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लाख रुपये का एक शेयर! टायर बनाने वाली कंपनी रचने वाली है इतिहास, ये है भारत का सबसे महंगा स्टॉक

MRF की शुरुआत साल 1946 में टॉय बैलून बनाने से हुई थी. 1960 के बाद कंपनी ने टायर बनाना शुरू कर दिया. पिछले एक हफ्ते में स्टॉक ने 10.79 फीसदी की छलांग लगाई है.

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एक लाख के करीब पहुंचा ये स्टॉक.
एक लाख के करीब पहुंचा ये स्टॉक.

टायर बनाने वाली कंपनी MRF का शेयर इतिहास रचने के करीब है. कंपनी का एक शेयर एक लाख रुपये के आंकड़े को छूने वाला है. अगर आने वाले दिनों में MRF का शेयर एक लाख रुपये के स्तर पर पहुंचता है, तो ये भारत का पहला लखटकिया शेयर होगा. पिछले 20 साल में ये स्टॉक 100 गुना बढ़ा है. पांच मई यानी शुक्रवार के कारोबार में MRF का स्टॉक 368 फीसदी की बढ़त के साथ 98,380 रुपये पर बंद हुआ. शुक्रवार को स्टॉक 3,269.20 रुपये चढ़ा. अगर सोमवार को भी ऐसी तेजी देखने को मिली तो शेयर एक लाख के आंकड़े को पार कर जाएगा.

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स्टॉक ने लगाई जोरदार छलांग

पिछले एक हफ्ते में स्टॉक ने 10.79 फीसदी की छलांग लगाई है. वहीं, महीने भर में ये 16 फीसदी से अधिक उछला है. इस साल यानी साल 2023 में अबतक MRF का शेयर 11.38 फीसदी उछला है. साल 2000 में MRF के एक शेयर की कीमत 1000 रुपये थी. वहीं, अब ये स्टॉक एक लाख रुपये के ऐतिहासिक स्तर को छूने के करीब है. यानी इन 23 साल की अवधि में स्टॉक ने 10,000 फीसदी की जोरदार छलांग लगाई है.

23 साल में ऐसे चढ़ा शेयर

MRF के शेयरों पर नजर डालें, तो साल 2000 में स्टॉक का भाव 1000 रुपये प्रति शेयर था. वहीं, 2012 में ये 10,000 रुपये के स्तर पर पहुंचा. इसके बाद 2014 में इस स्टॉक ने 25,000 रुपये का आंकड़ा छुआ. फिर 2016 में 50,000 रुपये पर पहुंचा. साल 2018 में 75,000  और अब एक लाख रुपये के करीब पहुंच चुका है. 27 अप्रैल 1993 को MRF के एक शेयर की कीमत 11 रुपये थी. अब आपके मन में भी सवाल उठ रहे होंगे कि आखिर MRF के शेयरों की कीमत इतनी अधिक कैसे हो गई. 

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क्यों इतना महंगा हुआ स्टॉक?

दरअसल, इसके पीछे की वजह है शेयरों को स्प्लिट (Stock Split) ना करना. एंजल वन के मुताबिक 1975 के बाद से ही MRF ने अभी तक अपने शेयरों को कभी स्प्लिट नहीं किया. इसके पहले साल 1970 में 1:2 और 1975 में 3:10 के अनुपात में MRF ने बोनस शेयर इशू किये थे. MRF का पूरा नाम मद्रास रबर फैक्ट्री है.

ऐसे हुई थी कंपनी की शुरुआत

MRF की शुरुआत साल 1946 में टॉय बैलून बनाने से हुई थी. 1960 के बाद कंपनी ने टायर बनाना शुरू कर दिया. अब यह कंपनी भारत में टायर की सबसे बड़ी निर्माता है. भारत में टायर इंडस्ट्री का मार्केट करीब 60,000 करोड़ रुपये का है. JK Tyre, CEAT Tyre इत्यादि MRF के कॉम्पिटिटर हैं. MRF के भारत में 2500 से अधिक वितरक हैं और कंपनी दुनिया के 75 से अधिक देशों में एक्सपोर्ट करती है.  

कंपनी का प्रदर्शन

चौथी तिमाही में MRF कंपनी ने शानदार नतीजे पेश किए हैं. FY23 की मार्च तिमाही में MRF का स्टैंडअलोन प्रॉफिट 162 फीसदी बढ़कर 410.66 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. इस दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस मजबूत हुआ है. वहीं कंपनी का ऑपरेशन से होने वाला स्टैंडअलोन रेवेन्यू सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़कर 5,725.4 करोड़ रुपये हो गया है. कंपनी ने 169 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान किया है.  

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