भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की हर दो महीने पर होने वाली बैठक सोमवार से शुरू हो गई है. यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब कोरोना के नए म्यूटेंट वैरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) ने फिर से अनिश्चितता (Uncertainty) की स्थिति कायम कर दी है. लंबे समय से नीतिगत दरें (Policy Rates) स्थिर रखने के बाद एक ओर इस बात का दबाव है कि अब रुख बदला जाए, तो दूसरी ओर महामारी की नई लहर की आशंकाओं ने ब्याज दरों (Interest Rates) को निचले स्तर पर बनाए रखने की मांग मजबूत कर दी है.
अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा की यह है राय
अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों की इस बारे में राय है कि आरबीआई अगली बैठक तक वेट एंड वॉच (Wait and Watch) की रणनीति अपना सकता है. नाइट फ्रैंक इंडिया (Knight Frank India) की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा (Economist Rajani Sinha) का मानना है कि इस बैठक में रिजर्व बैंक दरों को स्थिर बनाए रख सकता है. सिन्हा का कहना है, दिसंबर बैठक में रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) को बढ़ाकर रेपो रेट (Repo Rate) के साथ की खाई कम करने के कयास लगाए जा रहे थे. इस बीच ओमिक्रॉन के चलते दुनिया समेत भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने भी अनिश्चितता और नर्वसनेस की स्थिति बन गई है. ऐसे में रिजर्व बैंक दरों को पुराने स्तर पर ही बनाए रखने का निर्णय ले सकता है.
फरवरी की बैठक से बढ़ सकती हैं दरें
उन्होंने कहा कि आरबीआई अगले साल से दरों को बढ़ाने का फैसला कर सकता है. भले ही ज्यादातर इकोनॉमिक इंडिकेटर प्री-कोविड लेवल (Pre-Covid Level) को पार कर चुके हों, अभी भी अर्थव्यवस्था में सुस्ती कायम है. रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति (Inflation) के बन रहे दबाव को लेकर भी चिंतित होगा. अभी इसका कारण कमॉडिटीज (Commodities) की अधिक कीमतें और आपूर्ति के व्यवधान (Supply Bottlenecks) हैं. आने वाले समय में मुद्रास्फीति के ऊपर डिमांड साइड का दबाव (Demand Side Pressure) बन सकता है. ऐसे में फरवरी 2022 की बैठक में दरों को बढ़ाना जरूरी हो जाएगा. दरें कितनी बढ़ाई जाएंगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ओमिक्रॉन का अर्थव्यवस्था पर कैसा असर पड़ता है.
इकोनॉमिस्ट अनिथा रंगन को रिवर्स रेपो बढ़ाने की उम्मीद
इक्वायरस (Equirus) की इकोनॉमिस्ट अनिथा रंगन (Economist Anitha Rangan) को इस बैठक में रिवर्स रेपो रेट में 0.40 फीसदी वृद्धि की उम्मीद है. रिवर्स रेपो को 0.40 फीसदी बढ़ाने से रेपो के साथ इसकी खाई 0.25 फीसदी की रह जाएगी. चूंकि ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे इस मौके पर मुद्रास्फीति के दबाव पर भारी हैं, हमारा अनुमान है कि आरबीआई का रुख नरम (Dovish) बना रहेगा और एमपीसी प्रो ग्रोथ अकोमोडेटिव (Accommodative) रवैया बनाए रखेगी.
रियल एस्टेट सेक्टर को ब्याज दरें कम बनाए रखने की उम्मीद
पोद्दार हाउसिंग एंड डेवलपमेंट लिमिटेड (Poddar Housing & Development Ltd) के मैनेजिंग डायरेक्टर रोहित पोद्दार (Rohit Poddar) भी रंगन की इस बात से सहमत दिखते हैं कि आरबीआई का ग्रोथ फ्रेंडली रवैया (Growth Friendly Stance) बना रहेगा. पोद्दार कहते हैं कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के आने से आर्थिक अनिश्चितता का नया दौर शुरू हो सकता है. ऐसे में हम आरबीआई से ग्रोथ फ्रेंडली रवैया बनाए रखने और नीतिगत दरों को स्थिर रखने की उम्मीद करते हैं. ब्याज दरों को निचले स्तर पर बनाए रखने से हाउसिंग सेक्टर को रिकवरी में मदद मिली है.
करीब डेढ़ साल से नहीं बदली हैं नीतिगत दरें
अगर इस बैठक में दरें नहीं बदली गईं तो यह लगातार नौवीं बैठक होंगी, जब इन्हें पुराने स्तर पर ही बनाए रखा जा गया है. इससे पहले रिजर्व बैंक ने मई 2020 की बैठक में नीतिगत दरों में कटौती की थी. ब्याज दरें तब से निचले स्तर पर है. पर्सनल लोन (Personal Loan) से लेकर व्हीकल लोन (Vehicle Loan) और होम लोन (Home Loan) तक की ब्याज दरें रिजर्व बैंक के रेपो रेट से तय होती हैं. यदि रेपो रेट बढ़ाया जाता है, तो सभी बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करने लगते हैं.