भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की हर दो महीने में होने वाली तीन दिवसीय समीक्षा खत्म हो गई है. रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में कोई बदीाव नहीं किया है. RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मॉनिटर पॉलिसी ने एकमत से यह तय किया कि ब्याज दरों में कोई बदलाव न किया जाए.
रेपो रेट 4 पर्सेंट और रिवर्स रेपो रेट 3.5 पर्सेंट पर बरकरार रखा गया है. इसके अलावा अन्य दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका मतलब यह है कि लोगों के लोन ईएमआई पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा और वे यथावत रहेंगी.
टूरिज्म और हॉस्पिटलिटी सेक्टर को राहत
कोरोना से बर्बाद हो चुके टूरिज्म एवं हॉस्पिटलिटी सेक्टर को सरकार ने कोई राहत अब तक नहीं दी है. लेकिन इन सेक्टर को अब रिजर्व बैंक के माध्यम से राहत दिया जा रहा है. रिजर्व बैंक के गवर्नर ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा का ऐलान करते हुए कहा कि बैंकों के माध्यम से इन सेक्टर को राहत दी जाएगी.
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा का ऐलान करते हुए कहा कि 15 हजार करोड़ रुपये की नकदी की व्यवस्था बैंकों को जाएगी. इससे बैंक होटल, टूर ऑपरेटर, रेस्टोरेंट, प्राइवेस बस, सलोन, एविएशन एंसिलियरी सेवाओं ऑपरेटर आदि को किफायती लोन दे सकेंगे.
इस साल 9.5 फीसदी होगी जीडीपी ग्रोथ
रिजर्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी ग्रोथ 9.5 फीसदी रह सकती है. यह आंकड़ा अच्छा है, लेकिन यह रिजर्व बैंक के पहले के 10.5 फीसदी के अनुमान से कम है. रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान है और इसकी वजह से ग्रामीण मांग मजबूत रहेगी, जिसकी वजह से जीडीपी में काफी अच्छी बढ़त होने का अनुमान है.
अप्रैल में भी दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था
शक्तिकांत दास ने कहा कि रिजर्व बैंक कोरोना के असर पर नजर रखेगा और उसके बाद आगे की समीक्षा में कोई निर्णय लिया जाएगा. गौरतलब है कि इसके पहले रिजर्व बैंक की MPC ने अप्रैल 2021 में हुई अपनी पिछली बैठक में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया था. यह लगातार छठवीं ऐसी MPC मीट है जिसमें आरबीआई की अहम दरें वर्तमान स्तरों पर ही बरकरार रखी गई है.
इस साल 5.1% रह सकती है खुदरा महंगाई
शक्तिकांत दास ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस साल यानी वित्त वर्ष 2021-22 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित (खुदरा महंगाई) 5.1 फीसदी रह सकती है.
जानकारों का मानना है कि कोरोना से जुड़ी अनिश्चितताओं और महंगाई से जुड़ी आशंकाओं के चलते आरबीआई अपने अहम दरों में कोई बदलाव नहीं कर रहा है. फिलहाल रेपो रेट 4 पर्सेंट पर है और रिवर्स रेपो रेट 3.5 पर्सेंट पर है. रिजर्व बैंक ने मई में जारी सालाना रिपोर्ट में कहा था कि 2021-22 के दौरान मॉनिटरी पॉलिसी का निर्धारण माइक्रो इकोनॉमिक स्थितियों और महंगाई के निर्धारित लक्ष्य के अंदर रहने पर निर्भर करेगा.
सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 के जीडीपी (GDP) के आंकड़े हाल में जारी किए हैं. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल जीडीपी में 7.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
कोरोना की लहर हुई कम
अप्रैल की शुरुआत में जब रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने पॉलिसी समीक्षा का ऐलान किया था, तब देश में कोरोना के हर दिन 1 लाख से ज्यादा नए केस आ रहे थे और 4,000 से ज्यादा मौतें हो रही थीं. लेकिन इसके बाद मई में हालात भयावह हो गए थे, जब डेली कोरोना केसेज की संख्या 4 लाख को पार कर गई थी. अब फिर से हालात काबू हैं और कोरोना के केसेज घट रहे हैं. देश में गुरुवार को कोरोना के 1.32 लाख नए मामले सामने आए और 2,713 लोगों की मौत हो गई.