सोमवार 28 अगस्त 2023 को देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd) की 46वीं आम बैठक (RIL AGM) संपन्न हुई. मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने इस बैठक को संबोधित करते हुए कई बड़े ऐलान किए. इनमें सबसे बड़े ऐलान की बात करें तो उन्होंने बताया कि ईशा अंबानी-आकाश अंबानी और अनंत अंबानी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल होने जा रहे हैं, जबकि नीता अंबानी बोर्ड से इस्तीफा देंगी. लेकिन क्या आप जानते हैं कि Board Of Director क्या होते हैं और उनकी किसी भी कंपनी में क्या भूमिका होती है? आइए जानते हैं...
ईशा-आकाश-अनंत होंगे नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर
Reliance AGM 2023 को संबोधित करते हुए, मुकेश अंबानी ने ग्रुप बोर्ड में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा करते हुए बताया कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ईशा अंबानी (Isha Ambani), आकाश अंबानी (Akash Ambani) और अनंत अंबानी (Anant Ambani) को नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति की मंजूरी दे दी है. शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के साथ ही यह नियुक्ति प्रभावी हो जाएगी. इसके अलावा नीता अंबानी बोर्ड से अलग होंगी. यहां बता दें ये बड़ी जिम्मेदारी होती है, जिन्हें अब मुकेश अंबानी के तीनों बच्चे उठाएंगे.
दरअसल, निदेशक मंडल या बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स कंपनी के शेयरहोल्डर्स या स्टेकहोल्डर्स के हितों का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रबंधन, निरीक्षण और प्रमुख निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार होता है. किसी भी कंपनी में इनकी भूमिका का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उसके सीईओ (CEO) की नियुक्ति और वैल्यूएशन निदेशक मंडल द्वारा किया जाता है. इसके अलावा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स अप्रूव्ड स्ट्रेटजी को क्रियान्वित करते हैं, संसाधनों का प्रबंधन करते हैं और कार्यकारी टीम का नेतृत्व करते हैं.
किसी कंपनी में निदेशक की भूमिका
कंपनी में निदेशक या डायरेक्टर ऐसा पेशेवर व्यक्ति होता है, जिसे कंपनी द्वारा उसके बिजनेस का मैनेजमेंट करने और उसे चलाने के लिए चुना जाता है. कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(34) के तहत कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में नियुक्त व्यक्ति को निदेशक के रूप में परिभाषित किया गया है. यहां इस बात पर गौर करना जरूरी होता है कि किसी कंपनी में निदेशक के पद पर किसी संस्था का सेलेक्शन नहीं किया जा सकता है, केवल एक व्यक्ति को ही कंपनी के निदेशक के रूप में बोर्ड में जगह दी जा सकती है.
साफ शब्दों में कहें तो कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को उस कंपनी का दिमाग कहा जा सकता है, क्योंकि वे ही कारोबारी माहौल में कंपनी के कार्यों और व्यवहार को नियंत्रित करने का काम करते हैं.
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को ऐसे समझें
अब बात करें कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में कितने निदेशक शामिल होते हैं, तो कंपनी अधिनियम-2013 के मुताबिक, किसी सार्वजनिक कंपनी में न्यूनतम 3 और अधिकतम 15 निदेशकों की नियुक्ति की जा सकती है, जिनमें से कम से कम एक तिहाई संख्या स्वतंत्र निदेशकों की होनी चाहिए. वहीं निजी कंपनी में न्यूनतम 2 और अधिकतम 15 निदेशक नियुक्त किए जाने का प्रावधान है.
अधिनियम के मुताबिक, मंडल में 15 निदेशकों की अधिकतम सीमा सरकारी कंपनियों और लाइसेंस प्राप्त गैर-लाभकारी कंपनियों पर लागू नहीं है, जो अधिनियम की धारा 8 के तहत आती हैं. इसके अलावा कम से कम 1 महिला निदेशक होनी चाहिए और कम से कम 1 निदेशक पिछले कैलेंडर वर्ष में न्यूनतम 182 दिनों की अवधि के लिए भारत में रहना चाहिए.
कंपनी अधिनियम-1956 और 2013 में क्या बदला
कंपनी अधिनियम, 1956 के मुताबिक, कंपनी में अधिकतम 12 निदेशकों की नियुक्ति की जा सकती है, जबकि अतिरिक्त निदेशक की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार की सहमति आवश्यक थी. वहीं कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार अधिकतम 15 निदेशकों की नियुक्ति की जा सकती है और केंद्र सरकार की सहमति की आवश्यकता नहीं है. मंडल की बैठक में केवल एक विशेष प्रस्ताव पारित करने से कंपनी अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति कर सकती है.
इसी तरह 1956 अधिनियम में महिला निदेशक की नियुक्ति अनिवार्य नहीं थी, जबकि बदलाव के बाद कम से कम 1 महिला निदेशक नियुक्त करना जरूरी है. अधिनियम 1956 में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं था, जबकि अधिनियम 2013 की धारा 149(4) के अनुसार, सार्वजनिक सूचीबद्ध कंपनी के मामले में निदेशकों की कुल संख्या का कम से कम एक तिहाई स्वतंत्र निदेशकों के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए.
ईशा-आकाश और अनंत निभाएंगे ये रोल
अब जैसे कि मुकेश अंबानी ने ऐलान किया है कि उनके बच्चे ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी रिलायंस बोर्ड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर यानी गैर- कार्यकारी निदेशक के तौर पर शामिल होने जा रहे हैं, तो यहां ये जान लेना बी जरूरी है कि इन Non-Executive Director की बोर्ड में क्या भूमिका होती है. बता दें कि ये निदेशक दिन-प्रतिदिन के मैनेजमेंट में हिस्सा नहीं लेते हैं.
कंपनी के निदेशक मंडल में गैर-कार्यकारी निदेशक (NED) कार्यकारी लोगों के साथ कंपनी के प्रबंधन और संचालन में भाग नहीं लेते हैं, लेकिन कंपनी को लेकर जो नीतियां और योजनाएं बनाई जाती है, उनके निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. एक ओर जहां कार्यकारी निदेशक कंपनी के वेतनभोगी कर्मचारी की तरह होते हैं, जबकि गैर-कार्यकारी निदेशकों को उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए पारिश्रमिक के रूप में सेवा शुल्क मिलता है.