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किसान रेलः चलता- फिरता कोल्ड स्टोरेज, महाराष्ट्र से बंगाल तक ढोएगी पार्सल, जानें खासियत

100वीं किसान रेल महाराष्ट्र के सांगोला से पश्चिम बंगाल के शालिमार तक चलेगी. 2132 किमी की दूरी यह ट्रेन 40 घंटे से कम समय में तय करेगी. इस ट्रेन के द्वारा संगोला के अनार, नागपुर के संतरे तथा जेउर, बेलवंडी, कोपरगांव के खरबूजा पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर तक पहुंचेंगे. 

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आज हुई 100वीं किसान रेल की शुरुआत (फाइल फोटो: PIB)
आज हुई 100वीं किसान रेल की शुरुआत (फाइल फोटो: PIB)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 100वीं किसान रेल की हुई शुरुआत
  • 5 महीने से कम समय में 100वीं ट्रेन
  • अगस्त में ऐसी पहली ट्रेन चली थी

भारतीय रेलवे ने इसी साल 7 अगस्त को किसान रेल की शुरुआत की थी. उसके बाद से सिर्फ 5 महीने के भीतर अब 100वीं किसान रेल को पीएम मोदी ने आज हरी झंडी​ दिखाई. आइए जानते हैं कि क्या है इस ट्रेन की खासियत और यह क्यों है महत्वपूर्ण?

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100वीं किसान ट्रेन कहां से कहां तक 

100वीं किसान रेल आज पीएम मोदी के हरी झंडी दिखाए जाने के बाद रवाना की गई. यह महाराष्ट्र के सांगोला से पश्चिम बंगाल के शालिमार तक चलेगी. 2132 किमी की दूरी यह ट्रेन 40 घंटे से कम समय में तय करेगी. इस ट्रेन के द्वारा संगोला के अनार, नागपुर के संतरे तथा जेउर, बेलवंडी, कोपरगांव के खरबूजा पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर तक पहुंचेंगे. इस ट्रेन से फलों-सब्जियों जैसे ऐसे आइटम की ढुलाई की जाती है जो जल्दी खराब हो जाते हैं.

फल-सब्जियों की ढुलाई में किसानों को 50% छूट

रेल मंत्रालय ने अक्टूबर में ऐलान किया था कि किसान रेल में फल-सब्जियों की ढुलाई में 50 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी. यह सब्सिडी ऑपरेशन ग्रीन-टॉप टू टोटल (Operation Green-TOP to Total) योजना के तहत दी जा रही है. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि सब्जियों व फलों को किसान रेल द्वारा ट्रांसपोर्ट करने में सब्सिडी को 50% कर दिया गया है.

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आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने पायलट आधार पर छह महीने के लिए ऑपरेशन ग्रीन योजना का विस्तार कर टमाटर, प्याज और आलू (टॉप) से लेकर सभी फल एवं सब्जियों (टोटल) को इसके दायरे में लाने की घोषणा की थी. 

 इसे देखें: आजतक LIVE TV 

पहली ट्रेन महाराष्ट्र से बिहार तक कहां से कहां तक

ऐसी पहली ट्रेन इस साल 7 अगस्त को महाराष्ट्र से बिहार तक के लिए चली थी. यह ट्रेन महाराष्ट्र के देवलाली स्टेशन से बिहार के दानापुर स्टेशन तक जाती है. यह अपनी यात्रा में करीब 32 घंटे लगाती है. रेलवे मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के इसकी शुरुआत की थी. 

क्या है खासियत

किसान रेल में रेफ्रिजरेटेड कोच लगे होंगे. इसे रेलवे ने 17 टन की क्षमता के साथ नए डिजायन के रूप में निर्मित करवाया है. इसे रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में बनाया गया है. इस ट्रेन में कंटेनर फ्रीज की तरह होते हैं. मतलब यह एक चलता-फिरता कोल्ड स्टोरेज होता है, इसमें किसान खराब होने वाले सब्जी, फल, फिश, मीट, मिल्क आदि रख सकते हैं. 

इससे सब्जियों, फलों, मांस, मछली और दूध जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों को इनके पैदावार वाले इलाकों से उन इलाकों में पहुंचाया जाएगा जहां इनका अच्छा बाजार है.

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बजट में हुआ था ऐलान

दरअसल, केंद्र से साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है. इसी कड़ी में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में बजट भाषण के दौरान ऐलान किया था कि किसान फल-सब्जी देश के उन शहरों में बेच सकते हैं, जहां उन्हें उसकी अच्छी कीमत मिलेगी. इसके लिए किसान रेल चलाई जाएगी. इस सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) योजना के तहत शीत भंडारण के साथ किसान उपज के परिवहन की व्यवस्था होगी.

सबसे पहले ममता बनर्जी ने रखा था प्रस्ताव

एयरकंडीशनिंग की सुविधा के साथ फल एवं सब्जियों को लाने ले जाने की सुविधा का प्रस्ताव पहली बार 2009-10 के बजट में उस समय रेल मंत्री रहीं ममता बनर्जी ने किया था, लेकिन इसकी शुरुआत नहीं हो सकी.


 

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