बैंक खातों में एक तय न्यूनतम रकम रखने की शर्त ज्यादातर बैंक रखते हैं. जो लोग इस बैलेंस को बरकरार रखने में चूक जाते हैं उनसे बैंक पेनॉल्टी के तौर पर एक फिक्स रकम वसूलते हैं. अब संसद में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जो जानकारी दी है, उससे बीते 5 साल के दौरान ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस पेनॉल्टी के तौर पर वसूली गई रकम का आंकड़ा निकलकर सामने आया है.
इसके मुताबिक देश के सरकारी बैंकों ने बीते पांच साल में न्यूनतम बैलेंस जुर्माने के तौर पर ग्राहकों से साढ़े 8 हजार करोड़ रुपये वसूले हैं. ये रकम 2019-20 से लेकर 2023-24 के दौरान बैंकों को मिली है. हालांकि यहां ये जानना दिलचस्प है कि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI ने 2019-20 से ही मिनिमम बैलेंस पेनॉल्टी वसूलना बंद कर दिया था. लेकिन SBI के इस वसूली को बंद करने के बावजूद पिछले 5 साल में सरकारी बैंकों की मिनिमम बैलेंस पेनल्टी 38 फीसदी बढ़ गई है.
SBI नहीं वसूलता जुर्माना
सरकारी बैंकों का मिनिमम बैलेंस पेनॉल्टी को कैलकुलेट करने का तरीका अलग-अलग है. जानकारी के मुताबिक 11 सरकारी बैंकों में से छह ने मिनिमम क्वार्टरली एवरेज बैलेंस मेंटेन नहीं करने पर ग्राहकों से पेनॉल्टी वसूली है, जबकि चार बैंकों ने मिनिमम एवरेज मंथली बैंलेस नहीं होने की वजह से ग्राहकों पर जुर्माना लगाया है.
ग्राहकों के लिए मिनिमम बैलेंस की लिमिट शहरों और गांवों में अलग-अलग है. मिसाल के तौर पर पंजाब नेशनल बैंक के शहरी ग्राहकों के लिए सेविंग्स अकाउंट में न्यूनतम तिमाही औसत बैलेंस 2 हजार रुपये है, जबकि कस्बों के लिए ये 1 हजार रुपये और गांवों के लिए 500 रुपये है. मिनिमम बैलेंस नहीं होने पर शहरों में 250 रुपये, कस्बों में 150 रुपये और गांवों में 100 रुपये तक काटे जा सकते हैं.
संसद में दी गई जानकारी
अगर बात करें देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI के बारे में तो बैंक ने 2019-20 में मिनिमम बैलेंस पेनॉल्टी से 640 करोड़ रुपये कमाए थे लेकिन उसके बाद बैंक ने ये नियम खत्म कर दिया. वहीं 2023-24 में पंजाब नेशनल बैंक ने इस पेनॉल्टी से 633 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 387 करोड़ रुपये, इंडियन बैंक ने 369 करोड़ रुपये, केनरा बैंक ने 284 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ इंडिया ने 194 करोड़ रुपये कमाए.
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने ये जानकारी देते हुए कहा है कि बैंकों को खाता खोलते समय ग्राहकों को न्यूनतम जमा रकम के बारे में बताना चाहिए. इसके साथ ही अगर ग्राहक न्यूनतम बैलेंस को मेंटेन नहीं करता है तो बैंकों को जुर्माने के बारे में ग्राहक को बताना चाहिए.