
राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) की मौत से ठीक एक हफ्ते पहले नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके साथ लो कॉस्ट एयरलाइन अकासा (Akasa) का उद्घाटन कर रहे थे. लेकिन ये किसी को नहीं मालूम था कि अकासा की पहली उड़ान के 7 दिनों बाद झुनझुनवाला इस तरह दुनिया से विदा हो जाएंगे. बीमारी के बावजूद झुनझुनवाला एयरलाइन की पहली फ्लाइट के वक्त मौजूद थे. झुनझुनवाला की तरह ही पहली फ्लाइट में सफर करने वाले यात्री भी इस नए आगाज से उत्साहित थे.
अब भारत के बिग बुल के नाम से मशूहर रहे राकेश झुनझुनवाला की अचानक हुई मौत से अकासा एयरलाइन के भविष्य पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.
अकासा के कितने शेयरधारक?
अकासा एयरलाइन में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी राकेश झुनझुनवाला के पास थी. इस लो कॉस्ट एयरलाइन के शेयरहोल्डिंग पैटर्न को समझें तो राकेश झुनझुनवाला के पास अकासा एयरलाइंस के करीब 40 फीसदी शेयर थे. वहीं उनकी पत्नी रेखा और उनकी हिस्सेदारी को मिला दिया जाए तो ये आंकड़ा 45.97 फीसदी तक पहुंच जाता है.
ये हिस्सेदारी एक ट्रस्ट के पास है, जिसमें उनके तीनों बच्चों के नाम भी शामिल हैं. वहीं दूसरे नंबर पर अकासा एयरलाइन में सबसे बड़ी हिस्सेदारी विनय दुबे की है, जिनके पास करीब 16 फीसदी शेयर हैं. इसके अलावा संजय दुबे, नीरज दुबे, कार्तिक वर्मा और माधव भटकुली भी अकासा के प्रमोटर्स हैं.
कौन संभालेगा अकासा एयरलाइन?
अकासा के फाउंडर और एयरलाइन के सबसे बड़े शेयरधारक झुनझुनवाला की मौत के बाद क्या एयरलाइन अपने ऑपरेशंस जारी रख पाएगी? इस सवाल के जवाब में बाकी प्रमोटर्स का दावा है कि एयरलाइन के कामकाज पर कोई असर नहीं होगा. इसकी वजह है कि झुनझुनवाला की अकासा के रोजाना के कामकाज में कोई दखलंदाजी नहीं थी.
अकासा एयरलाइन का संचालन एस्टेट की जिम्मेदारी है और शेयरधारकों की हिस्सेदारी की स्ट्रक्चरिंग इस तरह की गई है की इसका एयरलाइन के कामकाज पर असर नहीं होगा. इसके साथ ही दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक एविएशन सेक्टर के दिग्गज विनय दुबे कंपनी के CEO हैं. उन्हें अकासा एयरलाइन का ब्रेन माना जा रहा है. वही इस आइडिया में फंडिंग के लिए झुनझुवाला से मिले थे. ये मुलाकात झुनझुवाला की स्टॉक ट्रेडिंग कंपनी RARE के CEO उत्पल सेठ ने कराई थी.
मुनाफे के बारे में नहीं सोचा
सबसे पहले विनय दुबे अपने आइडिया के साथ सेठ से ही मिले थे. उनको आइडिया पसंद आया तो सेठ ने दुबे की झुनझुवाला से मुलाकात कराई थी. झुनझुवाला को भी ये कारोबार मुनाफे वाला लगा तो उन्होंने फंडिंग के लिए हामी भर दी. इसके बाद एक बार जब झुनझुवाला से पूछा भी गया कि अगर अकासा ने मुनाफा नहीं दिया तो वो क्या करेंगे? इस पर झुनझुवाला ने कहा था कि वो मुनाफे के बारे में सोच ही नहीं रहे हैं.
मजबूत टीम है मौजूद
झुनझुवाला ने अकास एयरलाइन में पैसा लगाया और इसे चलाने की जिम्मेदारी विनय दुबे को सौंप दी. वो अकासा के रोजाना के कामकाज और दूसरे बड़े फैसलों के साथ सीधे जुड़े हैं. उनके पास इसके ऑपरेशन के लिए एक मजबूत टीम है, जिसका हिस्सा इंडिगो एयरलाइन के CEO रहे आदित्य घोष भी हैं.
अकासा की मजबूती की एक बड़ी वजह है कि इसपर किसी तरह का कर्ज नहीं है. साथ ही अगले 7 महीनों में 16 नए एयरक्राप्ट के शामिल होने से भी एयरलाइन का कामकाज तेज होने की उम्मीद है. झुनझुनवाला का जाना एयरलाइन के लिए एक बेहद बड़ा नुकसान तो है. लेकिन एक कंपनी के तौर पर झुनझुनवाला इसे बिना किसी दिक्कत के चलाए रखने का इंतजाम भी अपने रहते ही कर दिया था.