अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की रिलायंस इंडस्ट्री (Reliance Industries) तेजी से अपना रिटेल कारोबार बढ़ा रही है. हाल में रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) ने बड़े ही नाटकीय ढंग से फॉर्च्यून ग्रुप (Fortune Group) के बिग बाजार (Big Bazaar) स्टोर्स को हासिल कर लिया. और अब देश की एक और सुपरमार्केट कंपनी रिलायंस की हो सकती है.
रिलायंस के बिग बाजार हासिल करने का मामला भले कानूनी पचड़े में फंसा हो, लेकिन ये नया मामला जर्मनी की रिटेलर कंपनी मेट्रो एजी (Metro AG) से जुड़ा है. कंपनी देश में 2003 से काम कर रही है और 30 से ज्यादा कैश एंड कैरी (Cash & Carry) स्टोर चलाती है.
लोकल पार्टनर की तलाश में Metro
खबर है कि मेट्रो एजी की पेरेंट कंपनी ने भारत में एक्सपेंशन के लिए और पैसे निवेश करने से मना कर दिया है. बल्कि वह 11,000 से 13,000 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पर कंपनी में अपनी बहुलांश हिस्सेदारी किसी लोकल पार्टनर को बेचना चाहती है. इसके लिए वह रिलायंस ग्रुप के साथ-साथ टाटा ग्रुप (Tata Group), डी-मार्ट (D-Mart) चलाने वाली कंपनी एवेन्यू सुपरमार्केट (Avenue Supermarket) , लुलू ग्रुप (Lulu Group) और एमेजॉन (Amazon) के साथ संपर्क में है.
इतना ही नहीं कंपनी ने उसकी हिस्सेदारी का अच्छा खरीदार ढूंढने की जिम्मेदारी जे. पी. मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स को दी है.
इस बारे में बिजनेस टुडे की ओर कंपनी को भेजे गए ई-मेल के जवाब में कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि मेट्रो इंडिया का बिजनेस लगातार बढ़ रहा है. थोक बाजार में इसके लिए काफी संभावनाएं हैं. हम संभावित पार्टनर्स के साथ मिलकर स्ट्रैटेजिक ऑप्शन पर विचार कर रहे हैं, ताकि कंपनी की मौजूदा क्षमताओं को बढ़ाया जा सके.
घाटे में Metro का भारतीय कारोबार
मेट्रो इंडिया अपने 18 साल के ऑपरेशन में पहली बार वित्त वर्ष 2018-19 में प्रॉफिट में आई थी. कंपनी रजिस्ट्रार के पास उपलब्ध डेटा के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में भले कंपनी का कारोबार बढ़कर 6,915.30 करोड़ रुपये हो गया हो. लेकिन मुनाफे के लेवल पर कंपनी रेड जोन में ही रही. कंपनी के वित्त वर्ष 2019-20 और 2021-22 के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो सके हैं.
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