नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की पूर्व प्रबंध निदेशक और कार्यकारी अधिकारी चित्रा रामकृष्ण (Chitra Ramkrishna) को NSE Co-location मामले में पूरे नौ महीने बाद आखिरकार जमानत मिल गई. दिल्ली में राउज एवेन्यू स्थित विशेष ट्रायल कोर्ट ने जमानत को मंजूरी दी है. चित्रा को ये जमानत एनएसई कर्मचारियों की कथित तौर पर अवैध फोन टैपिंग के मामले में दी गई है. हालांकि, जमानत के बाद भी वे जेल में ही रहेंगी, क्योंकि हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा हुआ है.
इन शर्तों पर दी गई जमानत
सीबीआई (CBI) की विशेष जज सुनैना शर्मा (Sunaina Sharma) ने चित्रा रामकृष्ण को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही रकम के दो जमानती पेश करने पर रिहाई का आदेश दिया है. गौरतलब है कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने छह मार्च 2022 को NSE की पूर्व एमडी और सीईओ को एक्सचेंज में हेर-फेर के एक मामले में गिरफ्तार किया था. सीबीआई ने एनएसई के पूर्व ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (GOO) आनंद सुब्रमण्यम को चेन्नई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था और दावा किया था कि वही हिमालयन योगी हैं, जिसके इशारे पर रामकृष्ण काम करती थीं.
चित्रा पर लगे हैं गंभीर आरोप
Chitra Ramkrishna अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक एनएसई की एमडी और सीईओ थी. उन पर अपने कार्यकाल के दौरान कथित हिमालयन योगी के इशारे पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का संचालन करने और संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है. इस संबंध में जांच करते हुए चित्रा और आनंद सुब्रमण्यम समेत अन्य लोगों की गिरफ्तारी की गई थी. आनंद सुब्रमण्यम पर गंभीर आरोप हैं कि वह एनएसई के कामकाज में दखल देते थे. इसके साथ ही उन पर कर्मचारियों के फोन टैपिंग का भी आरोप लगाया गया है.
मामले में गिरफ्तार संजय पांडे को भी राहत
एनएसई को-लोकेशन घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पहले मुंबई के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी संजय पांडे को गिरफ्तार किया गया था. संजय पांडे पर आरोप है कि उनकी कंपनी आई सिक्योरिटी के पास साल 2010 से साल 2015 तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सिक्योरिटी ऑडिट करने का काम था. इसी दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में को-लोकेशन घोटाला हुआ था. रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष न्यायाधीश सुनैना शर्मा ने पांडे को भी यह कहते हुए राहत दी है कि वह पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में हाईकोर्ट से जमानत पर हैं. पांडे को सीबीआई सितंबर 2022 में गिरफ्तार किया था.
क्या है NSE को-लोकेशन स्कैम?
शेयर खरीद-बिक्री के केंद्र देश के प्रमुख नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कुछ ब्रोकरों को ऐसी सुविधा दे दी गई थी, जिससे उन्हें बाकी के मुकाबले शेयरों की कीमतों की जानकारी कुछ पहले मिल जाती थी. इसका लाभ उठाकर वे भारी मुनाफा कमा रहे थे. धांधली करके अंदरूनी सूत्रों की मदद से उन्हें सर्वर को को-लोकेट करके सीधा एक्सेस दिया गया था. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड को इस संबंध में एक अज्ञात सूचना मिली थी, जिसके बाद इस मामले में जांच शुरू की गई थी.