Northern Railway Profit by Scrap: रेलवे कबाड़ को बेचकर हर साल राजस्व अर्जित करता है. उत्तर रेलवे (Northern Railway) ने कबाड़ से कमाई करने में नया रिकॉर्ड बनाया है. रेलवे ने एक साल में 624 करोड़ रुपये का कबाड़ यानी स्क्रैप (Scrap) बेचा है, जो पिछले कई वर्षों से अधिक है.
लक्ष्य से कई गुना अधिक मुनाफा
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, उत्तर रेलवे ने 624 करोड़ का कबाड़ बेचकर जो रिकॉर्ड बनाया है वह पिछले साल की तुलना में 40% अधिक है. बता दें कि उत्तर रेल ने 370 करोड़ के स्क्रैप बेचने का लक्ष्य रखा था लेकिन 624 करोड़ का कबाड़ बेचकर 69% अधिक राजस्व हासिल किया है.
दरअसल, रेल मंत्रालय हर जोन के लिए कबाड़ के निस्तारण का एक लक्ष्य रखता है. उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने बताया कि उत्तर रेलवे पहला ऐसा जोन है, जिसमें सितम्बर 2021 में 200 करोड़ रुपये, अक्टूबर 2021 में 300 करोड़ रुपये, दिसंबर 2021 में 400 करोड़ रुपये, फरवरी 2022 में 500 करोड़ रुपये और मार्च 2022 में 600 करोड़ रुपये के आंकड़े को छुआ. उत्तर रेलवे ने मंत्रालय द्वारा तय किए गए निर्धारित लक्ष्य को नवंबर 2021 में ही हासिल कर लिया था.
भारतीय रेलवे (Indian Railway) पर स्क्रैप का निपटान एक महत्वपूर्ण गतिविधि है. राजस्व अर्जित करने के साथ-साथ यह कार्य परिसरों को साफ-सुथरा रखने में भी मदद करता है. किनारे पड़े पटरियों के टुकड़े, स्लीपर, टाई बार, आदि की मौजूदगी से न केवल संरक्षा संबंधी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं, बल्कि यह लोगों को देखने में भी साफ-सुथरा नहीं लगता.
उत्तर रेलवे (Northern Railway) ने 8 स्थानों से 592 ई-नीलामियां करके एक लाख मीट्रिक टन से अधिक लोहे के स्क्रैप को बेचा था. इसमें 70 हजार मीट्रिक टन का रेल स्क्रैप, 850 मीट्रिक टन लौह स्क्रैप, 1930 मीट्रिक टन लीड एसिड बैट्री, 201 मीट्रिक टन से अधिक ई-कचरा, 250 से अधिक सेवा से हटाए गए रोलिंग स्टॉक, रेलपथों के किनारे पड़े 1.55 लाख कंक्रीट स्लीपर बेचकर 624 करोड़ के लक्ष्य को हासिल किया है, जो एक बड़ा रिकॉर्ड है.