उनके द्वारा कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए और कई कार्यक्रम शुरू किए गए,जिनमें मनरेगा, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, आधार और डायरेक्ट बेनेफिट्स ट्रांसफर शामिल रहे.  

मनरेगा और RTI
दिवंगत पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में ही साल 2005 में शुरू किए गए मनरेगा ने प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन के वेतन रोजगार की गारंटी दी, इससे खासतौर पर ग्रामीणों की आजीविका में बड़ा सुधार देखने को मिला. इसके अलावा इसी साल सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए जून 2005 में सूचना का अधिकार (RTI) कानून लागू किया गया. 

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मनमोहन सिंह

आधार कार्ड की शुरुआत
मनमोहन सिंह के  कार्यकाल की अहम उपलब्धियों में आधार कार्ड (Aadhaar Card) की शुरुआत भी शामिल है. जनवरी 2009 में देश के निवासियों को विशिष्ट पहचान प्रदान करने, विभिन्न सेवाओं तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने के लिए आधार कार्ड योजना की शुरुआत की गई, यही आधार आज देश के सभी नागरिकों की पहचान बन गया है. 

खाद्य सुरक्षा और एग्रीकल्चर लोन माफ
मनमोहन सिंह के कार्यकाल की अन्य बड़ी उपलब्धियों में देश में कृषि संकट को दूर करने के लिए 60,000 करोड़ रुपये की ऋण माफी के अलावा उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान 2013 में देश के गरीब लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चत करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू किया जाना भी शामिल है. 

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