भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने दिसंबर में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) में शामिल हुए थे. इसके बाद कयास लगने शुरू हो गए थे कि क्या रघुराम राजन सियासत में एंट्री करने वाले हैं. रघुराम राजन ने फिलहाल राजनीति में अपनी एंट्री के कयासों को खारिज कर दिया है. रघुराम राजन ने कहा कि उन्होंने एक 'चिंतित नागरिक' के रूप में भारत जोड़ों यात्रा भाग लिया था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ रघुराम राजन की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थी.
क्यों शामिल हुए थे रघुराम राजन?
रघुराम राजन ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल-गांधी के नेतृत्व वाली यात्रा में एक नौकरशाह या फिर अर्थशास्त्री के रूप में भाग नहीं लिया था. बल्कि एक जागरूक और चिंतित नागरिक के रूप में भाग लिया था. 2 जनवरी को एक लिंक्डइन पोस्ट में राजन ने कहा कि वह प्रतिबद्ध नागरिकों को अपना समर्थन देने के लिए कुछ मील चले, जो 'राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए भारत भर में चल रहे हैं.'
'भारत को कमजोर किया जा रहा'
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि जैसा कि हम आने वाले वर्ष के लिए अपने संकल्पों को बनाते हैं. हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम सभी को उस भारत को संरक्षित करने की आवश्यकता है, जिसे हम प्यार करते हैं.' आरबीआई के पूर्व प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत को एक देश के रूप में बहुसंख्यक पॉपुलिस्ट लोगों द्वारा कमजोर किया जा रहा है. ये लोग अविश्वास और बंटवारा बोते हैं. वे बहुसंख्यक समुदाय को ऐतिहासिक गलतियों का बदला लेने के लिए उकसाते हैं, जिसके लिए आज कोई भी जिम्मेदार नहीं है. यहां तक कि सत्ता को केंद्रीकृत करते हुए डेटा और आलोचना को दबाते हैं.
'अच्छाई के लिए अपार संभावनाएं'
राजन ने यह भी कहा कि देश की ताकत इसकी तर्कपूर्ण बहसों में निहित है, जो हर किसी को यह महसूस कराती है कि उन्होंने योगदान दिया. उन्होंने आगे बताया कि शालीनता, सहिष्णुता, आपसी सम्मान और संवाद का समर्थन करने के लिए अपनी आवाज का इस्तेमाल करते हुए भारत में अच्छाई के लिए अपार संभावनाएं हैं.
वैश्विक विकास में बड़ा योगदान कर सकता है भारत
पोस्ट में कहा गया है सटीक आंकड़ों के आधार पर बहस और ठोस आर्थिक नीतियां भारत को आने वाले दशकों में वैश्विक विकास में एक बड़ा योगदान करने वाला बना सकती हैं. इससे पहले आरबीआई के पूर्व प्रमुख ने राहुल गांधी के साथ एक इंटरव्यू में कहा था कि 2023 भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ बाकी दुनिया के लिए भी कठिन होगा. उन्होंने कहा था कि देश अगर अगले साल 5 प्रतिशत की विकास दर हासिल करता है, तो बड़ी बात होगी. क्योंकि प्रमुख ब्याज दरें बढ़ गई हैं और निर्यात धीमा हो गया है.