RBI Policy Meet: रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अहम बैठक आज संपन्न हो गई. बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikant Das) ने बताया कि रेपो रेट (Repo Rate) को स्थिर रखने का फैसला लिया गया है. इसका मतलब हुआ कि फिलहाल ब्याज दरें (Interest Rates) नहीं बढ़ने वाली हैं. इससे महंगाई (Inflation) का प्रेशर झेल रहे आम लोगों के ऊपर अभी ईएमआई (EMI) का बोझ नहीं बढ़ने वाला है.
मई 2020 से नहीं बढ़ा है रेपो रेट
गवर्नर दास ने बताया कि रेपो रेट 4 फीसदी पर बना रहेगा. रेपो रेट से बैंकों का ब्याज दर तय होता है. अगर रेपो रेट बढ़ता है तो ब्याज बढ़ जाता है, जिससे लोन और ईएमआई का बोझ बढ़ जाता है. अभी देश में ब्याज दरें रिकॉर्ड लो लेवल पर हैं. रिजर्व बेंक ने कोरोना महामारी के चलते रेपो रेट को लगातार कम किया. रेपो रेट में आखिरी बाद बदलाव मई 2020 में किया गया था. तब रिजर्व बैंक ने इसे 0.40 फीसदी घटा दिया था. उसके बाद से रेपो रेट 4 फीसदी के निचले स्तर पर है.
RBI के लिए इकोनॉमिक ग्रोथ प्रॉयरिटी
RBI MPC की यह बैठक मंगलवार से चल रही थी. पहले बैठक सोमवार से ही होने वाली थी और इसके नतीजे बुधवार को सामने आने वाले थे. स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन के चलते बैठक एक दिन के लिए टल गई. यह बजट के बाद की पहली और इस फाइनेंशियल ईयर (FY 22) की आखिरी एमपीसी बैठक है. यह बैठक ऐसे समय हुई, जब एक तरफ बढ़ती महंगाई का प्रेशर है तो दूसरी ओर महामारी की तीसरी लहर झेल रही इकोनॉमी को सहारा देना है. सेंट्रल बैंक ने इकोनॉमी को प्रॉयरिटी में रखा.
रिवर्स रेपो रेट में भी बदलाव नहीं
रिजर्व बैंक की 6 सदस्यों वाली एमपीसी ने रिवर्स रेपो रेट को भी नहीं बढ़ाने का फैसला किया. रिवर्स रेपो रेट को भी 3.35 फीसदी पर स्थिर रखा गया है. रिवर्स रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिसके आधार पर आरबीआई बैंकों को फंड देता है. ऐसा माना जा रहा था कि रिवर्स रेपो रेट को बढ़ाया जा सकता है.
सेंट्रल बैंक को महंगाई कम होने की उम्मीद
रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट के साथ ही पॉलिसी स्टान्स में भी कोई बदलाव नहीं किया. सेंट्रल बैंक के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने वाला है. पहले ऐसा माना जा रहा था कि रिजर्व बैंक महंगाई के बढ़ते दबाव के चलते पॉलिसी स्टान्स को बदल सकता है और अगली बैठक से रेपो रेट को बढ़ाया जा सकता है. रुख नहीं बदलने से ऐसा लग रहा है कि शायद अगली बैठक में भी रेपो रेट को नहीं बढ़ाया जाए. गवर्नर दास ने बताया कि रिजर्व बैंक को महंगाई के मोर्चे पर आने वाले समय में राहत की उम्मीद है. अगर ऐसा होता है तो सेंट्रल बैंक महंगाई के बजाय इकोनॉमी को तरजीह देने की रणनीति को आगे भी बरकरार रख सकता है.