scorecardresearch
 

दवा दुकानदारों के संगठन ने Amazon के सीईओ को लिखा लेटर, ई-फार्मेसी को बताया गैरकानूनी  

दवा दुकानदारों की संस्था AIOCD ने Amazon के सीईओ जेफ बेजोस को एक लेटर भेजकर चेताया है कि भारत में ई-फार्मेसी गैर कानूनी है. इसके पहले संगठन ने पीएमओ को भी एक लेटर भेजकर दिग्गज कंपनियों के ई-फार्मेसी में उतरने का विरोध किया था. 

Advertisement
X
दवा दुकानदारों के संगठन ने जेफ बेजोस को लिखा लेटर
दवा दुकानदारों के संगठन ने जेफ बेजोस को लिखा लेटर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत के ई-फॉर्मेसी कारोबार में एमेजॉन ने दी है दस्तक
  • दवा दुकानदार इस कारोबार में दिग्गजों के आने से परेशान
  • उन्होंने एमेजॉन के सीईओ लेटर लिखकर जताया विरोध

दवा दुकानदारों की एक शीर्ष संस्था ने अब Amazon के सीईओ जेफ बेजोस को एक लेटर भेजकर चेताया है कि भारत में ई-फार्मेसी गैर कानूनी है. इसके पहले संगठन ने पीएमओ को भी एक लेटर भेजकर दिग्गज कंपनियों के ई-फार्मेसी में उतरने का विरोध किया था. 
जंग का मैदान 
 गौरतलब है कि भारत का दवा बाजार ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनियों के लिए कारोबारी जंग का मैदान बनने जा रहा है. दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन ने बेंगलुरु से ऑनलाइन फार्मेसी की शुरुआत कर दी है, तो रिलायंस रिटेल भी नेटमेड्स नामक एक भारतीय ऑनलाइन फार्मेसी कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी खरीदकर इस कारोबार में उतरने जा रही है. फ्लिपकार्ट भी इस कारोबार में उतरने का मन बना रही है.
इसे भी पढ़ें: TikTok जैसे बैन चीनी ऐप्स को भारी नुकसान, भारत में करोड़ों डाउनलोड, अरबों की कमाई
आल इंडिया आर्गनाइजेशन आफ केमिस्ट ऐंड ड्रगिस्ट (AIOCD) ने हाल में ही जेफ बेजोस को पत्र लिखा है. इसके साथ ही एमेजॉन की भारतीय इकाई के सीईओ अमित अग्रवाल को भी यह पत्र भेजा गया है. इसमें कहा गया है कि आनलाइन दवाईयों की बिक्री भारत में काफी विवादास्पद रही है. इसमें कई मामले अदालत में पहुंचे हैं.
क्या है AIOCD की दलील 
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक एआईओसीडी ने पत्र में कहा है, ‘हमें पता चला है कि एमेजॉन डाट इन ने आनलाइन फार्मेसी के क्षेत्र में उतरने का फैसला किया है. हम आपको इसी संदर्भ में यह लिख रहे हैं कि भारत में ई-फार्मेसी गैरकानूनी है और दवा एवं प्रसाधन कानून एवं नियमों के तहत इसकी मान्यता नहीं है.'
पिछले हफ्ते ही Amazon ने बेंगलुरू में आनलाइन फार्मेसी की शुरुआत की है. उसने ओवर द काउंटर और डाक्टर की पर्ची के आधार पर दोनों तरह से दवा के लिये ऑर्डर लेने शुरू किये हैं. 
पीएमओ को भी लिखा था लेटर 
इसके पहले संगठन ने  प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भी लेटर लिखकर इसकी शिकायत की थी. आल इंडिया आर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स ऐंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने इस बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को लेटर लिखकर विरोध जताया है.
इसे भी पढ़ें: 7 रुपये का शेयर 2 साल में 800 रुपये का, क्या पेनी स्टॉक में लगाना चाहिए पैसा?
संगठन का कहना है कि एमेजॉन की फार्मेसी कारोबार में उतरना गैरकानूनी है और उसे इसका कानूनी नतीजा भुगतना पड़ सकता है. संगठन का दावा है कि ऑनलाइन दवा बेचना 'कोर्ट की अवमानना' है.

Advertisement

संगठन ने कहा, 'ई-फार्मेसी गैर कानूनी है और इसे ड्रग्स ऐंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में मान्यता नहीं दी गई है. नियम के मुताबिक कई दवाएं ऐसी हैं जिन्हें बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेचा ही नहीं जा सकता. सरकार ने कोरोना संकट की वजह से सिर्फ आसपास की दवा दुकानों को ही होम डिलिवरी की इजाजत दी थी.'

Advertisement
Advertisement