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Ratan Tata रतन टाटा की आखिरी वसीयत... 'सवाल उठाने वालों को कुछ नहीं मिलेगा', जानिए किसे क्या मिला?

Ratan Tata ने अपनी अंतिम वसीयत के लास्ट पैरा में चेतावनी दी है कि जो भी इसे किसी भी तरह से चुनौती देगा, उसे मेरी वसीयत के तहत सभी अधिकार या लाभ छोड़ देने होंगे और उसे कोई विरासत नहीं मिलेगी.

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2022 में बनाई गई थी रतन टाटा की अंतिम वसीयत
2022 में बनाई गई थी रतन टाटा की अंतिम वसीयत

दिवंगत भारतीय उद्योगपति रतन टाटा की अंतिम वसीयत (Ratan Tata Last Bill) सामने आ चुकी है और इसमें उन्होंने खुद से जुड़े सभी लोगों को याद किया है. फिर चाहे वो ड्राइवर हो, घर के नौकर हों, खास दोस्त हों या फिर पालतू जानवर. टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का निधन बीते साल 9 अक्टूबर 2024 को हुआ था और उन्होंने अपनी आखिरी वसीयत 23 फरवरी 2022 को बनाई थी. इंडिया टुडे टीवी ने उनके वसीयतनामा को एक्सेस किया है, जिसमें साफतौर पर बताया गया है कि दिवंगत उद्योगपति की संपत्ति में से किसे क्या दिया जाना चाहिए, इसके साथ ही इसमें उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा के बारे में भी बताया था और इस वसीयत को चुनौती देने वालों को भी चेतावनी दी थी.

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1996 में बनाई थी पहली वसीयत
दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा ने अपनी अंतिम वसीयत तैयार करने से पहले दो वसीयतें बनाई थीं. इनमें पहली उन्होंने 18 अप्रैल 1996 को तैयार की थी, तो वहीं दूसरी 10 नवंबर 2009 को बनाई गई थी. लेकिन इसके बाद 23 फरवरी 2022 में उन्होंने अपनी अंतिम वसीयत बनाते समय इन्हें रद्द कर दिया था. रतन टाटा ने अपनी अंतिम वसीयत के लिए मेहली मिस्त्री, डेरियस खंबाटा, शिरीन जीजीभॉय और डीनना जीजीभॉय एग्‍ज‍िक्‍यूटर्स के रूप में भी शामिल किया था. वसीयत में ये भी उल्लेख किया गया है कि टाटा संस और चैरिटी सेक्शन में रतन टाटा के शेयरों (Ratan Tata Shares) का क्या होगा?

आखिरी समय में सिर्फ एक मोबाइल फोन
Ratan Tata के पास सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति और प्रॉपर्टी थी, लेकिन 9 अक्टूबर 2024 को उनके निधन के समय उनके पास सिर्फ एक मोबाइल फोन था, जो नोकिया (Nokia) का था. बता दें कि रतन टाटा द्वारा बनाए गए एग्‍ज‍िक्‍यूटर्स द्वारा बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में प्रोबेट के लिए याचिका दायर की गई थी. उनकी अंतिम वसीयत से पता चलता है कि दिवंगत उद्योगपति के पास करीब 34 कलाई घड़ियां थीं, जिनमें दुनिया के टॉप ब्रांड्स और टाटा समूह की कंपनी टाइटन वॉच के अलावा एक ताज महल पैलेस घड़ी भी शामिल थी.

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बिल के मुताबिक, रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन और ट्रस्ट को बड़ी हिस्सेदारी दी गई है. इसके साथ ही बहनों शिरीन और डीना को कुल संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा दिया गया है. भाई नवल टाटा को चांदी जुहू का बंगला, मेहली मिस्त्री को अलीबाग की प्रॉपर्टी मिली है. 

इन कामों में इस्तेमाल हो शेयर की कमाई
वसीयत पर गौर करें तो रतन टाटा चाहते थे कि टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के उनके शेयर और टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के प्रेफरेंस शेयर, हमेशा सार्वजनिक धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए ट्रस्ट में रखे जाएं और उनसे होने वाली इनकम को इन्हीं कामों में लगाया जाए. इनमें स्कूलों या कॉलेजों में दान, गरीब परिवारों या अनाथालयों के छात्रों की शिक्षा के लिए, वृद्धाश्रमों या अनाथालयों को दान शामिल हैं. इसके अलावा जरूरतमंदों को इलाज के अलावा आवारा कुत्तों की देखभाल करने वाले पशु अस्पतालों व संगठनों की आर्थिक मदद के लिए उपयोग हो. 

वसीयत की बड़ी बातें

  • 3 घरेलू नौकरों से कर्ज की वसूली न हो, साथ ही संपत्ति में से 15 लाख रुपये उन्हें दिए जाएं. 
  • 2 लाख रुपये की राशि ऊपर ड्राइवरों को वितरित करें और जो मृत्यु की तारीख तक 7 साल की सर्विस में रहे हैं. 
  • शांतनु नायडू को दिए गए छात्र ऋण की कोई भी शेष राशि वसूल नहीं की जानी चाहिए. 
  • मृत्यु के समय कोई भी जीवित पालतू जानवर है, तो 12 लाख रुपये अलग से निर्धारित करें. प्रत्येक पालतू जानवर के जीवनकाल के लिए प्रति तिमाही 30000 रुपये रखे जाएं. 
  • भाई जिमी नवल टाटा, बहनों शिरीन जीजीभॉय और डीना जीजीभॉय को आभूषण और चांदी के सामान दिए जाएं.
  • जुहू स्थित बंगले में एक चौथाई हिस्सा भाई जिमी नवल टाटा को दिया जाए. अलीबाग के वरसोली स्थित बंगला उनके करीबी मित्र मेहली मिस्त्री को दिया जाए. मिस्त्री का निधन होने पर ये दाम में जाए.  
  • पेंटिंग-आर्ट से रिलेटेड चीजों का मूल्यांकन हो और उन्हें बेचा जाए. गरीबों में वितरण के लिए NGO या एजेंसी को कपड़े दिए जाएं.

दोस्त को मिलेंगी रतन टाटा की बंदूकें
Ratan Tata की बिल के मुताबिक, उनके पास तीन हथियार थे, जिनका लाइसेंस मुंबई पुलिस से लिया गया था. इनमें एक 25 बोर पिस्टल कोल्ट, 12 बोर डीबीबीएल गन आर्मी और एक 22 पोस्टोल हाई स्टैंडर्ड स्पेयर बैरल शामिल है. टाटा की वसीयत में तीनों हथियार उनके मित्र मेहली मिस्त्री को दिए गए हैं और अगर वे किसी कारण से वसीयत स्वीकार नहीं करते हैं, तो एक्सिक्युटर्स को कानून के अनुसार सर्वोत्तम संभव कीमत पर हथियारों बेचने होंगे और उस राशि को दान देना होगा. 

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रतन टाटा की अंतिम इच्छा और चेतावनी 
रतन टाटा द्वारा तैयार कराई गई अंतिम वसीयत में उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा भी जाहिए की है और वसीयत को न मानने वालों को चेतावनी भी दी है. इसमें लिखा है कि, 'यह मेरी इच्छा है कि मेरे निधन के बाद मेरे नश्वर अवशेषों का अंतिम संस्कार किया जाए और मेरी राख को मुंबई के आस-पास के समुद्र में ही प्रवाहित किया जाए, जिसे मैं बहुत प्यार करता हूं.' इसके अलावा इस वसीयत के अंतिम पैरा में निर्देश दिया गया है कि अगर कोई भी इस अंतिम वसीयत को किसी भी तरह से चुनौती देगा, उसे मेरी वसीयत के तहत सभी अधिकार या लाभ छोड़ देने होंगे और उसे कोई विरासत नहीं मिलेगी.

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