बीते 28 सितंबर से रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक होने वाली थी, लेकिन आखिरी समय में इसे आगे के लिए टाल दिया गया था. अब करीब 9 दिन बाद बुधवार यानी आज से मौद्रिक नीति की बैठक की शुरुआत हो रही है. तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक के नतीजे 9 अक्टूबर को आने वाले हैं. फेस्टिव सीजन को देखते हुए ये बैठक काफी अहम है.
इस दिन रेपो रेट के जरिए ये तय हो जाएगा कि लोन की ब्याज दर में कटौती होगी या नहीं. आपको बता दें कि बीते अगस्त महीने में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था. केंद्रीय बैंक इससे पहले पिछली दो बैठकों में रेपो रेट में 1.15 प्रतिशत की कटौती कर चुका है. फिलहाल रेपो दर चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर 3.35 प्रतिशत है.
महंगाई पर होगी चर्चा
आरबीआई की बैठक में महंगाई को लेकर चर्चा होने की संभावना है. पिछले दिनों महंगाई दर के आंकड़े जारी हुए थे, जो 6 फीसदी को पार कर गई है. जानकारों की मानें तो खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी की वजह से भारतीय रिजर्व बैंक आगामी मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों को यथावत रख सकता है. विशेषज्ञों का कहना कि आपूर्ति पक्ष संबंधी मुद्दों की वजह से खुदरा मुद्रास्फीति बढ़ी है, जिसके मद्देनजर केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है.
बीते दिनों भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा था कि रिजर्व बैंक को अपने नरम रुख को जारी रखना चाहिए. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़ने की वजह से अभी केंद्रीय बैंक को दरों में कटौती से बचना चाहिए. हालांकि, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने स्पष्ट किया था कि कोरोना काल में इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए केंद्रीय बैंक हर जरूरी कदम उठाएगा.
मौद्रिक नीति समिति में 3 नए सदस्य
इस बार की बैठक में मौद्रिक नीति समिति में 3 नए सदस्य होंगे. दरअसल, हाल ही में सरकार ने मौद्रिक नीति समिति में तीन सदस्यों की नियुक्ति कर दी है. तीन जाने माने अर्थशास्त्रियों अशिमा गोयल, जयंत आर वर्मा और शशांक भिडे को नियुक्त किया गया है. इन सदस्यों की नियुक्ति चेतन घाटे, पामी दुआ, रविन्द्र ढोलकिया के स्थान पर की गई है.