प्याज की कीमतें देश के आम आदमी के लिए काफी संवेदनशील मामला रही हैं. हर साल अक्टूबर-नवंबर में प्याज की कीमतों के बढ़ने से सरकारों के हाथ-पांव फूल जाते हैं. इस बार महाराष्ट्र के नासिक के साथ ही कर्नाटक में बारिश की वजह से प्याज की फसल को काफी नुकसान हुआ है. इसलिए इस बार केंद्र सरकार पहले से ही काफी चौकन्नी दिख रही है.
सरकार ने सोमवार को प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी है. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. देश के कई हिस्सों में बारिश और बाढ़ से प्याज की आपूर्ति चेन में व्यवधान आया था और इसकी कीमतें फिर बढ़ने लगी थीं. हालांकि अगस्त में थोक महंगाई के जो आंकड़े आये हैं, उसमें प्याज की कीमतों में गिरावट देखी गई है, इसके बावजूद सरकार ने निर्यात पर रोक लगाई है.
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस संबंध में सोमवार को अधिसूचना जारी की. इससे घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतें कम होंगी. अधिसूचना के मुताबिक, प्याज की सभी किस्मों के निर्यात को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है. यानी इस बार सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि कर्नाटक और अन्य राज्यों से आने वाली प्याज की किस्म का भी निर्यात रोक दिया गया है. महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात मुख्य प्याज उत्पादक देश हैं. देश के कुल प्याज पैदावार का 40 प्रतिशत खरीफ फसल के दौरान उत्पादित होता.
पिछले साल 120 रुपये तक पहुंचा था
गौरतलब है कि पिछले साल प्याज ज्यादातर शहरों में 90 से 100 रुपये किलो तक पहुंच गया था. कुछ शहरों में इसके भाव 120 रुपए किलो तक पहुंच गये थे. इसको लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को काफी हद तक घेरने की कोशिश की थी. इसलिए इस बार सरकार सतर्क है. राजधानी दिल्ली में प्याज 40 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रहा है. पिछले साल की तुलना में सरकार प्याज के दामों में बढ़ोतरी को लेकर तैयार थी और उसने करीब 1 लाख मीट्रिक टन प्याज स्टोर कर रखी है.
इस बार कर्नाटक से आई थी मुश्किल
देश में सबसे पहले प्याज की नई फसल कर्नाटक में तैयार होती है, लेकिन वहां कई हिस्सों में भारी बारिश से काफी फसल बर्बाद हो गई है. इससे प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी होने लगी थी. बारिश के कारण महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के शाजापुर जिलों में प्याज की आवक कम हुई है. आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर के महीनों में प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, क्योंकि नई फसल का इंतजार होता है, लेकिन इस बार महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में जबरदस्त और लगातार बारिश ने प्याज की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है और इसलिए कीमतें बेतहाशा बढ़ी हैं.