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साइरस की अंतिम संस्कार में पहुंचीं रतन टाटा की सौतेली मां, मिस्त्री परिवार ये है रिश्ता

साइरस मिस्‍त्री ने 2006 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे और 2012 में वो टाटा संस के चेयरमैन बने थे. वह ग्रुप के छठे चेयरमैन थे. 54 वर्षीय साइरस मिस्‍त्री भारतीय मूल के सबसे सफल और ताकतवर कारोबारियों में से एक पलोनजी शापूरजी मिस्‍त्री के बेटे थे.

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रतन टाटा की सौतेली मां सिमोन टाटा साइरस मिस्त्री के अंतिम संस्कार में शामिल हुईं.
रतन टाटा की सौतेली मां सिमोन टाटा साइरस मिस्त्री के अंतिम संस्कार में शामिल हुईं.

टाटा संस (Tata Sons) के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) का आज सुबह 11 बजे वर्ली श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया. तमाम लोगों को साथ साइरस मिस्त्री के अंतिम संस्कार में रतन टाटा (Ratan Tata) की सौतेली मां सिमोन टाटा (Simone Tata) भी शामिल हुईं.

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टाटा ग्रुप और साइरस मिस्त्री के बीच हुए विवाद के बाद उनके अंतिम संस्कार में सिमोन टाटा की उपस्थिती काफी महत्व रखती है. साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन के पद से अचानक हटा दिया गया था, जिसके बाद टाटा ग्रुप और मिस्त्री का विवाद अदालत तक पहुंचा था.

2012 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे साइरस

साइरस मिस्‍त्री ने 2006 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे और 2012 में वो टाटा संस के चेयरमैन बने थे. वह ग्रुप के छठे चेयरमैन थे. उनके कंधों पर रतन टाटा की विरासत का भार था, क्योंकि रतन टाटा के रिटायर होने के बाद 18 महीने की तलाश चली और फिर उनके कंधे पर टाटा की जिम्मेदारी आई थी. लेकिन आंतरिक खींचतान के बाद 2016 में साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया था.

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मिस्त्री परिवार से क्या है सिमोन टाटा का संबंध?

54 वर्षीय साइरस मिस्‍त्री भारतीय मूल के सबसे सफल और ताकतवर कारोबारियों में से एक पलोनजी शापूरजी मिस्‍त्री के बेटे थे. पलोनजी शापूरजी के दो बेटे और दो बेटियां हैं. बड़े बेटे का नाम शापूर मिस्‍त्री है और साइरस मिस्त्री छोटे बेटे थे. साइरस मिस्त्री की दो बहनें लैला और अल्‍लू हैं. अल्लू की शादी रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा से हुई है और नोएल टाटा की मां सिमोन टाटा हैं.

रतन टाटा से भिड़ गए थे साइरस

साइरस मिस्त्री वो शख्स रहे जो सीधे रतन टाटा तक से भिड़ गए और टाटा के चेयरमैन पद से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गए. जिस समय साइरस मिस्त्री को चेयरमैन बनाया गया, तब कंपनी का कारोबार 100 अरब डॉलर के आसपास था.

तब मिस्‍त्री से यह उम्‍मीद जताई जा रही थी कि वे वर्ष 2022 तक इस कारोबार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचा देंगे. लेकिन आंतरिक खींचतान के बाद 2016 में साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया. चेयरमैन पद से हटाए जाने के तौर-तरीके के खिलाफ साइरस मिस्त्री NCLT चले गए. 

टाटा को मिली थी जीत

उनके हक की लड़ाई का ये मामला NCLAT भी पहुंचा. टाटा समूह से भिड़ जाने वाले साइरस मिस्त्री को इस मामले में जीत भी मिली. एनसीएलएटी ने इस मामले में मिस्त्री को चेयरमैन पद पर वापस नियुक्त करने का फैसला सुनाया. लेकिन टाटा समूह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चला गया. सुप्रीम कोर्ट से टाटा समूह को जीत हासिल हुई. इसके बाद साइरस वापस अपने परिवार के बिजनेस में लौट आए.

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