वित्त वर्ष 2022-23 (FY23) में रिजर्व बैंक (RBI) की पहली मॉनीटरी पॉलिसी (MPC) रीव्यू मीटिंग आज शुक्रवार को खत्म हो गई. बैठक समाप्त होने के बाद रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास (Governor Shaktikant Das) ने महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी. रिजर्व बैंक ने रिकॉर्ड लगातार 11वीं बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) और रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) को पुराने स्तर पर बरकरार रखा है. इससे साफ पता चलता है कि सेंट्रल बैंक (Central Bank) अभी भी महंगाई (Inflation) को कोई बड़ा रिस्क नहीं मान रहा है और इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) को सपोर्ट देना उसकी प्रॉयरिटी में है. आइए जानते हैं कि तीन दिनों की बैठक में रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने कौन-कौन से महत्वपूर्ण निर्णय लिए. रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैठक के बाद जो जानकारियां दी, उसकी 10 अहम बातें इस प्रकार हैं...
ब्याज दरें (Interest Rates): कोरोना महामारी शुरू होने के बाद से दुनिया भर के तमाम सेंट्रल बैंकों ने इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए लोअर ब्याज दरों का रास्ता अपनाया. रिजर्व बैंक ने भी इकोनॉमी को सहारा देने के लक्ष्य को ऊपर रखा. इस कारण करीब तीन साल से भारत में ब्याज दरें अपने निचले स्तर पर बरकरार हैं. रिजर्व बैंक की एमपीसी ने नए वित्त वर्ष की पहली बैठक में भी प्रमुख दरों रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया. रेपो रेट को 4 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट को 3.35 फीसदी पर ही स्थिर रखा गया है. रिजर्व बैंक ने अपने रुख में भी कोई बदलाव नहीं किया है और अकोमोडेटिव स्टान्स को बनाए रखा गया है. रिजर्व बैंक ने एमएसएफ और बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया है.
जीएसटी कलेक्शन (GST Collection): प्रतिकूल परिस्थितियों के बाद भी जीएसटी कलेक्शन के मामले में रिकॉर्डबन रहा है. मार्च महीने में जीएसटी कलेक्शन 1,42,095 करोड़ रुपये रहा, जो अभी तक किसी भी एक महीने का सबसे अधिक कलेक्शन है. इससे पहले जनवरी 2022 में 1,40,986 करोड़ रुपये के कलेक्शन का रिकॉर्डबना था.
ऑटो सेल (Auto Sale): महामारी की मार झेलने के बाद कारों की बिक्री सुधर रही है. चिप संकट के बाद भी मार्च में कारों की बिक्री फरवरी की तुलना में बढ़ी है. मार्च में जहां 3,21,550 कारों की बिक्री हुई, वहीं फरवरी में यह आंकड़ा 3,02,857 पर रहा था. इस तरह मासिक आधार पर कारों की बिक्री में 6.17 फीसदी की तेजी आई.
बिजली और ईंधन की खपत (Power & Fuel Consumption): देश में डीजल-पेट्रोल समेत ईंधन की खपत में तेजी आ रही है. इससे पता चलता है कि इंडस्ट्री की रफ्तार तेज हो रही है. मार्च महीने में देश में बिजली की खपत भी तेज हुई है. यह इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज में तेजी आने का संकेत देता है.
ग्रोथ रेट (Growth Rate): इकोनॉमिक ग्रोथ के मामले में आरबीआई को अनुमान है कि इसमें नरमी आ सकती है. पूरे वित्त वर्ष 2022-23 के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.8% से घटाकर 7.2% कर दिया गया है. गवर्नर दास के अनुसार, इकोनॉमिक ग्रोथ रेट पहली तिमाही में 16.2%, दूसरी तिमाही में 6.2%, तीसरी तिमाही में 4.1% और चौथी तिमाही में 4% रह सकती है.
मंहगाई (Inflation): चालू वित्त वर्ष में महंगाई का प्रेशर बने रहने की आशंका है. वित्त वर्ष 2022-23 में इसके 5.7 फीसदी पर रहने का अनुमान है. गवर्नर दास ने कहा कि महंगाई की दर पहली तिमाही में 6.3%, दूसरी तिमाही में 5%, तीसरी तिमाही में 5.4% और चौथी तिमाही में 5.1% रह सकती है.
फॉरेक्स रिजर्व (Forex Reserve): गवर्नर दास ने वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में फॉरेक्स रिजर्व के महत्व की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत ने लगातार विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया और यह अभी 606.5 बिलियन डॉलर के स्तर पर है. इससे कई मामलों में देश को सिक्योरिटी मिलती है.
कार्डलेस कैश विड्रॉल (Cardless Cash Withdrawal): आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि जल्दी की सभी बैंकों और एटीएम में बिना कार्ड के कैश निकालने की सुविधा शुरू की जाएगी. यह सिस्टम यूपीआई बेस्ड होगा. इसके अलावा भारत बिल पेमेंट सिस्टम ऑपरेटिंग यूनिट के लिए नेटवर्थ की लिमिट को घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया है. पहले यह लिमिट 100 करोड़ रुपये थी.
एक्सटर्नल फैक्टर्स (External Factors): आरबीआई की एमपीसी ने इस बार की बैठक में बाहरी कारकों को ध्यान में रखा गया. गवर्नर दास के ऐलान में भी यह साफ दिखा. उन्होंने क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और अनाज समेत कई अन्य कमॉडिटीज की कीमतों में उथल-पुथल का जिक्र किया. दास ने बताया कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग ने पूरी दुनिया पर असर डाला है. इस जंग के चलते ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ पर डाउनसाइड रिस्क बढ़ा है.
ग्रामीण मांग (Rural Demand): गवर्नर दास ने कहा कि इस बार मानसून सामान्य रहने का अनुमान है. इसके साथ ही इस रबी सीजन में एग्री प्रोडक्शन रिकॉर्ड स्तर पर रहने का भी अनुमान है. ये सारे फैक्टर बताते हैं कि ग्रामीण मांग शानदार बनी रहेगी.