देश में मोबाइल फोन कनेक्शनधारकों यानी सब्सक्राइबर्स की संख्या 116 करोड़ को पार कर चुकी है, लेकिन आज भी 25 हजार गांव ऐसे हैं जहां न तो मोबाइल पहुंचा है और न ही इंटरनेट. इनमें से करीब 11,000 गांव वामपंथी चरमपंथ या नक्सलवाद से प्रभावित हैं.
देश के 11 राज्यों के करीब 90 जिले वामपंथी चरमपंथ से प्रभावित हैं, इनमें आने वाले 96,000 गांवों में से सिर्फ 85,000 में मोबाइल और इंटरनेट संपर्क पहुंचा है.
अरुणाचल के 73 फीसदी गांवों में नहीं है मोबाइल-इंटरनेट
बिना मोबाइल और इंटरनेट वाले सबसे ज्यादा गांव ओडिशा में हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश के 73 फीसदी गांवों में मोबाइल और इंटरनेट संपर्क नहीं है.
संचार मंत्रालय ने संसद को बताया है कि चरमपंथ से प्रभावित जिन गांवों में मोबाइल एवं इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है, उनमें से सबसे ज्यादा 6099 गांव ओडिशा में, 2612 गांव मध्य प्रदेश और 2328 गांव महाराष्ट्र में हैं.
सरकार ने बताया है कि अरुणाचल प्रदेश के 3035 गांवों में से 2223 में किसी तरह की मोबाइल या इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है. इसका मतलब यह हुआ कि अरुणाचल प्रदेश के 73 फीसदी गांवों में मोबाइल या इंटरनेट कनेक्शन नहीं है. सात राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं, जहां सभी गांवों तक मोबाइल एवं इंटरनेट सेवा पहुंच चुकी है.
संचार मंत्री का निर्देश
केंद्रीय संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सभी टेलीकॉम ऑपरेटर को यह निर्देश दिया था कि वे गांव के अनुसार डेटा इकट्ठा करें. इस तरह जुटाए गए डेटा से पता चला कि देश के 5,97,618 गांवों में से 5,72,551 गांवों तक मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं पहुंच चुकी हैं.
गौरतलब है कि दूरसंचार नियामक TRAI ने बुधवार को टेलीफोन और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के बारे में आंकड़े जारी किए थे. इससे पता चलता है कि इस मामले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र का अंतर तेजी से निपट रहा है. जनवरी 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक शहरी क्षेत्र में टेलीकॉम सब्सक्राइबर यानी ग्राहकों की संख्या 65.3 करोड़ थी, जबकि इस दौरान ग्रामीण क्षेत्र में सब्सक्रिप्शन बढ़कर 53 करोड़ पहुंच गया.