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RBI Monetary Policy: EMI में और राहत नहीं, रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया

RBI Monetary Policy: हर दो महीने पर होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा के लिए बैठक संपन्न हो चुकी है. रिजर्व बैंक ने लोगों को ईएमआई पर और राहत न देते हुए ब्याज दरों को यथावत रखने का ऐलान किया है.

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रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (फाइल फोटो: PTI)
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (फाइल फोटो: PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा
  • इकोनॉमी पर अहम अनुमान जारी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हर दो महीने पर होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा के लिए बैठक संपन्न हो चुकी है और आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने इसके नतीजों का ऐलान कर दिया है. रिजर्व बैंक ने लोगों को ईएमआई पर और राहत न देते हुए ब्याज दरों को यथावत रखने का ऐलान किया है. यानी रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 

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रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) आज यानी 8 दिसंबर को अपनी चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश किया है. रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब महामारी से निपटने के लिए बेहतर रूप से तैयार है. 

रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 6 दिसंबर को शुरू हुई थी. मौद्रिक नीति कमिटी के सदस्यों ने 5:1 के बहुमत से नरम रुख अपनाने के रवैए का समर्थन किया है.

जीडीपी ग्रोथ का ये है अनुमान 

रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जीडीपी ग्रोथअनुमान 9.5 फीसदी बरकरार रखा है. रिजर्व बैंक के मुताबिक इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.6% और चौथी तिमाही में 66% रह सकता है. हालांकि अगले वित्त वर्ष यानी 2022-23 की पहली तिमाही में 17.2% की शानदार जीडीपी ग्रोथ हो सकती है. 

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कई जानकारों ने पहले ही यह कहा था कि अर्थव्यवस्था में रिकवरी को और मजबूत करने के लिये रिजर्व बैंक दरों में बढ़ोतरी या कमी करने को लेकर कुछ और इंतजार कर सकता है.

शक्तिकांत दास ने कहा कि महंगाई हमारे पहले के अनुमान के मुताबिक ही है. रबी की अच्छी फसल होने की वजह से आगे कीमतें कम होंगी. सब्जियों की कीमत में भी कमी आ सकती है. इस वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में महंंगाई पीक पर जाएगी, लेकिन उसके बाद इसमें नरमी आएगी. 

डिजिटल पेमेंट में ये लिमिट बढ़ी 

शक्तिकांत दास ने कहा कि डिजिटल पेमेंट में विभ‍िन्न चार्जेज को किफायती बनाने के लिए एक स्टडी की जाएगी. इसी तरह डिजिटल पेमेंट को ज्यादा समावेशी बनाने के लिए फीचर फोन आधारित यूपीआई आधारित पेमेंट सिस्टम तैयार किया जाएगा. इसी तरह रिटेल डायरेक्ट जीसेक और आईपीओ में यूपीआई से पेमेंट की लिमिट को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाएगा. 

अभी कितनी है दरें 

गौरतलब है कि रेपो दरें अप्रैल 2001 के बाद से सबसे निचले स्तर 4 फीसदी पर हैं और रिवर्स रेपो दरें 3.35 प्रतिशत हैं. रेपो दर वह रेट होती है जिस पर रिजर्व बैंक से बैंकों को कर्ज मिलता है. दूसरी तरफ, रिवर्स रेपो रेट इसका उलटा होता है यानी रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है जो बैंकों को रिजर्व बैंक के पास अपना पैसा रखने पर ब्याज मिलता है. 

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