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RBI Monetary Policy: ब्याज दरों में बदलाव नहीं, FY23 में 5.7% महंगाई का अनुमान

भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार 11वीं बार नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी.

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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (फाइल फोटो)
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बुधवार से शुरू हुई MPC की बैठक
  • 11वीं बार नहीं बदली ब्याज दरें
  • देश में ऊंचाई पर बनी रहेगी महंगाई

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को देश की मौद्रिक नीति समीक्षा पेश की. चालू वित्त वर्ष की इस पहली मौद्रिक समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट यानी कि नीतिगत ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा है. रेपो रेट 4% और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बरकरार है. इसी के साथ आरबीआई ने मौद्रिक नीति को लेकर अपने रुख में भी कोई बदलाव नहीं किया है और इसे लचीला बनाए रखा है. आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक बुधवार को शुरू हुई थी.

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16.2% रहेगी ग्रोथ रेट
मोनेटरी पॉलिसी में नीतिगत दरों को यथावत रखने के साथ ही आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर अनुमान घटाया है. ये पहली तिमाही में 16.2%, दूसरी तिमाही में 6.2%, तीसरी तिमाही में 4.1% और चौथी तिमाही में 4% रह सकती है. जबकि पूरे वित्त वर्ष 2022-23 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.2% रहने का अनुमान है.

ऊंचाई पर बनी रहेगी महंगाई
केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष में महंगाई के भी ऊंचाई पर रहने का अनुमान जताया है. वित्त वर्ष 2022-23 में इसके 5.7% पर रहने का अनुमान है. पहली तिमाही में महंगाई दर 6.3%, दूसरी तिमाही में 5%, तीसरी तिमाही में 5.4% और चौथी तिमाही में 5.1% रहने वाली है.

महंगाई की दर भले ऊंचाई की तरफ बनी हुई है. लेकिन गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) का कहना है कि ये रिजर्व बैंक के लक्ष्य के भीतर है. भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई दर को 4% के दायरे में रखने का लक्ष्य रखा है. इसमें 2% का उतार-चढ़ाव हो सकता है.

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मई 2020 में बदली थी दरें
रिजर्व बैंक ने 11वीं बार भी नीतिगत दरों को समान स्तर पर बनाए रखा है. इससे पहले की 10 बैठकों के बाद भी रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट यानी की नीतिगत ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा गया था. आरबीआई ने आखिरी बार 22 मई 2020 को रेपो रेट में कटौती की थी, तब से ये 4% के अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर बनी हुई हैं.

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