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चीन के खिलाफ US के इस कदम से भारत को हुआ मामूली फायदा... इन देशों को ज्यादा लाभ!

India Business Data: ट्रेड डायवर्जन का सबसे बड़ा फायदा वियतनाम को हुआ है. इसका अमेरिकी आयात में कुल हिस्सा इस दौरान 1.7 फीसदी बढ़कर 3.7 परसेंट हो गया.

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Trade With China
Trade With China

अमेरिका (America) और चीन (China) के बीच की दुश्‍मनी दुनिया से छिपी नहीं है. दोनों में लंबे समय से ट्रेड वॉर (Trade War) जारी है. इसका फायदा उठाने के लिए तमाम देशों के साथ ही भारत ने भी अपने मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने का काम किया है. 

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 लेकिन, अब जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक भारत को अमेरिकी व्यापार में चीन की हिस्सेदारी घटने का मामूली फायदा मिला है. इस ट्रेड वॉर का भारत से ज्यादा फायदा दूसरे एशियाई देशों ने उठाया है. 

अमेरिका-चीन में तनातनी 

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की स्टडी (Oxford Economics Study) में दावा किया गया है कि 2017 और 2023 के बीच अमेरिकी आयात में भारत की कुल हिस्सेदारी 0.6 परसेंटेज प्वाइंट्स बढ़कर 2.7 फीसदी हो गई, जबकि इस दौरान चीन का हिस्सा करीब 8 फीसदी घटकर 14 परसेंट से कम रह गया. यानी चीन को जितना नुकसान हुआ है भारत को उसका मामूली फायदा ही हाथ आया है. 

ट्रेड डायवर्जन का सबसे बड़ा फायदा वियतनाम को हुआ है. इसका अमेरिकी आयात में कुल हिस्सा इस दौरान 1.7 फीसदी बढ़कर 3.7 परसेंट हो गया. ताइवान और दक्षिण कोरिया ने भी अमेरिकी आयात में अपनी हिस्सेदारी 1 फीसदी और 0.7 फीसदी बढ़ाकर भारत से बेहतर प्रदर्शन किया है. 

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इस स्टडी से साफ हो गया है कि देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को अभी अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए काफी काम करना होगा. चिंता की बात है कि देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का GDP में हिस्सा एक दशक से भी ज्‍यादा समय से 17 परसेंट पर स्थिर है.

चीन के साथ भारत का बड़ा व्यापार

रिसर्च में कहा गया है कि अगर डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने और चीनी सामानों पर 60 फीसदी टैरिफ लगाते हैं तो भी भारत को इस बाजार में अपना हिस्सा बढ़ाने में मुश्किल हो सकती है.

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुताबिक भारत की निर्यात शक्ति पुरानी अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में है, जहां विकास की संभावना सीमित हैं और मुकाबला जबरदस्त है. भारत ने अमेरिका को इलेक्ट्रॉनिक निर्यात को बढ़ावा देने में काफी तरक्की की है. लेकिन, चीन से पार्ट्स का आयात भी बढ़ा है, जिससे पता चलता है कि घरेलू मैन्‍यूफैक्‍चरिंग में बहुत कम वैल्यू एडिशन हुआ है. 

ऑक्सफोर्ड के मुताबिक 2023 में इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरीस, केमेकल और फार्मा के भारत के आयात का करीब एक तिहाई हिस्सा चीन का था. सेमीकंडक्टर्स जैसे इंस्ट्रूमेंट्स की वजह से भारत का 67 फीसदी आयात चीन से हुआ. इसमें कहा गया है कि चीन में एफडीआई प्रवाह कम होने के बावजूद भारत वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक बड़ा हिस्सा आकर्षित करने में सक्षम नहीं है.    

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