चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी कर दिए गए हैं. इन आंकड़ों में जून की तिमाही के मुकाबले रिकवरी जरूर मिली है लेकिन तकनीकी तौर पर इसे मंदी भी माना जा रहा है. हालांकि, सरकार का थिंक टैंक नीति आयोग इसे मंदी नहीं मानता.
तकनीकी मंदी का कोई मतलब नहीं
इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह तकनीकी मंदी नहीं है. यह सामान्य परिस्थितियां नहीं हैं. ऐसे में तकनीकी मंदी के बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है. राजीव कुमार ने कहा कि हम संकट के दौर से बाहर आ रहे हैं. दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ अनुमान निगेटिव में 10 फीसदी तक था, जो 7.5 फीसदी रह गया है. उपभोक्ता मांग में भी ग्रोथ है, जो बहुत अच्छा संकेत है.
क्यों कही जा रही मंदी?
दरअसल, वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी यानी सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव में 7.5 फीसदी रही है. वित्त वर्ष की पहली यानी जून की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 24 फीसदी की भारी गिरावट आ चुकी है. लगातार दो तिमाही में निगेटिव ग्रोथ को तकनीकी तौर पर मंदी माना जाता है.
जनवरी-मार्च तिमाही में ग्रोथ की उम्मीद
वहीं, कोर सेक्टर के उत्पादन में लगातार आठवें महीने गिरावट पर राजीव कुमार ने कहा कि लंबे समय तक संकुचन नहीं होगा. कोर सेक्टर में भी उर्वरक और बिजली पॉजिटिव ग्रोथ दिखा रहे हैं. बता दें कि कोर सेक्टर का उत्पादन इस बार अक्टूबर महीने में एक साल पहले की तुलना में 2.5 प्रतिशत घट गया. यह लगातार आठवां महीना है, जब इन क्षेत्रों का उत्पादन कम हुआ हो.
नए साल में उम्मीद
खपत में गिरावट पर राजीव कुमार ने कहा कि त्योहारों के कारण अक्टूबर एक बेहतर महीना था. मुझे यकीन है कि जनवरी-मार्च तिमाही में पॉजिटिव ग्रोथ देखने को मिलेगी. आप पैसे ट्रांसफर करके खपत नहीं बढ़ा सकते. सरकार इस मुद्दे को उचित तरीके से हैंडल कर रही है.
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कोरोना काल में भी चीन के पॉजिटिव ग्रोथ को लेकर नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि हमने जीवन और आजीविका के बीच सही संतुलन कायम किया है. चीन एक रहस्य है. बता दें कि चीन ने दूसरी तिमाही में 4.9 फीसदी ग्रोथ दर्ज की है, जो दुनिया का एकमात्र देश है.