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क्या है New Wage Code? जानें- जॉब करने वालों की जेब पर कैसे डालेगा असर?

कई दिनों से केंद्र सरकार new wage code नोटिफिकेशन लागू करने के लिए तारीख पर तारीख दे रही है. कारण है, कई राज्यों की तरफ से new wage code notification को लेकर कोई ड्राफ्ट रूल्स नहीं भेजे गए हैं, जिसके वजह से मामला अटका हुआ नजर आ रहा है.

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new wage code
new wage code
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सैलरीड लोगों के सैलरी स्ट्रक्चर पर दिखेगा असर
  • नियम लागू हुआ तो टेक होम सैलरी पर असर पड़ेगा

कई दिनों से केंद्र सरकार new wage code नोटिफिकेशन लागू करने के लिए तारीख पर तारीख दे रही है. कारण है, कई राज्यों की तरफ से new wage code notification को लेकर कोई ड्राफ्ट रूल्स नहीं भेजे गए हैं, जिसके वजह से मामला अटका हुआ नजर आ रहा है. पहले ये कहा जा रहा था कि अप्रैल 2021 से new wage code नोटिफिकेशन लागू होगा. लेकिन फिर कहा गया कि जुलाई में लागू हो सकता है. लेकिन अब ये माना जा रहा है कि सब कुछ राज्यों की तरफ से सही रहा तो 1 अक्टूबर से केंद्र सरकार इसे लागू कर सकती है. लेकिन अब उसमें भी अटकलें साफ नजर आती दिख रही हैं.

शुक्रवार को New Wage Code को लेकर श्रम मंत्रालय की बैठक की तैयारी भी है, जिसमें फैसला हो सकता है. लेकिन, ये तो बात हुई की नए वेज कोड को लागू होने में कितना समय है. इन सबसे हटके देखा जाए तो क्या आपको पता है कि ये new wage code क्या है और एक नौकरी पेशे को इससे क्या फायदा मिल सकता है? साथ ही, ऐसी कौन सी वजह है जिससे राज्यों को new wage code के सभी 4 कोड से जुड़े ड्राफ्ट पेश करने में दिक्कत आ रही हैं. एक आम आदमी जो नौकरी करता है, उसे इस कोड से क्या वाकई फायदा होगा?

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आखिर क्या है न्यू वेज कोड?

केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए वेतन कोड (New Wage Code) को तैयार किया है. इन 4 कोड में मजदूरी पर कोड, औद्योगिक संबंध पर कोड, व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य (OSH), सामाजिक सुरक्षा संहिता पर कोड शामिल हैं. साल 2019 के अनुसार, किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन कंपनी की लागत (Cost to Company-CTC) के 50 फीसदी से कम नहीं हो सकता है. कई कंपनियां अपने बोझ को कम करने के लिए मूल वेतन में कटौती करती है और ऊपर से भत्ता देती है. जिससे कर्मचारियों को देखा जाए तो नुकसान होता है. न्यू वेज कोड के लागू होने से वेतन भोगियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.

क्या होगा बदलाव- 

सैलरी स्ट्रक्चर में होगा बदलाव: New Wage Code, 2019 के लागू होने से सैलरीड लोगों के सैलरी स्ट्रक्चर यानी की टेक होम सैलरी पर असर पड़ेगा और पूरा बदल जाएगा. नए कोड के तहत भत्तों की सीमा 50% होगी यानी की बेसिक सैलरी को कुल वेतन का आधा रखा जाएगा. बेसिक सैलरी के बढ़ने से पीएफ ज्यादा कटेगा, जो हमारे भविष्य के लिए अच्छा होगा. क्योंकि पोस्ट रिटायरमेंट पूंजी के तौर पर ज्यादा रकम मिलेगी. इसके अलावा ग्रेच्युटी में योगदान भी बढ़ेगा. नया वेतन कोड असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भी लागू होगा. इसके साथ ही, वेतन और बोनस से संबंधित नियम बदलते हुए हर उद्योग और क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में एक समान होगी.

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हमने कुछ लोगों से बात करके जानने की कोशिश की वो नये वेज कोड अगर आएगा तो खुश होंगे या नहीं- संतोष अग्रवाल जो एक निजी कंपनी में कार्य करते हैं उनका कहना है कि सरकार कि इस कदम से मैं खुश हूं, क्योंकि टेक होम में जितनी भी सैलरी आती है वो खर्च हो जाती है. किसी न किसी बहाने से सेविंग होगी. जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, उसे देखते हुए आपके हाथ में जितने पैसे आएंगे वो खर्च होंगे ही. इसलिए अगर नया वेतन कोड आता है तो ये अच्छी बात होगी.

छुट्टियों में बदलाव: साथ ही, नए वेज कोड लागू होने पर कर्मचारियों के जितने भी अर्जित अवकाश यानी की अर्न्ड लीव है, वो 240 से बढ़कर 300 करने का प्रावधान है.

ओवरटाइम में बदलाव: इसके अलावा, 30 मिनट की गिनती करके 15 से 30 मिनट के बीच ज्यादा काम करने को ओवरटाइम से शामिल किया जा सकता है. फिलहाल, 30 मिनट से कम समय को ओवरटाइम में लागू नहीं किया गया है. ड्राफ्ट नियम के अनुसार किसी भी कर्मचारी से 5 घंटे से ज्यादा लगातार कोई भी कंपनी काम नहीं करा सकती है. हर कंपनी को 5 घंटे के बाद आधे घंटे का ब्रेक देना अनिवार्य हो जाएगा.

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वर्किंग आवर में बदलाव: नए वेज कोड के मुताबिक ये भी बोला जा रहा है कि काम करने के घंटे को 12 घंटे कर दिए जाएंगे. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुताबिक, प्रस्तावित नए वेज कोड में कर्मचारियों को हर हफ्ते 48 घंटे काम करना का ही प्रावधान रखा गया है. वहीं, अगर कोई भी कर्मचारी हर दिन 8 घंटे काम करता है तो उसे हफ्ते में 6 दिन काम करना होगा और हफ्ते में 1 दिन की ही छुट्टी मिलेगी. लेकिन, कोई अगर हर दिन 12 घंटे काम करता है तो उसे हफ्ते में 3 दिन की छुट्टी का प्रावधान है. इसमें ये भी नियम है कि कर्मचारी और कंपनी पहले से ही आपस में सहमत हो.

वहीं, प्रीति कौशल जो सरकारी कर्मचारी हैं, कहती हैं कि-वर्किंग आवर से कुछ लोग को फर्क पड़ेगा. लेकिन, जिनका काम डेली वेजेस और मजदूरी का है उन्हें इतना फर्क होगा. अगर कंपनियां आपसी सहमति से वर्किंग आवर को बदलती है तो काम करने का ढंग बदल सकता है.

हर इंडस्ट्री और प्रकार के वर्कर्स को न्यूनतम मजदूरी देना अनिवार्य होगा और समानता भी आएगी. साथ ही, सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रोविडेंट फंड की सुविधा का प्रावधान है. संगठित और असंगठित क्षेत्र के सभी कर्मचारियों को ईएसआई (ESI) का कवर मिलेगा. महिलाओं के लिए भी हर तरह के कारोबारों में कार्य करने की सुविधा और इजाजत मिलेगी, जिनमें शिफ्ट्स भी लागू होंगे.

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टेक होम सैलरी में कटौती, लेकिन...

नए वेज कोड के लागू होने से टेक होम सैलरी में कटौती जरूर होगी क्योंकि पीएफ, ग्रैच्यूटी सभी का हिस्सा आपकी बेसिक सैलरी से काटा जाएगा. लेकिन, इसके फायदे को देखें तो किसी भी कर्मचारी के पास अच्छी खासी सुरक्षित राशि जमा होगी. जिसका इस्तेमाल वो अपने पोस्ट रिटायरमेंट के साथ ही अन्य किसी जरूरत के कार्य में कर सकते हैं.

हालांकि केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर को ड्राफ्ट रूल्स नोटिफिकेशन जारी करने का लक्ष्य तय किया था. लेकिन राज्यों की तरफ से ड्राफ्ट रूल्स में आ रही देरी के कारण ऐसा तय समय पर नहीं हो पा रहा है. सरकार के लिए सभी राज्यों की तरफ से ड्राफ्ट रूल्स का जमा होना जरूरी है.

संदीप शर्मा, लेबर लॉ देखते हैं और पेशे से दिल्ली में वकील हैं उनके मुताबिक-पोस्ट कोविड राज्यों की अर्थव्यवस्था में सुधार काफी धीमी है. साथ ही, आर्थिक गतिविधियों में मंदी के वजह से राजस्व में कमी देखने को मिली है। ज्यादातर राज्यों की आर्थिक स्थिति फिलहाल पटरी पर नहीं आई है. कुछ राज्यों का मानना है कि नए वेज कोड की वजह से राज्यों पर अलग से खर्च भी आएगा. ऐसे में कुछ राज्यों द्वारा नए वेज कोड को लेकर ड्राफ्ट रूल्स जमा करना मुश्किल हो रहा है.'

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नए वेज कोड का नोटिफिकेशन जारी करना मुश्किल!

फिलहाल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर ने ड्राफ्ट रूल्स को केंद्र सरकार को जमा किया है. लेकिन, हरियाणा, मेघालय, छत्तीसगढ़, गोवा, सिक्किम, त्रिपुरा और झारखंड के ड्राफ्ट रूल्स अंतिम चरण में हैं. लेकिन केंद्र सरकार को भेजे नहीं गए हैं. वहीं इन राज्यों में से कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने चार कोड में से आखिरी कोड सामाजिक सुरक्षा संहिता का जिक्र ही नहीं है. ऐसे में केंद्र सरकार के लिए बिना सभी कोड के ड्राफ्ट के मौजूदगी में नए वेज कोड का नोटिफिकेशन जारी करना मुश्किल है. 1 अक्टूबर में अब दो दिन ही बचे हैं. ऐसे में सूत्रों की मानें तो श्रम मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को हो रही बैठक के बाद क्या तय होता है उसी से पता चलेगा कि किस तारीख को नए वेज कोड को लागू किया जाएगा.

झारखंड के लेबर कमिश्नर ए मुथ्थु के मुताबिक ड्राफ्ट तैयार हो गया है. ड्राफ्ट को सुझाव के लिए पब्लिक डोमेन में डाला गया है. जो भी सुझाव पब्लिक डोमेन से आएंगे जरूरत के मुताबकि उसे जोड़ा जाएगा. उसके बाद ही केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा.

अगर न्यू वेतन कोड लागू होता है तो देश के 74 साल के इतिहास में पहली बार कोई सरकार इस प्रकार से श्रम कानून में किसी तरह का बदलाव करेगी. सरकार का मानना है कि न्यू वेज कोड के कदम से नियोक्ता और श्रमिक दोनों को ही फायदा होगा.

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प्रोविडेंट फंड की सिक्योरिटी काफी ज्यादा

कपिल संखला, सीनियर सुप्रीम कोर्ट लॉयर के मुताबिक-केंद्रीय सरकार बहुत ही अच्छा कानून लेकर आ रही है. सभी भारत के कर्मचारियों के लिए अच्छा है, ये सोसाइटी के लिए भी एक अच्छा कदम है क्योंकि इसमें प्रोविडेंट फंड की सिक्योरिटी काफी ज्यादा है, साथ में ही माइग्रेंट वर्कर्स की सुरक्षा के लिए भी ये कानून बनाया गया है. वर्किंग आवर्स और छुट्टियों में भी काफी बदलाव लाया गया है, जो अच्छा और साहसिक क़दम है. लेबर फोर्स स्टेट लेवल पॉलिटिक्स में ग्रस्त रहती है और इसी वजह से गरीब रहती है. अगर मैं किसी बदलाव के बारे में सोचो तो मेरे हिसाब से श्रमिकों/मजदूरों के परिवार जनों को देखते हुए, कुछ इस तरह की व्यवस्था करनी चाहिए कि या तो वर्तमान छुट्टियों का ज्यादा फायदा उठा सके. जहां उसको फाइनेंशियल आजादी भी मिले या इस बीच वेज कोड में उसके परिवार बच्चों की देखरेख के कुछ ऐसे प्रावधान डाले जाएं जो एम्प्लॉयर की रिस्पांसिबिलिटी हो.' 

 

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