अमेरिका की ग्लोबल फॉर-कास्टिंग फर्म ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर पॉजीटिव नजरिया पेश किया है. फर्म ने भारतीय इकोनॉमिक को लेकर उम्मीद से ज्यादा रिकवरी का अनुमान जताया है. ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने कहा है कि दिसंबर में होने वाली मॉनीटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग (MPC) में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक दरों को होल्ड कर सकता है.
GDP पर RBI की नजर
दरअसल, ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि जिस तेजी से इकोनॉमी में रिकवरी देखने को मिल रही है, अब उम्मीद की जा रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में नरमी के रुख को छोड़ सकता है.
वैश्विक स्तर पर पूर्वानुमान लगाने वाली कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति औसतन 6 फीसदी से अधिक रहेगी और केंद्रीय बैंक दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों को यथावत रखेगा.
महंगाई दर एक चुनौती
रिपोर्ट कहती है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में कोविड-19 से पूर्व के उच्चस्तर पर पहुंच गई है. ईंधन को छोड़कर अन्य कैटेगरी में दाम बढ़े हैं. चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति अपने अधिकतम स्तर पर होगी और 2021 में हमें इसपर अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत होगी.
अंडों और सब्जियों के दाम चढ़ने से अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति करीब साढ़े 6 साल के उच्चस्तर 7.61 फीसदी पर पहुंच गई है. यह रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से कहीं अधिक है. सितंबर- 2020 में खुदरा मुद्रास्फीति 7.27 फीसदी पर थी.