scorecardresearch
 

Chitra Ramkrishna NSE Himalayan Yogi: अज्ञात योगी के इशारे पर ऐसे चल रहा था शेयर बाजार! फिल्मी है पूरी कहानी

सेबी ने गलत तरीके से फैसले लिए जाने की शिकायत पर एनएसई की जांच शुरू की. यह जांच 6 साल चली और पिछले सप्ताह सेबी का ऑर्डर आया. सेबी के 190 पन्नों के इस ऑर्डर में ऐसी बातें सामने आई हैं कि होश उड़ जाएं. इस स्टोरी में सेबी के ऑर्डर का निचोड़ पढ़िए...

Advertisement
X
अज्ञात योगी के इशारे पर चल रहा था एनएसई
अज्ञात योगी के इशारे पर चल रहा था एनएसई
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अज्ञात योगी के इशारे पर हो रहे थे NSE के सारे फैसले
  • सबसे बड़े शेयर बाजार में 3 साल तक चला गोरखधंधा
  • जांच करने में सेबी को लगे 6 साल, तब आया ऑर्डर

एनएसई (NSE) भारत का सबसे बड़ा शेयर बाजार (Share Market) है, जिसमें रोजाना 49 करोड़ ट्रांजेक्शन होते हैं. एनएसई का एक दिन का टर्नओवर 64 हजार करोड़ रुपये है. हर रोज बड़ी संख्या में इन्वेस्टर्स (Investors) इस मार्केट पर ट्रेड करते हैं. इन सब के बाद अगर यह बताया जाए कि इतना बड़ा शेयर बाजार कई साल तक एक अज्ञात योगी के इशारे पर चल रहा था, तो लोग शायद यकीन ही न करें. हालांकि यह सच है और बाजार नियामक सेबी की जांच में साबित हो चुका है. यह पूरा वाकया इतना नाटकीय है कि किसी फिल्म की कहानी की तरह मालूम पड़ता है.

Advertisement

ऐसे अजूबे काम, कर देंगे हैरान

इस कहानी में कई हैरान करने वाली बातें हैं. एक आदमी को नौकरी देने के लिए नया पद ही बना दिया गया. महज 15 लाख रुपये की सैलरी वाले इंसान को 1.38 करोड़ रुपये के पैकेज पर रखा गया, वो भी तब जबकि उसके पास पद के लिए जरूरी पात्रता नहीं थी. उसे हर साल प्रमोशन मिलता रहा और महज 3 साल में उसे ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (GOO) बना दिया गया. उसे हर रोज ऑफिस भी आने की जरूरत नहीं पड़ती थी. महज 3 दिन ऑफिस आने के बाद वह अपनी मर्जी से एनएसई का काम करता था. एक ऐसे योगी के इशारे पर एनएसई के सारे फैसले लिए जा रहे थे, जिसे न तो किसी ने कभी देखा और न ही कोई उससे कभी मिला.

Advertisement

इन 3 पात्रों की है ये फिल्मी कहानी

एनएसई में रची गई इस रियल फिल्मी स्टोरी के तीन पात्र हैं. पहली और सबसे अहम पात्र एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्णा (Chitra Ramkrishna) हैं. दूसरा पात्र अपनी शर्तों पर नौकरी का आनंद उठाने वाला आनंद सुब्रमण्यम (Anand Subramanian) है. तीसरा पात्र अदृश्य और अज्ञात योगी है, जो कथित तौर पर हिमालय में विचरण करता है और चित्रा के हिसाब से सिद्ध पुरुष है. चित्रा 2013 से 2016 के दौरान एनएसई की सीईओ रही और इस दौरान शेयर बाजार के सारे बड़े-छोटे फैसले अज्ञात योगी के इशारे पर होते रहे.

6 साल चली जांच, 190 पन्नों का ऑर्डर

इस कहानी में झोल भी इतने हैं कि सेबी को जांच करने में 6 साल लग गए. लंबी जांच के बाद सेबी ने पिछले सप्ताह शुक्रवार को 190 पन्नों वाला ऑर्डर जारी किया. सेबी ने एनएसई में गलत तरीके से संचालन और गलत कामों की शिकायत मिलने के बाद जांच की शुरुआत की थी. सेबी ने चित्रा रामकृष्णा पर 3 करोड़ रुपये और आनंद सुब्रमण्यम पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगा दिया. कई लोग मानते हैं कि सुब्रमण्यम ही अज्ञात योगी है और इस तरह से वह अपने मनमाकिफ तरीके से चित्रा को कंट्रोल कर रहा था. एनएसई ने भी सेबी को सौंपी दलील में यह तर्क दिया है और मानवीय व्यवहारों के एक्सपर्ट की राय का हवाला दिया है. हालांकि सेबी ने इस आरोप को सही नहीं माना.

Advertisement

करोड़ों का पैकेज और ऑफिस आने की भी नहीं थी जरूरत

सेबी के आदेश के अनुसार, 2013 में एनएसई की तत्कालीन सीईओ एंड एमडी चित्रा रामकृष्णा ने आनंद सुब्रमण्यम को चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर (COO) के पद पर हायर किया. एनएसई में पहले से ऐसा कोई पद नहीं था. आनंद सुब्रमण्यम एनएसई में आने से पहले सरकारी कंपनी Balmer Lawrie में काम कर रहा था और उसकी सैलरी 15 लाख रुपये थी. एनएसई में उसे 9 गुना से भी ज्यादा बढ़ाकर 1.38 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया. इसके बाद उसे लगातार प्रमोशन मिला और वह ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर बन गया. चित्रा ने आनंद को 5 दिन ऑफिस आने से भी छूट दी थी. उसे महज 3 दिन ऑफिस आना पड़ता था. चित्रा ने ये सारे फैसले अज्ञात योगी के कहने पर लिए थे, जिससे वह ईमेल के जरिए संपर्क करती थी.

योगी को ईमेल पर दी जा रही थी ये जानकारियां

चित्रा ने सेबी को योगी के बारे में बताया कि उनका कोई शरीर नहीं है और वह अपनी इच्छा से कोई भी रूप धारण कर सकते हैं. वह एक रूहानी ताकत हैं, जो हिमालय में विचरण करते हैं. चित्रा rigyajursama@outlook.com पर ईमेल भेजकर बातचीत करती थी. वह यहां तक कि एनएसई की संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां भी इस ईमेल पर भेजती थी. चित्रा ने अज्ञात योगी को जो जानकारियां दी, उनमें अगले 5 साल का फाइनेंशियल प्रोजेक्शन, डिविडेंड पे-आउट रेशियो, बिजनेस प्लान, एनएसई की बोर्ड मीटिंग का एजेंडा, एनएसई के कर्मचारियों के काम के रिव्यूज और अप्रेजल आदि भी शामिल हैं.

Advertisement

योगी बनकर चित्रा का फायदा उठा रहा था आनंद?

बहरहाल सेबी ने भले ही आनंद सुब्रमण्यम को अज्ञात योगी नहीं माना है, एनएसई की दलील में फिर भी दम लगता है. एनएसई ने सेबी को 2018 में एक पत्र के जरिए बताया था कि उसके लीगल एडवाइजर्स ने मनोविज्ञान के जानकारों की मदद ली है. इसके बाद इस नतीजे पर पहुंचा गया है कि आनंद सुब्रमण्यम ने ही अज्ञात योगी की आइडेंटिटी क्रिएट की थी. इस तरह से वह चित्रा रामकृष्णा का फायदा उठा रहा था. इस बात में इस कारण भी दम लगता है कि आनंद कथित तौर पर 22 साल से योगी को जान रहा था. योगी ने ही चित्रा को कहा था कि आनंद को नौकरी पर रखे और उसके ही कहने पर इतनी भारी-भरकम सैलरी दी गई. यहां तक कि योगी के एक ईमेल में आनंद को लेकर कहा गया है कि अगर धरती पर इंसान के रूप में पैदा होने का मौका मिलता तो इसके लिए आनंद का शरीर सबसे बेहतर होता.

कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप, व्हाइटपेपर लाने की मांग

सेबी का यह ऑर्डर सामने आते ही देश में राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार पर जमकर हमला बोला. पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सरकार को इस मामले पर व्हाइटपेपर लाना चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की चुप्पी पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, 303 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाले एनएसई को कोई बाबा चला रहा है. सेबी को पता ही नहीं है कि वो बाबा कौन है, कहा जा रहा है बाबा हिमालय पर रहते हैं. सेशेल्स घूमने, सी बाथ करने और बीच पर आराम फरमाने की बातें हो रही थी.

Advertisement

 

Advertisement
Advertisement